भूमि विवाद के पटाक्षेप के लिए वन विभाग के साथ ग्रामीणों ने की बैठक

संवाद सहयोगी पुंछ तहसील वेरीपत्तन की तला टांडा पंचायत के चकतवेला गांव की भूमि को लेकर

JagranPublish: Thu, 13 Jan 2022 06:34 AM (IST)Updated: Thu, 13 Jan 2022 06:34 AM (IST)
भूमि विवाद के पटाक्षेप के लिए वन विभाग के साथ ग्रामीणों ने की बैठक

संवाद सहयोगी, पुंछ : तहसील वेरीपत्तन की तला टांडा पंचायत के चकतवेला गांव की भूमि को लेकर पिछले कुछ महीनों से विवाद चल रहा है। एक तरफ वन विभाग उस भूमि को अपनी बता रहा है तो ग्रामीण उसे अपनी मालिकाना जमीन बता रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि आजादी से पहले से हमारे बुजुर्ग इस जमीन पर खेतीबाड़ी कर परिवारों का पालन पोषण कर रहे हैं, ऐसे में अब वन विभाग और राजस्व विभाग की रिकार्ड में हुई किसी गलती के कारण हमें परेशान किया जा रहा है। ग्रामीणों में पुष्पेंद्र कुमार, अशोक कुमार, पंच सुभाष कुमार, सरपंच मोहन सिंह, चुन्नीलाल, अंकुश कुमार, राजकुमार आदि ने बताया कि वर्षो से हम लोग यहां पर खेतीबाड़ी कर परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। अब वन विभाग इसे अपना बता रहा है। इसी सब को लेकर पिछले कुछ दिनों से वन विभाग, राजस्व विभाग और ग्रामीणों के बीच तनातनी चल रही है। इसी संदर्भ में एडीसी विनोद कुमार के दिशानिर्देश पर नायब तहसीलदार वेरीपत्तन विजय शर्मा की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें लोगों द्वारा नायब तहसीलदार को बताया गया कि हम लोग वर्षो से इसी जमीन पर खेती-बाड़ी सहित पशुओं को पालकर अपनी जिदगी का गुजारा बसर कर रहे हैं। ग्रामीणों द्वारा एक हस्ताक्षर अभियान चलाकर भी नायब तहसीलदार विजय शर्मा को ज्ञापन सौंपा गया। इसी जमीन के सहारे चल रहा लोगों का परिवार

बैठक में ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि वे वर्षो से इसी जमीन पर रहकर अपने खेतीबाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। गांव के अधिकतर लोग दिहाड़ी मजदूर हैं। जो मजदूरी और खेती-बाड़ी करके अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। इसी जमीन के सहारे इन लोगों का परिवार चल रहा है। राजस्व विभाग की मामूली गलती का खामियाजा इन लोगों को भुगतना पड़ रहा है। चकतवेला गांव वन भूमि में नहीं पड़ता। ऐसे में डीसी राजौरी और एडीसी सुंदरबनी विनोद कुमार से गुहार लगाई जाती है कि इन लोगों की इस समस्या का जल्द से जल्द हल निकाला जाए।

- सरपंच मोहन सिंह मामले की हो रही जांच

ग्रामीणों द्वारा बताया गया है कि यह गांव जंगल के क्षेत्र में नहीं आता है। वर्षो से यहां हमारे पूर्वज रहकर इसी जमीन पर खेती बड़ी कर परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। ग्रामीणों द्वारा एक सदस्यता अभियान के तहत हस्ताक्षर करके ज्ञापन भी सौंपा गया है। बैठक में गांव और आसपास के बुजुर्ग सरपंच, पंच, चौकीदार, लंबरदार आदि द्वारा बताया गया यहां के ग्रामीण वर्षो से इसी गांव में रह रहे हैं और यह क्षेत्र वन विभाग का नहीं है। गांव वालों की समस्या सुनने के बाद पूरे मामले की जांच की जा रही है जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

-विजय शर्मा, नायब तहसीलदार

Edited By Jagran

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept