जम्मू-कश्मीर सुशासन सूचकांक : सुशासन कदम-कदम चढ़ने लगा पहाड़, डोडा ने भर ली रफ्तार

जम्मू कश्मीर के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार सुशासन सूचकांक ने हमारी योजनाओं के क्रियान्वयन की वस्तु स्थिति स्पष्ट कर दी है। अब बेहतर योजना के साथ आगे बढ़ सकते हैं। कमजोर बिंदुओं की जिलावार पहचान हो चुकी है और उन्हीं पर अतिरिक्त ऊर्जा लगानी होगी।

Lokesh Chandra MishraPublish: Sun, 23 Jan 2022 04:00 AM (IST)Updated: Sun, 23 Jan 2022 07:17 AM (IST)
जम्मू-कश्मीर सुशासन सूचकांक : सुशासन कदम-कदम चढ़ने लगा पहाड़, डोडा ने भर ली रफ्तार

अनिल गक्खड़, जम्मू । विकास की दौड़ में पिछड़े रहे जम्मू संभाग के पहाड़ी जिलों में भी सुशासन आ रहा है पर डोडा को छोड़कर अन्य जिलों में रफ्तार मंद ही दिखाई पड़ती है। जम्मू कश्मीर के सुशासन सूचकांक में डोडा जिला शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरे पायदान पर जा जमा लेकिन चिनाब और पीर पंजाल क्षेत्र के अन्य जिले निचले पायदान पर ही अटकते दिखाई दिए। डोडा को छोड़कर इस क्षेत्र के ज्यादातर जिले शीर्ष दस में भी जगह नहीं बना पाया। राजौरी और पुंछ तो अंतिम पायदान पर अटक आए।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने देश में पहली बार जम्‍मू कश्‍मीर के जिलास्‍तर के सुशासन सूचकांक का लोकार्पण किया। इसका लक्ष्‍य लोगों को जम्‍मू कश्‍मीर में शासन व्‍यवस्‍था में आ रहे बदलाव से रूबरू करवाना है।

यह सूचकांक इन जिलों के संबंधित विभागों के अधिकारियों का रिपोर्ट कार्ड भी है। खास बात यह है कि यही वह जिले है जो सात दशक विकास के मामले में पूरी उपेक्षा झेलते रहे और इन जिलों के कुछ दुर्गम क्षेत्रों के लोगों को नित्य प्रतिदिन सड़क, बिजली-पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत योजनाओं की कमी से दो-चार होना पड़ा। पिछले कुछ वर्षों में पहाड़ पर भी विकास को तेज गति से दौड़ाने के प्रयास हुए पर चिंता यहां योजनाओं के क्रियान्वयन की है।

साफ है कि कुछ अधिकारी जम्मू कश्मीर और केंद्र सरकार की विकास की दौड़ से कदमताल नहीं कर पाए। नागरिक सुविधाओं और केंद्र व राज्य की योजनाओं के क्रियान्वयन के क्षेत्र में साफ हो चुका है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बहुत किया जाना शेष है। निश्चित तौर पर उद्योग लाना यहां सुगम नहीं होगा पर सबसे बड़ी चुनौती यहां मानव संसाधन के विकास की है। इस क्षेत्र में सुधार हो जाए तो अन्य सभी क्षेत्र स्वयं गति पकडऩे लगेंगे।

अब रणनीति पर मंथन की आवश्यकता

जम्मू कश्मीर के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार सुशासन सूचकांक ने हमारी योजनाओं के क्रियान्वयन की वस्तु स्थिति स्पष्ट कर दी है। अब बेहतर योजना के साथ आगे बढ़ सकते हैं। कमजोर बिंदुओं की जिलावार पहचान हो चुकी है और उन्हीं पर अतिरिक्त ऊर्जा लगानी होगी। उपराज्यपाल साफ कर चुके हैं कि यह गति मंद नहीं होने दी जाएगी।

समाज कल्याण योजनाओं में आगे बढ़े

समाज कल्याण विकास योजनाओं में इन जिलों का प्रदर्शन थोड़ा बेहतर कहा जा सकता है। जहां रामबन पहले पायदान पर काबिज रहा और पुंछ व राजौरी थोड़ा ऊपर खिसके।

उद्योगों को पहाड़ ले जाना चुनौती

निश्चित तौर पर उद्योगों को पहाड़ पर ले जाना बड़ी चुनौती रहने वाली है पर इसका यह आशय नहीं कि व्यापार और उद्योग यहां पहुंच नहीं पाएंगे। सूचकांक के अनुसार रामबन ने यह कर दिखाया है और डोडा भी ज्यादा पीछे नहीं रहा। कृषि उत्पादों से जुड़े उद्योगों के लिए इन क्षेत्रों में पर्याप्त संभावनाएं हैं और इसके अनुसार तैयारी करनी होगी। हथकरघा और हस्तशिल्प में भी अपार संभावनाएं हैं।

कृषि क्षेत्र में दिख रहा बदलाव

कृषि क्षेत्र में इन जिलों में बेहतर कार्य होता दिखा। बागवानी के लक्ष्य तेजी से प्राप्त कर लिए गए और अन्य योजनाओं से भी लोगों को जोड़ा जा सका। यही वजह है कि किश्तवाड़ जिला इस क्षेत्र में अव्वल रहा और डोडा, रामबन, ऊधमपुर और राजौरी भी अधिक पीछे नहीं रहे। रियासी और पुंछ को फिलहाल गति देने की अभी आवश्यकता है।

ऊधमपुर जिला दस बिंदुओं पर              

  • कृषि एवं संबंधित क्षेत्र     --  6
  • उद्योग एवं वाणिज्य    -- 17
  • मानव संसाधन विकास --18
  • जन स्वास्थ्य            --  13
  • सार्वजनिक सुविधाएं  --  17
  • समाज कल्याण एवं विकास -- 15
  • वित्तीय समावेश           -- 13
  • न्यायिक एवं जन सुरक्षा -- 2
  • पर्यावरण         -- 4
  • नागरिक केंद्रित शासन -- 6

समाज कल्याण योजनाओं में जिले

  1.  रामबन जिला 0.801 अंक के साथ शीर्ष पर रहा
  2. कठुआ जिला 0.697 अंक के साथ दूसरे नंबर पर रहा
  3.  अनंतनाग 0.664 अंक के साथ तीसरे पायदान पर
  4.  सांबा 0.653 के साथ चौथे नंबर पर रहा
  5.  पुंछ 0.496 अंक के साथ दसवें और राजौरी 13वें स्थान पर रहा
  6. किश्तवाड़ 0.422 अंक के साथ 14वें और ऊधमपुर 0.413 अंक के साथ 15वें स्थान पर रहा
  7. डोडा 16वें, रियासी 19वें और जम्मू फिसड्डी रहा। 

Edited By Lokesh Chandra Mishra

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