बिना रोक-टोक सरेआम मची है बालू लूट

संवाद सूत्र हंटरगंज (चतरा) इस अंचल में बालू की लूट अब चरम पर पहुंच गई है। बिना रोक-ट

JagranPublish: Sun, 05 Dec 2021 06:43 PM (IST)Updated: Sun, 05 Dec 2021 06:43 PM (IST)
बिना रोक-टोक सरेआम मची है बालू लूट

संवाद सूत्र, हंटरगंज (चतरा) : इस अंचल में बालू की लूट अब चरम पर पहुंच गई है। बिना रोक-टोक सरेआम लूट मची है। हद तो तब हो गई जब झारखंड राज्य खनिज विकास निगम की ठेका कंपनी अपने पट्टे से दूसरे गांव के घाट से बालू उठाने लगा। मजे की बात तो यह है कि अब तक संबंधित कंपनी ने दूसरे गांव में करीब 20 एकड़ क्षेत्र में बालू का अवैध उठाव कर लिया है। उसकी इस हरकत पर रविवार को डुमरीखुर्द के ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने जमकर बवाल काटा। बालू उठा पर रोक लगा दी। अवैध बालू उठाव में स्थानीय प्रशासन से लेकर जिला खनन पदाधिकारी की भूमिका संदिग्ध है। संबंधित अधिकारियों के मुताबिक झारखंड राज्य खनिज विकास निगम को बांकी गांव स्थित निरंजना नदी में तीन हेक्टेयर क्षेत्र से बालू उठाव का पट्टा मिला है। मगर वह करीब एक सप्ताह से डुमरीखुर्द गांव की सीमा में स्थित घाट से बालू का अवैध उठाव कर रहा है। अब तक करीब 20 एकड़ में अवैध ढंग से बालू का उठाव कर लिया गया है। डुमरीखुर्द के निवासी और अवैध बालू उठाव का विरोध कर रहे ग्रामीणों ने कहा कि अवैध बालू उठाव की सूचना देने के लिए सीओ मिथिलेश कुमार से लगातार संपर्क का प्रयास किया जाता रहा, मगर उन्होंने फोन नहीं उठाया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरेआम बालू का खेल अंचल अधिकारी की मिलीभगत से खेला जा रहा है। अब तो वहां लूटे गए बालू के बडे़-बडे़ ढेर लग गए हैं। फिलहाल हम बालू उठाव रोक दिए हैं। हम अपने गांव में बालू का उठाव नहीं होने देंगे। डुमरीखुर्द में जहां से बालू उठाव हो रहा है, वह जमीन रैयती है। बाढ़ के कारण कटाव से खेत नदी में तब्दील हो गया है। खेतों में बालू भर गया है। उन्हीं खेतों से बालू का अवैध उठाव हो रहा है।

::::::::::::::::::::::::::::

कोट

खनन क्षेत्र के बाहर से यदि बालू का उठाव हो रहा है, तो ग्रामीण आवेदन दें। आवेदन को जिला खनन पदाधिकारी के पास अग्रसारित किया जाएगा। यदि आदेश होगा तो खनन पट्टा क्षेत्र की मापी कराएंगे।

मिथिलेश कुमार-सीओ, हंटरगंज।

Edited By Jagran

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept