17 करोड़ की लागत से जिला परिषद पुराना बाजार में बनेगा मॉल

जिला मुख्यालय शहर के पुराना बाजार में जल्द ही जिला परिषद अपना माल बनवाएगा। इसके लिए तकनीकी स्वीकृति मिल गई है जबकि प्रशासनिक स्वीकृति के लिए पंचायती राज विभाग के निदेशक को पत्र भेजा गया है। शहर के पुराना बाजार पानी टंकी के नजदीक जिला परिषद की अपनी जमीन है।

Atul SinghPublish: Fri, 28 Jan 2022 05:49 PM (IST)Updated: Fri, 28 Jan 2022 05:49 PM (IST)
17 करोड़ की लागत से जिला परिषद पुराना बाजार में बनेगा मॉल

जागरण संवाददाता, धनबाद: जिला मुख्यालय शहर के पुराना बाजार में जल्द ही जिला परिषद अपना माल बनवाएगा। इसके लिए तकनीकी स्वीकृति मिल गई है, जबकि प्रशासनिक स्वीकृति के लिए पंचायती राज विभाग के निदेशक को पत्र भेजा गया है। इस बारे में जानकारी देते हुए जिला परिषद के अध्यक्ष रोबिन गोराई ने बताया कि शहर के पुराना बाजार पानी टंकी के नजदीक जिला परिषद की अपनी जमीन है। जिस पर इस माल को बनाया जाना है। इसके लिए जिला परिषद की पिछले साल हुई बैठक के दौरान एक प्रस्ताव को पारित किया गया था। इस माल के बनाने के पीछे जिला परिषद का मानना था कि इसके बन जाने से जिला परिषद को इसमें बने दूकानों से किराया मिलेगा। जो परिषद की आय को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसलिए सभी सदस्यों ने इसे सर्वसम्मति से पारित किया था।

पारित प्रस्ताव के आलोक में इसका डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट डीपीआर रांची की कंस्लटेंसी कंपनी दि क्रिएटर कंसल्टेंट से बनवाया गया। इस प्रोजेक्ट की तकनीकी स्वीकृति भी मुख्य अभियंता ने पिछले साल ही दे दी है। अब इसका काम केवल प्रशासनिक मंजूरी के बिना अटका पड़ा है। तैयार किए गए डीपीआर के अनुसार इस प्रोजेक्ट पर कुल 16 करोड़ 92 लाख 22 हजार रुपये का अनुमानति खर्च आने की संभावना व्यक्त की गई है।

गोराई ने कहा कि इस प्रोजेक्ट की प्रशासनिक मंजूरी के लिए झारखंड राज्य पंचायती राज निदेशक बी राजेश्वरी को एक उनके धनबाद दौरा के क्रम में एक मांग पत्र सौंपा गया है। और उनसे अनुरोध किया गया कि इस योजना को जल्द से जल्द मंजूरी दे दी जाए। ताकि समय से काम शुरू कराया जा सके।

वहीं विभाग की निदेशक राजेश्वरी बी ने पूछे जाने पर मांग पत्र सौंपे जाने को स्वीकार किया और कहा कि इस पर जल्द ही कोई निर्णय लेकर धनबाद जिला परिषद के पदाधिकारियों को अवगत करा दिया जाएगा। उन्होंने इस प्रस्ताव की प्रशंसा करते हुए इसे परिषद का अच्छा कदम बताया। उन्होंने अन्य जिला परिषदों को अपने खाली पड़े जमीनों को इसी तरह के उपयोगी उपायों से आय बढाने के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही।

Edited By Atul Singh

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