मुख्यमंत्री के पुतला दहन कार्यक्रम में आपस में उलझे आदिवासी-गैर आदिवासी कार्यकर्ता

राजगंज धनबाद एवं बोकारो जिले में भोजपुरी मगही व अंगिका को क्षेत्रीय भाषा में शामिल किए जा

JagranPublish: Fri, 28 Jan 2022 09:13 PM (IST)Updated: Fri, 28 Jan 2022 09:13 PM (IST)
मुख्यमंत्री के पुतला दहन कार्यक्रम में आपस में उलझे आदिवासी-गैर आदिवासी कार्यकर्ता

राजगंज : धनबाद एवं बोकारो जिले में भोजपुरी, मगही व अंगिका को क्षेत्रीय भाषा में शामिल किए जाने के विरोध में शुक्रवार को राजगंज में आयोजित रैली व पुतला दहन कार्यक्रम में जमकर हंगामा हुआ। रैली में शामिल लोग दो भाग में बंट गए। एक ओर हेमंत सोरेन मुर्दाबाद तो दूसरी तरफ से हेमंत सोरेन जिदाबाद के जमकर नारे लगे। विरोध इतना मुºर था रैली में शामिल पुतला को आदिवासी महिलाओं ने सड़क पर फेंककर नष्ट कर दिया। पोस्टर व तख्तियां भी फेंक दी। इधर रैली में दूसरे पुतले को आनन फानन में तैयार कर हाईस्कूल के मुख्य द्वार के पास जलाया गया।

बता दें उक्त भाषाओं को लेकर सकार के निर्णय के विरोध में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत रैली व मुख्यमंत्री का पुतला दहन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। बगदाहा, डोमनपुर, बरवाडीह, डालूडीह, धावाचिता, पहाड़पुर, लाठाटांड़, महेशपुर के अलावा आदिवासी बहुल गांव सरायदाहा, पदुमचंद, चुंगी, मरचाकोचा, रणटांड़, लेदोडीह, महतोटांड़ के लोगों को हाई स्कूल मैदान में बुलाया गया था। हर वर्ग से काफी संख्या में लोग वहां पहुंचे थे।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ नारेबाजी होने लगी। मुख्यमंत्री का पुतला और उनके खिलाफ नारेबाजी आदिवासियों को नागवार गुजरा। उन्होंने कार्यक्रम का खुलकर विरोध किया। सांसद प्रतिनिधि गिरधारी महतो के नेतृत्व में भाषा विरोध का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। आजसू नेता संतोष महतो, प्रमोद चौरसिया, महेंद्र महतो, रेखा देवी, संतोष मंडल, शीतल ओहदार सहित दर्जनों लोग रैली की अगुवाई कर जीटी रोड की ओर निकले।

साड़ी-कंबल देने के नाम पर बुलाया गया :

इस बीच आदिवासी महिलाओं ने रैली रोकने का प्रयास किया। आदिवासी महिलाओं ने आयोजकों पर आरोप लगाया कि साड़ी कंबल देने की बात कह कर बुलाया गया था। मुख्यमंत्री का पुतला दहन की जानकारी नहीं दी गई थी। आदिवासी महिलाओं का कहना था कि जिसने हमारी जमीन बचाई, मुफ्त राशन दिया, रोजगार दिया उसका विरोध नहीं कर सकते। गुरुजी का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते। जब हेमंत का पुतला लेकर हाय-हाय का नारा लगना शुरू हुआ तो आदिवासी समुदाय नाराज हो गया।

पुलिस ने पहुंचकर मामला किया शांत :

सारा माजरा समझ में आने के बाद कार्यक्रम के विरोध में एकजुट हो गए। हेमंत जिदाबाद का नारा लगना शुरू कर दिया। इसके कारण माहौल बिगड़ने लगा। आरोप प्रत्यारोप के बीच एक-दूसरे के करीब आ गए। विरोध के बीच दोनों पक्ष में झड़प की स्थिति बन गई। प्रबुद्ध लोगों ने हस्तक्षेप कर मामला को शांत किया। इस बीच नोक झोंक भी हुई। सूचना पाकर पुलिस पहुंची और माहौल को शांत किया।

अपशब्द से बिगड़ा माहौल :

इसके पूर्व हाई स्कूल मैदान में एक युवक मुख्यमंत्री के खिलाफ अमर्यादित शब्द का प्रयोग किया। जिस पर आदिवासी महिलाएं उग्र हो गईं और विरोध पर उतर आईं। उक्त युवक को पकड़ने आधा किलोमीटर तक दौड़ाया। ऐन वक्त एक बाइक सवार उक्त युवक को बैठाकर भाग निकला। शाम करीब पांच बजे आदिवासी महिलाएं सांसद प्रतिनिधि के घर पहुंचीं व हंगामा करने लगीं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची व महिलाओं को शांत किया।

पुलिस से की मारपीट की शिकायत :

घटना के करीब आधा घंटा बाद सरायदाहा, पदुमचंद, रणटांड़, महतोटांड़ आदि गांव की महिलाएं आयोजकों के खिलाफ लिखित आवेदन लेकर थाना पहुंचीं। आरोप लगाया गया है कि चादर कंबल देने के लिए बुलाया गया था। ना कि हेमंत का पुतला फूंकने के लिए। आदिवासी महिला काड़ालागा निवासी सबिता टुडू, सरायदाहा निवासी सरिता टुडू और पारटाड़ निवासी सनिता टुडू ने कहा कि हमलोग जब मुख्यमंत्री के पक्ष में बोल रहे थे, तभी जुलूस में शामिल कुछ युवकों ने हमलोगों के साथ मारपीट की।

भाषा विरोध का कार्यक्रम सफल रहा। आसपास के दर्जनों गांव के लोग विरोध में शामिल हुए। यह बता दिया कि झारखंड में बाहरी भाषा नहीं चलेगी। आदिवासी महिलाओं का आरोप निराधार है। विरोधी के बहकावे में आकर विरोध करने की कोशिश की गई।

गिरधारी महतो, आयोजक।

Edited By Jagran

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