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Make In India : टाटा स्टील और जेएसडब्ल्यू स्टील अपनी टिनप्लेट कंपनियों की क्षमता में कर रही है बढ़ोतरी, ये है वजह

Tinplate Market प्लास्टिक क्रांति का सीधा असर टिनप्लेट पर पड़ा था। समय का पहिया ऐसा घूमा कि अब लोग प्लास्टिक को तौबा करने लगे हैं। ऐसे में टिनप्लेट कंपनियों का दिन बहुरने लगे हैं। कई कंपनियां डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ के लिए अब टिनप्लेट का प्रयोग करने लगे हैं।

Jitendra SinghWed, 22 Sep 2021 09:26 AM (IST)
Make In India : टाटा स्टील और जेएसडब्ल्यू स्टील अपनी टिनप्लेट कंपनियों की क्षमता में कर रही है बढ़ोतरी, ये है वजह

जमशेदपुर : केंद्र सरकार ने 17 जुलाई से स्टील और स्टील के उत्पाद (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश लागू किया है, जिसके तहत सभी उत्पाद ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) प्रमाणित होना अनिवार्य है। क्योंकि देश में जितनी तेजी से विकासशील देश से विकसित देश की ओर कदम बढ़ा रहा है। उतनी ही तेजी से खाद्य प्रद्वार्थों की पैकेजिंग और फ्लैट स्टील उत्पादों के लिए डाउनस्ट्रीम उत्पादों की डिमांड बढ़ती जा रही है।

इंवेस्टमेंट इंफोरमेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ऑफ इंडिया लिमिटेड (आईसीआरए) के आंकड़ों के तहत वित्त वर्ष 2020 में टिनप्लेट और टिन मुक्त स्टील का देश में 25 लाख टन का आयात होता था। हालांकि अंतराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें बढ़ने से वित्तीय वर्ष 2021 में 18 लाख टन का आयात हो रहा है। देश में टाटा स्टील और जेएसडब्ल्यू स्टील की ओर से कुल खपत का 65 प्रतिशत मांग को पूरा करता है। ऐसे में केंद्र सरकार की मेक इन इंडिया के तहत दोनो कंपनियां अब अपने टिनप्लेट कंपनी की क्षमता को बढ़ा रही है। इसका फायदा दोनों कंपनियों को घरेलू खपत, गुणवत्ता नियंत्रण सहित घरेलू बाजार से मिलने वाले आर्डर के रूप में मिलेगा।

जेएसडब्ल्यू करेगी 620,000 टन का उत्पादन

जेएसडब्ल्यू की ओर से जेएसडब्ल्यू कोटेड, जेएसडब्ल्यू वल्लभ टिनप्लेट और जेएसडब्ल्यू स्टील की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों की वर्तमान क्षमता 350,000 टन वार्षिक है। जिसे कंपनी बढ़ाकर 620,000 टन कर रही है। वहीं, टाटा स्टील भी अपनी सहायक कंपनी द टिनप्लेट कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड में अनुमानित 1800 करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश कर रही है। कंपनी की वर्तमान उत्पादन क्षमता 379,000 टन है जिसमें 300,000 टन का क्षमता विस्तार किया जा रहा है।

तीन साल में पूरी होगी परियोजना

जेएसडब्ल्यू बोर्ड ने टिनप्लेट कंपनी के क्षमता विस्तार परियोजना को स्वीकृत कर लिया है। मार्च 2022 से इसका काम शुरू हो जाएगा और इसे पूरा होने में संभवत: तीन साल का समय लगेगा। जेएसडब्लयू प्रबंधन का कहाना है कि जिस तेजी से देश का शहरीकरण हो रहा है उसी अनुपात में हम अपनी कंपनी की क्षमता में भी बढ़ोतरी कर रहे हैं। संगठित क्षेत्र में खुदरा क्षेत्र में प्रवेश ने हमें भविष्य में बेहतर बाजार दिख रहा है।

कोविड महामारी के बाद अच्छी तेजी

आईसीआरए के असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट ऋतब्रत घोष का कहना है कि उद्योग में पिछली तेजी इतनी रोमांचक नहीं थी। उद्योग में पांच से छह प्रतिशत की गति से बढ़ रहा था। लेकिन कोविड 19 महामारी आने के बाद जैसे-जैसे स्थिति सामान्य हो रही है। वैसे ही बाजार में तेजी आ रही है। देश में डिजिटलाइजेशन के कारण ऑनलाइन शॉपिंग क्रेज बढ़ा है। यही कारण है कि टिन पैकेज के लिए टिनप्लेट उत्पादों की डिमांड बढ़ती जा रही है। हालांकि कंपनियां भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा प्रमाणित टिनप्लेट के प्राइम ग्रेड के अनिवार्य उपयोग पर भी बड़ा दांव लगा रही है।

आयातित टिनप्लेट उत्पादों से बेहतर होगा भारतीय उत्पाद

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि टाटा स्टील के विस्तार का कारण काफी हद तक इस बात पर भी आधारित है कि देश में आयातित किए जा रहे टिनप्लेट की गुणवत्ता स्वदेशी, खासकर जमशेदपुर के टिनप्लेट प्लांट में तैयार किए जा रहे पैकेजिंग उत्पादों की तुलना में काफी बेहतर होंगे। टिनप्लेट की क्षमता विकास योजनाएं भी टाटा स्टील के विस्तार योजनाओं के अनुरुप ही होगा। इसका सबसे बड़ा एक और कारण है कि कोविड 19 के बाद विदेशी आपूर्तिकर्ता कंपनियां कई तरह के प्रतिबंधों के बाद बीआईएस प्रमाण लेने में सफल नहीं हो पा रहे हैं।

आभासी निरीक्षण के लिए नहीं है कोई प्रक्रिया

मेटल कंटेनर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एमसीएमए) के अध्यक्ष संजय भाटिया का कहना है कि वर्तमान में आभासी निरीक्षण के लिए कोई प्रक्रिया नहीं है। कोविड के कारण भौतिक निरीक्षण प्रभावित होता है। इसलिए,हमने सरकार से अनुरोध किया है कि बीआईएस की अधिसूचना को 31 मार्च, 2022 तक के लिए रोक दिया जाए।

बढ़ेंगी टिन उत्पादों की कीमत

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में घरेलू कीमतें अंतराष्ट्रीय कीमतों से कम है। लेकिन जब यहां उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का निर्माण होता तो उत्पादों की कीमतें बढ़ना तय है। हालांकि उपयोगकर्ता कंपनियां बढ़ती कीमतों पर चिंता जता रहे हैं। कई कंपनियां स्वदेशी कंटेनरों को प्राथमिकता देंगे। बशर्ते उनकी गुणवत्ता अच्छी और कीमत कम हो। क्योंकि पिछले पांच वर्षो में घरेलू कीमतों में 62 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है। जो पैकेजिंग सेक्टर की कंपनियों के लिए चिंता का विषय है। क्योंकि वे खाद्य उत्पादों की कीमतें नहीं बढ़ा सकते।

Edited By: Jitendra Singh

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