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रतन टाटा घाट पर ग्रामीणों ने लगाया अपना बैनर

जिस रतन टाटा घाट के निर्माण का शुभारंभ गत मंगलवार को सिटी एसपी प्रभात कुमार जमशेदपुर केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति के कार्यकारी अध्यक्ष चंद्रनाथ बनर्जी, महासचिव रामबाबू सिंह, थाना प्रभारी अनुज कुमार, जुस्को के पदाधिकारी निर्मल कुमार ने पूजा-अर्चना कर शुरू किया था, वहां बुधवार को सोनारी, कमारगोड़ा, डोबो व सापड़ा के ग्रामीणों ने आदिम काढ़ी पाथर घाट सोनारी पूजा समिति घाट का बैनर लगाकर यहां विसर्जन घाट बनाए जाने का विरोध किया। साथ ही रतन टाटा घाट का बोर्ड भी उखाड़ कर फेंक दिया।

By JagranEdited By: Published: Wed, 17 Oct 2018 07:48 PM (IST)Updated: Wed, 17 Oct 2018 07:48 PM (IST)
रतन टाटा घाट पर ग्रामीणों ने लगाया अपना बैनर
रतन टाटा घाट पर ग्रामीणों ने लगाया अपना बैनर

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : जिस रतन टाटा घाट के निर्माण का शुभारंभ गत मंगलवार को सिटी एसपी प्रभात कुमार जमशेदपुर केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति के कार्यकारी अध्यक्ष चंद्रनाथ बनर्जी, महासचिव रामबाबू सिंह, थाना प्रभारी अनुज कुमार, जुस्को के पदाधिकारी निर्मल कुमार ने पूजा-अर्चना कर शुरू किया था, वहां बुधवार को सोनारी, कमारगोड़ा, डोबो व सापड़ा के ग्रामीणों ने आदिम काढ़ी पाथर घाट सोनारी पूजा समिति घाट का बैनर लगाकर यहां विसर्जन घाट बनाए जाने का विरोध किया। साथ ही रतन टाटा घाट का बोर्ड भी उखाड़ कर फेंक दिया। ग्रामीणों का कहना था कि यह घाट आदिम काढ़ी पाथर घाट सोनारी पूजा समिति का है, यहां कोई दूसरा घाट नहीं बनने दिया जाएगा। इधर, सिटी एसपी प्रभात कुमार ने कहा कि रतन टाटा घाट पर इस बार हर हाल में प्रतिमाओं का विसर्जन होगा। ग्रामीणों ने इसका विरोध क्यों किया, इसको देखा जाएगा।

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दूसरी ओर, जमशेदपुर केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति ने सोनारी में रतन टाटा घाट के निर्माण की पहल की थी। कपाली घाट विसर्जन के लिए खतरनाक होने के कारण जिला प्रशासन ने इसे बंद करने का निर्णय लिया था। जमशेदपुर केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति भी जिला प्रशासन के निर्णय के साथ खड़ी थी, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। परंतु, कपाली घाट पर विसर्जन करने वाली दुर्गा पूजा समितियों के सदस्य एवं जमशेदपुर केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति यह चाहती थी कि कपाली घाट के बदले सोनारी में ही कोई नया घाट बने। इसी को देखते हुए गत मंगलवार को रतन टाटा के नाम पर दोमुहानी पुल के पास एक नये घाट का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। लेकिन, ग्रामीणों के विरोध के बाद इस घाट पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं विसर्जित हो पाएंगी या नहीं, इस पर संशय बना हुआ है।


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