Inspiring Story : दो उद्योगपतियों के फोन कॉल्स और बदल गई इन युवाओं की जिंदगी

Ratan Tata कब किसकी किस्मत बदल जाए किसी को नहीं पता। लेकिन इरादा नेक होना चाहिए। रतन टाटा की दरियादिली का आज हर कोई कायल है। वहीं पूर्व सांसद आरके सिन्हा की नेकनीयती भी कम नहीं। दोनों उद्योगपति के फोन कॉल्स ने इन युवाओं की जिंदगी बदल दी...

Jitendra SinghPublish: Tue, 18 Jan 2022 09:45 AM (IST)Updated: Tue, 18 Jan 2022 09:45 AM (IST)
Inspiring Story : दो उद्योगपतियों के फोन कॉल्स और बदल गई इन युवाओं की जिंदगी

जमशेदपुर, जासं। देश के दो बड़े उद्योगपतियों के एक फोन ने इन युवाओं की किस्मत बदल दी। साल 2014 में रतन टाटा ने शांतनु को और आरके सिन्हा ने गणित के गुरु आरके श्रीवास्तव को फोन किया। देश के दो बड़े उद्योगपतियों ने इन युवाओं की किस्मत बदल दी। आइए जानते हैं कौन हैं ये दो युवक, जिन्हें देश के बड़े उद्योगपतियों ने खुद फोन किया। आपको बता दें कि जहां रतन टाटा शांतनु नायडू के पशु प्रेम के कारण प्रभावित हुए थे। वहीं पूर्व सांसद आरके सिन्हा गणित गुरु आरके श्रीवास्तव की बेहतर अकादमिक कार्यशैली से प्रभावित हुए।

शांतनु जहां सड़क पर आवारा जानवरों की जान बचाने का काम करते हैं, वहीं मैथ्स के टीचर आरके श्रीवास्तव आर्थिक रूप से गरीब छात्रों को सिर्फ एक रुपया की गुरु दक्षिणा में पढ़ाते हैं। उनके कार्यों से देश के दोनों बड़े उद्योगपति प्रभावित हुए। फिलहाल शांतनु रतन टाटा की कंपनी के साथ जानवरों की जान बचाने का काम कर रहे हैं। वही गणित गुरु पूर्व सांसद और एसआईएस कंपनी के चेयरमैन आरके सिन्हा के अवसर ट्रस्ट से जुड़कर गरीब बच्चों की शिक्षा में योगदान दे रहे हैं।

शांतनु रतन टाटा के युवा दोस्त और उनके निजी सचिव भी है

दरअसल, रतन टाटा का जन्मदिन मनाते हुए एक वीडियो वायरल हुआ था, इस वीडियो में टाटा एक कुर्सी पर बैठे हैं और सामने टेबल पर एक छोटा सा 'कप केक' रखा है। इस छोटे से केक को काटकर दिग्गज उद्योगपति ने अपना जन्मदिन मनाया। इस दौरान उनके साथ एक युवक बैठा नजर आ रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे युवक रतन टाटा के पास आकर खड़ा हो जाता है और उनके कंधे पर हाथ रख देता है। फिर वह उनके पास बैठ जाता है और उन्हें केक खिलाता है।

रतन टाटा के निजी सचिव हैं शांतनु नायडू

आपको बता दें कि रतन टाटा के साथ नजर आए युवक का नाम शांतनु नायडू है। शांतनु रतन टाटा के निजी सचिव हैं। रतन टाटा मुंबई के रहने वाले शांतनु नायडू से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने खुद शांतनु को फोन कर नौकरी का ऑफर दिया। शांतनु रतन टाटा के 'युवा दोस्त' हैं। वह टाटा समूह में 5 साल से अधिक समय से काम कर रहे हैं। उम्र के अंतर के बावजूद उनकी और रतन टाटा की बॉन्डिंग काफी अच्छी है, जैसा कि वीडियो में भी दिखाई दे रहा है। वर्तमान में शांतनु टाटा के साथ सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त आवारा जानवरों की मदद के लिए काम कर रहे हैं।

2014 में शांतनु की बदल गई जिंदगी

शांतनु ने बताया कि 2014 में उनकी जिंदगी बदल गई। उन्होंने सड़क पर दुर्घटना में एक कुत्ते को मरते हुए देखा। शांतनु बहुत परेशान हुए और कुत्तों को बचाने का काम करने लगे। सड़क हादसों में मारे गए कुत्तों को बचाने के लिए शांतनु सोचने लगा। उन्हें अपनी गर्दन पर कॉलर बनाने का विचार आया। एक ऐसा कॉलर जो चमकदार हो ताकि चालक उसे दूर से ही देख सके और बेजुबानों की जान बचा सकें। उन्हें हादसों का शिकार नहीं होना चाहिए।

