Amazon पर कैट ने लगाया गंभीर आरोप, पुलवामा आतंकी हमले के लिए बताया जिम्मेदार

कैट ने आरोप लगाया है कि अमेज़न ई-कॉमर्स पोर्टल द्वारा गांजा की बिक्री कोई नया और पहला अपराध नहीं है। इससे पहले 2019 में पुलवामा आतंकी हमले में इस्तेमाल किए गए बम बनाने के लिए रसायन भी अमेज़ॅन के ई-कॉमर्स पोर्टल के जरिये खरीदे गए थे ।

Rakesh RanjanPublish: Sun, 21 Nov 2021 03:20 PM (IST)Updated: Sun, 21 Nov 2021 03:20 PM (IST)
Amazon पर कैट ने लगाया गंभीर आरोप, पुलवामा आतंकी हमले के लिए बताया जिम्मेदार

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन पर कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने गंभीर आरोप लगाया है। कैट ने आरोप लगाया है कि अमेज़न ई-कॉमर्स पोर्टल द्वारा गांजा की बिक्री कोई नया और पहला अपराध नहीं है। इससे पहले 2019 में, पुलवामा आतंकी हमले में इस्तेमाल किए गए बम बनाने के लिए रसायन भी अमेज़ॅन के ई-कॉमर्स पोर्टल के जरिये खरीदे गए थे ताकि आतंकवादी हमले में इस्तेमाल किए गए इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) तैयार किए जा सके।

एनआईए ने पुलवामा मामले की जांच के दौरान मार्च 2020 में अपनी रिपोर्ट में इस तथ्य का खुलासा किया और यह जानकारी मीडिया में व्यापक रूप से सामने आई। अन्य सामग्री के अलावा, आंतकियों ने अमोनियम नाइट्रेट, जो भारत में एक प्रतिबंधित वस्तु है, को भी अमेज़न ई-कॉमर्स पोर्टल के माध्यम से खरीदा था। पुलवामा आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए थे । कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल और राष्ट्रीय सचिव सुरेश सोंथालिया ने कहा कि सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध अनेक रिपोर्टों के अनुसार, एनआईए द्वारा प्रारंभिक पूछताछ के दौरान गिरफ्तार किये गए एक व्यक्ति ने खुलासा किया कि उसने बम बनाने के लिए जरूरी आईईडी, बैटरी और अन्य सामान बनाने के लिए रसायनों की खरीद अमेज़न ई कॉमर्स पोर्टल के जरिये ख़रीदे थे। फोरेंसिक जांच के माध्यम से यह साबित हुआ कि हमले में इस्तेमाल किए गए विस्फोटक अमोनियम नाइट्रेट, नाइट्रो-ग्लिसरीन आदि थे।

देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की मांग

प्रवीण खंडेलवाल और सुरेश सोंथालिया ने कहा कि यह विस्फोटक सामान अमेज़न के जरिये खरीदा गया था जो देश के जवानों के खिलाफ उपयोग किया गया इसलिए अमेज़न एवं उसके जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ देशद्रोह का मुक़दमा दर्ज़ करना चाहिए। नीति निर्माताओं और अधिकारियों के ई कॉमर्स के प्रति अपनाये गए गैर जिम्मेदराना व्यवहार के कारण ही ई कॉमर्स पोर्टल चलाने वाली कंपनियां खुल कर अपनी मनमानी कर रही है और कोई उनको रोकने वाला नहीं है। यह और भी आश्चर्यजनक है कि राष्ट्र की रक्षा से जुड़े इस बेहद संगीन मामले को दबा दिया गया और इस पर आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रतिबंधित सामान बेचे जाने को लेकर अमेज़न को छोड़ दिया गया।

भारत में प्रतिबंधित है अमोनियम नाइट्रेट

कैट ने कहा कि 2011 में अमोनियम नाइट्रेट को प्रतिबंधित वस्तु घोषित किया गया था। जिसके लिए विस्फोटक अधिनियम 1884 के तहत अमोनियम नाइट्रेट के खतरनाक ग्रेड को सूचीबद्ध करने और भारत में इसकी खुली बिक्री, खरीद और निर्माण पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक अधिसूचना जारी की गई थी। अमोनियम नाइट्रेट को उन बमों में मुख्य विस्फोटक पाया गया, जिनका इस्तेमाल व्यस्त और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में विस्फोटों को करने के लिए किया जाता था। मुंबई से पहले अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल 2006 में वाराणसी और मालेगांव में और 2008 में दिल्ली में हुए सीरियल ब्लास्ट में हुआ था।

2016 से कैट कर रहा है मांग

सुरेश सोंथालिया का कहना है कि कैट 2016 से ई-कॉमर्स के लिए एक संहिताबद्ध कानून और नियमों की मांग कर रहा है लेकिन दुर्भाग्य से अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। जिसके कारण देश का ई कॉमर्स व्यापार बेहद विषाक्त हो गया है। बम बनाने और हमारे वीर सैनिकों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रसायनों की खरीद से बुरा और क्या हो सकता है। इस मामले को फिर से खोला जाना चाहिए और अमेज़न पोर्टल का प्रबंधन करने वाले जिम्मेदार व्यक्तियों पर कानून के अनुसार मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

हानिकारक है अमोनियम नाइट्रेट

अमोनियम नाइट्रेट एक क्रिस्टल जैसा सफेद ठोस पदार्थ होता है जो बड़ी औद्योगिक मात्रा में बनता है। इसका सबसे बड़ा उपयोग उर्वरक के लिए नाइट्रोजन के स्रोत के रूप में होता है लेकिन इसका उपयोग खनन के लिए विस्फोटक बनाने के लिए भी किया जाता है। अगर आग उस तक पहुंचती है तो रासायनिक प्रतिक्रिया बहुत अधिक तीव्र होगी। जब अमोनियम नाइट्रेट फटता है, तो यह नाइट्रोजन ऑक्साइड और अमोनिया जैसी जहरीली गैसों को छोड़ता है जिससे आस पास रहने वाले लोगों के जीवन को बड़ा खतरा रहता है। सोंथालिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में तत्काल सीधे हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।

Edited By Rakesh Ranjan

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