निचली कक्षाओं के 30 फीसद छात्र मासिक मूल्यांकन में नहीं हो रहे हैं शामिल

मासिक मूल्यांकन के आधार पर ही सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं को अगली कक्षा में प्रमोशन मिलेगा। जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विभिन्न कक्षाओं के 25 से 30 फीसदी छात्र छात्राओं को अगली कक्षा में प्रोन्नति के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ेगी

Atul SinghPublish: Mon, 24 Jan 2022 11:52 AM (IST)Updated: Mon, 24 Jan 2022 11:52 AM (IST)
निचली कक्षाओं के 30 फीसद छात्र मासिक मूल्यांकन में नहीं हो रहे हैं शामिल

जागरण संवाददाता, धनबाद : मासिक मूल्यांकन के आधार पर ही सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं को अगली कक्षा में प्रमोशन मिलेगा। जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विभिन्न कक्षाओं के 25 से 30 फीसदी छात्र छात्राओं को अगली कक्षा में प्रोन्नति के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ेगी क्योंकि यह छात्र मासिक मूल्यांकन में शामिल नहीं हो रहे है। जो छात्र मासिक मूल्यांकन में शामिल हो रहे हैं।

उन्हें आसानी से अगली कक्षा में प्रमोशन मिल जाएगा, लेकिन जो छात्र-छात्राएं शामिल नहीं हो रहे हैं। उनके लिए राज्य मुख्यालय से मार्गदर्शन मांगना पड़ेगा। ऊंची कक्षाओं में छात्रों के उपस्थिति का प्रतिशत तो ठीक है लेकिन निचली कक्षाओं में छात्र मासिक मूल्यांकन के दौरान शत प्रतिशत उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं।

कोरोना महामारी के कारण सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा तीन से 12वीं तक का मासिक मूल्यांकन हो रहा है। प्रत्येक महीना जेसीईआरटी से जारी पत्र के आधार पर स्कूलों में छात्र-छात्राओं की परीक्षा ली जा रही है। मासिक मूल्यांकन में कक्षा तीन से आठवीं तक के 25 से 30 फीसदी छात्र-छात्राएं शत प्रतिशत उपस्थित नहीं हो रहे है। वहीं नौवीं से 12वीं तक में लगभग 15 फीसदी छात्र-छात्राएं अनुपस्थित हो रहे हैं। बताते चलें कि पहली से पांचवीं तक के लिए स्कूल पूरी तरह से बंद रहा।

कक्षा छह से 12वीं तक के लिए पांच महीना स्कूल खुला रहा। इसका फायदा नौंवीं से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं को मिला। कोरोना महामारी के कारण 31 जनवरी तक स्कूल बंद है। स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आगे भी स्कूलों के खुलने की संभावना नहीं है। ऐसी स्थिति में सरकार का आदेश है कि आठवीं कक्षा तक बच्चों को फेल नहीं किए जाएंगे। इस स्थिति में जनवरी से मार्च तक होने वाले मासिक मूल्यांकन में ऐसे बच्चों को बुलाकर मूल्यांकन में शामिल होने को कहा जा सकता है।

Edited By Atul Singh

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