इसके लिए उन्होंने Motopaws नाम से एक संस्था बनाई। पहले उसने 500 कॉलर बनाए और उन्हें बेजुबानों को पहना दिया। यह काम इतना आसान नहीं था, इसके लिए पैसे और लोगों की भी जरूरत थी। लेकिन शांतनु सब कुछ मैनेज कर रहा था। रतन टाटा के बारे में थोड़ा जानने वाले तो जानते ही होंगे कि उन्हें कुत्तों से बड़ा लगाव है। टाटा कंपनी के न्यूजलेटर में शांतनु का जिक्र किया गया था। जिसे रतन टाटा ने भी सराहा। इस वजह से दोनों की मुलाकात हुई। शांतनु ने उन्हें अपनी टीम के बाकी सदस्यों से मिलवाया जो बेजुबानों की सुरक्षा और देखभाल के लिए काम कर रहे थे। रतन टाटा ने सभी का उत्साह बढ़ाया।

आरके सिन्हा ने बदल दी रजनीकांत श्रीवास्तव की जिंदगी

अब मैथ्स टीचर रजनीकांत के बारे में जानिए। पूर्व सांसद आरके सिन्हा ने एक अखबार में रजनीकांत श्रीवास्तव के बारे में पढ़ा था। तुरंत ही आरके सिन्हा ने फोन कॉल किया और रजनीकांत श्रीवास्तव की जिंदगी बदल गई। आज रजनीकांत अपनी संस्था आवास ट्रस्ट से जुड़कर आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को इंजीनियर बना रहे हैं। गणित के गुरु ने बताया कि पूर्व सांसद आरके सिन्हा मेरी जिंदगी में फरिश्ता बनकर आए। मेरे करियर को संवारने से लेकर जीवन के उतार-चढ़ाव तक उनका सहयोग हमेशा उपलब्ध रहा है।

भतीजी की शादी के लिए जमीन बेचने की कर रहे थे तैयारी

रजनीकांत बताते हैं, साल 2017 में आरके सिन्हा ने भतीजी की शादी में गांव की जमीन को बिकने से बचा लिया। बाद में वह मेरे घर आकर दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद भी दिया। वह कहते हैं, मैं पूर्व सांसद आरके सिन्हा को बाबूजी कहता हूं। वह मुझे भी बेटे जैसा प्यार देते हैं। गणित गुरु असली कहानी हमें सिखा रही है कि जो जीतता है वह छोड़ता नहीं है, जो हार जाता है वह जीतता नहीं है। पांच साल की उम्र में पिता को खोने का गम भी दिल और दिमाग दोनों से नहीं मिटता था कि पिता जैसा इकलौता बड़ा भाई भी इस दुनिया से चला गया।

गणितज्ञ आरके श्रीवास्तव बताते हैं हमें अपने पिता का चेहरा भी याद नहीं है, लेकिन जब मैं रात को सोते समय इसके बारे में सोचता हूं, तो यह एक धुंधली धुंध जैसा दिखता है। मेरे बड़े भाई ने हमें कभी पिता की कमियों का अहसास नहीं होने दिया। वे हमें अपनी क्षमता से परे हर आवश्यकता पूरी की। पापा (पारस नाथ लाल) के गुजरे, उस समय भैया की उम्र खेलने-कूदने की थी।

लेकिन जब दुख और जिम्मेदारी आ जाए यह सब करने का मौका कहां मिलता है। बड़े भाई के असमय चले जाने के बाद काफी देर तक घर में मातम का माहौल रहा। लेकिन समय एक ऐसा चक्र है कि हर अंधेरे के बाद उजाला जरूर आता है। मेरे दूसरे जीवन में मां, भाभी, सभी बहनों के आशीर्वाद ने हमें बहुत ताकत दी। इसके अलावा पिता के रूप में हमें पूर्व सांसद आरके सिन्हा बाबूजी का भरपूर साथ मिलता रहा है। जो हमें एक शक्ति के रूप में मिलने लगा। जिससे ब्रेकअप के बाद मैं फिर से मजबूत होने लगा। टूटे हुए सपने फिर से शुरू हो गए। मेरा परिवार फिर से ठीक होने लगा। पहले की तरह फिर से या उससे कई गुना ज्यादा मेहनत करने लगा।

Edited By Jitendra Singh

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