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Tokyo Olympics 2020 : अब दीपिका को व्यक्तिगत तीरंदाजी में दिखाना होगा दम, उम्मीदें अभी भी नहीं हुई खत्म

भले ही टोक्यो ओलिपिंक की मिक्सड डबल्स स्पर्धा में भारतीय तीरंदाज दीपिका कुमारी व प्रवीण जाधव को निराशा हाथ लगी हो लेकिन अभी भी उम्मीदें खत्म नहीं हुई है। व्यक्तिगत स्पर्धा में विश्व की नंबर वन खिलाड़ी से उम्मीदें हैं।

Jitendra SinghSat, 24 Jul 2021 04:17 PM (IST)
Tokyo Olympics 2020 : अब दीपिका को व्यक्तिगत तीरंदाजी में दिखाना होगा दम, उम्मीदें अभी भी नहीं हुई खत्म

जमशेदपुर। भले ही भारतीय तीरंदाजी टीम को मिक्सड डबल्स स्पर्धा में निराशा हाथ लगी हो, लेकिन उम्मीदें अभी भी जिंदा है। टोक्यो ओलिंपिक 2020 में शनिवार को मिक्सड डबल्स की स्पर्धा के अंतिम आठ में दीपिका कुमारी व प्रवीण जाधव की जोड़ी को कोरिया के हाथों निराशा मिली। महिला वर्ग की व्यक्तिगत तीरंदाजी स्पर्धा में 28 जुलाई को दीपिका का मुकाबला भूटान से होगा। भूटान को पार पाने के बाद ही अगला मुकाबला तय होगा। अगर व्यक्तिगत स्पर्धा की बात करें तो कोरिया और अमेरिका भारतीय तीरंदाज दीपिका कुमारी के समक्ष चुनौती पेश करेंगी। ग्वाटेमाला व पेरिस विश्वकप तीरंदाजी में शानदार प्रदर्शन करते हुए टोक्यो पहुंची दीपिका कुमारी पर उम्मीदों का दवाब है।

टाटा तीरंदाजी अकादमी व दीपिका की कोच पूर्णिमा महतो की माने तो जो इस दबाव को झेल लेगा, वही विजेता होगा। दीपिका काफी अनुभवी खिलाड़ी है। वह इस तरह की परिस्थतियों का सामना करने की आदी हो चुकी है। मैदान पर दीपिका को दम दिखाना होगा और बिना किसी दबाव में शूट करना होगा। अभी भी हमारे पास पदक जीतने का मौका है। उन्होंने कहा कि टोक्यो ओलिंपिक के हर स्थिति को झेलने के लिए पुरुष टीम को भी तैयार रहना होगा। पुरुष टीम स्पर्धा 26 जुलाई से शुरू हो रहा है।

टाटा तीरंदाजी अकादमी की कैडेट रह चुकी है दीपिका

दीपिका कुमारी ओलिंपिक तीरंदाजी में तीसरी बार देश का प्रदर्शन कर रही है। करियर के शुरुआती दिनों में दीपिका को काफी संघर्ष करना पड़ा था। वर्तमान में विश्व नंबर वन खिलाड़ी दीपिका कुमारी ने महज 12 साल में ही इस खेल से जुड़ने का फैसला कर लिया। पहली बार उन्हें टाटा तीरंदाजी अकादमी में जगह नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। सरायकेला स्थित अर्जुन तीरंदाजी अकादमी से सफर शुरू करने वाली दीपिका कुमारी को कुछ दिनों बाद ही टाटा तीरंदाजी अकादमी में दाखिला हो गया। इसके बाद तो टाटा तीरंदाजी अकादमी उनका दूसरा घर बन गया।

जब दीपिका को मिली निराशा

विश्व की नंबर वन तीरंदाज दीपिका की तीरंदाजी की कहानी 2006 में शुरू हुई जब वह अपने दोस्त और रिश्ते में बहन दीप्ति कुमारी के लोहरदगा स्थित घर गई थी। दीप्ति को तीरंदाजी करते देख उन्होंने भी इस खेल से जुड़ने का फैसला किया। दीपिका के पिता ऑटो ड्राइवर थे और घर की माली हालत अच्छी नहीं थी। मां नर्स का काम करती थी। दीपिका ने तीरंदाजी सीखने की जिद की तो लोहरदगा से रांची लौटने के बाद उनके पिता शिवनारायण और मां गीता माहतो उन्हें अर्जुन मुंडा अकादमी में लेकर गए।अकादमी की संचालक और अर्जुन मुंडा की पत्नी मीरा मुंडा ने दीपिका को देखकर कहा, 'तुमसे तो भारी धनुष है, तुमसे यह सब नहीं होगा।' दीपिका के माता-पिता की जिद के आगे एक न चली। दीपिका को ट्रायल का मौका मिल गया। लेकिन दीपिका को निराशा हाथ लगी। सरायकेला-खरसावां तीरंदाजी संघ के सचिव सुमंत चंद्र मोहंती ने कहा कि दीपिका के आवेदन को उस समय के कोच बी श्रीनिवास राव और हिमांशु मोहंती ने खारिज कर दिया था।

Edited By: Jitendra Singh

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