जम्मू : दो बार वीर चक्र जीतने वाले ग्रुप कैप्टन धवन की पुत्री पहुंची रेजांगला

वर्ष 1947-1948 में कश्मीर पर पाकिस्तान के कब्जे को नाकाम बनाने के लिए लड़ी गई लड़ाई में उन्होंने डकोटा विमान से दुश्मन पर बम दागने अपने सैनिकाें तक सामान पहुंचाने के लिए 144 उड़ानें भरी थी। इसके लिए उन्हें पहला वीर चक्र मिला था।

Rahul SharmaPublish: Fri, 10 Dec 2021 01:32 PM (IST)Updated: Fri, 10 Dec 2021 04:52 PM (IST)
जम्मू : दो बार वीर चक्र जीतने वाले ग्रुप कैप्टन धवन की पुत्री पहुंची रेजांगला

जम्मू, राज्य ब्यूरो: भारतीय सेना लद्दाख में चुनौतीपूर्ण हालात में सरहदों की रक्षा करने वाले सशस्त्र सेनाओं के वीरों के साथ साथ उनके परिजनों को सम्मान दे रही है। युद्ध के नायकों के परिजनों के लद्दाख आने पर सेना उन्हें हर संभव सहयोग देती है।

सेना की चौदह कोर के सहयोग से चीन, पाकिस्तान के खिलाफ लड़े गए युद्धों में दो वीर चक्र जीतने वाले ग्रुप कैप्टन पुरषोत्तम लाल धवन की पुत्री का पूर्व लद्दाख में नियंत्रण रेखा पर रेजांगला वार मेमोरियल पर सेना के शहीदों को श्रद्धांजलि देने का मौका हासिल हुआ। सेना ने दिवंगत ग्रुप कैप्टन की पुत्री शकुन टंडन को उस जगह शहीदों को श्रद्घांजलि देने का मौका दिया यहां पर परमवीर चक्र विजेता मेजर शैतान सिंह व उसके साथियों ने 1962 में अपने से कई गुणा अधिक चीनी सैनिकाें को मार गिराकर लद्दाख पर कब्जा करने की चीन की साजिश नाकाम की थी।

युद्धवीर की पुत्री के रेजांगला पहुंचने पर पुरानी यादें ताजा हो गई। सेना के अधिकारियों व जवानों ने ग्रुप कैप्टन द्वारा इस सेक्टर में दिए गए अहम याेगदान को याद कर उनके प्रति आभार जताया। सेवानिवृत विंग कमांडर ग्रुप कैप्टन पुरषोत्तम लाल धवन ने वर्ष 1960 में पूर्वी लद्दाख में सेना को मजबूत बनाने के लिए काम चलाउ एयरफील्ड पर अपना डकोट विमान उतारने का गौरव हासिल किया था।

वर्ष 1947-1948 में कश्मीर पर पाकिस्तान के कब्जे को नाकाम बनाने के लिए लड़ी गई लड़ाई में उन्होंने डकोटा विमान से दुश्मन पर बम दागने, अपने सैनिकाें तक सामान पहुंचाने के लिए 144 उड़ानें भरी थी। इसके लिए उन्हें पहला वीर चक्र मिला था। जब चीन ने 1962 में हमला किया तो उस समय सेना तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए ग्रुप कैप्टन पुरषोत्तम लाल धवन ने पूर्वी लद्दाख में भारतीय वायुसेना की एडवांस लैंडिंग ग्राउंड दौलत बेग ओल्डी में अपना डकोटा विमान उतारा था। इसके साथ उन्होंने चीन के सेना से लड़ने वाले भारतीय सैनिकाें के सर्दी से बचने व खाने पीने का सामान भी एयर ड्राप किया था। इस युद्ध में सराहनीय योगदान के लिए उन्हें दूसरी बार वीर चक्र से सम्मानित किया गया था।  

Edited By Rahul Sharma

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