पीजी के लिए डॉक्टरों की अब जिला अस्पतालों में भी ट्रेनिंग, पहले बैच में जम्मू और कश्मीर संभाग में 42-42 डॉक्टरों को भेजा

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में अब एक नया अध्याय जुड़ गया है। राजकीय मेडिकल कालेजों में स्नातकोत्तर (पीजी) करने वाले डाक्टरों को पढ़ाई के दौरान तीन माह जिला अस्पतालों में ड्यूटी देनी होगी। यह प्रशिक्षण उनके पाठ्यक्रम का हिस्सा होगा।

Vikas AbrolPublish: Sat, 03 Jul 2021 09:07 AM (IST)Updated: Sat, 03 Jul 2021 09:28 AM (IST)
पीजी के लिए डॉक्टरों की अब जिला अस्पतालों में भी ट्रेनिंग, पहले बैच में जम्मू और कश्मीर संभाग में 42-42 डॉक्टरों को भेजा

जम्मू, रोहित जंडियाल । केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में अब एक नया अध्याय जुड़ गया है। राजकीय मेडिकल कालेजों में स्नातकोत्तर (पीजी) करने वाले डाक्टरों को पढ़ाई के दौरान तीन माह जिला अस्पतालों में ड्यूटी देनी होगी। यह प्रशिक्षण उनके पाठ्यक्रम का हिस्सा होगा।

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इसे डिस्ट्रिक्ट रेजीडेंसी प्रोग्राम नाम दिया है। इस प्रोग्राम के तहत प्रशिक्षण के बाद डाक्टरों को पीजी की डिग्री दी जाएगी। इसका मकसद पीजी डाक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने का अनुभव देना है। इसे इसी माह से लागू भी कर दिया गया है। पहले बैच में जम्मू और कश्मीर संभाग में 42-42 डाक्टरों को जिला अस्पतालों में भेजा गया है।

फिलहाल, इस कार्यक्रम को उन जिलों में लागू किया गया है, जहां पर मेडिकल कालेज नहीं हैं। इनमें गांदरबल, कुलगाम, पुलवामा, शोपियां, कुपवाड़ा, बांडीपोरा, हंदवाड़ा, रियासी, सांबा, किश्तवाड़, ऊधमपुर, रामबन और पुंछ जिला अस्पताल शामिल हैं। प्रत्येक जिला अस्पताल में आठ से नौ पीजी डाक्टरों तक को भेजा गया है। इनमें मेडिसीन सर्जरी, गायनोकालोजी सहित अन्य सभी प्रमुख विभागों के पीजी डाक्टर शामिल हैं। इन सभी का रोस्टर बनाकर उनकी ड्यूटी शुरू कर दी गई है। प्रोग्राम के तहत यह कोर्स करने वाले डाक्टरों को ही पीजी की डिग्री मिलेगी।

पहला बैच शुरू

पहला बैच जुलाई से सितंबर तक चलेगा। इनका कोर्स पूरा होने के तुरंत बाद एक और बैच तीन महीनों के लिए जिला अस्पतालों में भेज दिया जाएगा। यह प्रोग्राम जम्मू और श्रीनगर के अलावा कठुआ, डोडा, राजौरी, अनंतनाग और बारामुला जिलों में लागू नहीं होगा। इन सभी जिलों में पहले से ही मेडिकल कालेज हैं।

स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी

डिस्ट्रिक्ट रेजीडेंसी प्रोग्राम लागू होने से जिला स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी। साथ ही पीजी कर रहे डाक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों में काम का अनुभव मिलेगा। जिला अस्पतालों में विशेषज्ञता हासिल कर रहे डाक्टरों की संख्या बढ़ेगी।

अब तक ग्रामीण इलाकों में डयूटी का नहीं होता था अनुभव

राजकीय मेडिकल कालेजों में पीजी करने वाले डाक्टरों को अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में ड्यूटी देने का अनुभव नहीं होता था। यह आरोप लगते थे कि कई बार पीजी करने के बाद डाक्टर जब ग्रामीण क्षेत्रों में ड्यूटी के लिए जाते हैं तो वहां के हालात को समझ नहीं पाते हैं। अब तक पीजी कर रहे डाक्टरों का तीन महीने ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रेङ्क्षनग करने को पाठ्यक्रम का ही हिस्सा बना दिया गया है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इससे जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी।

डिस्ट्रिक्ट रेजीडेंसी प्रोग्राम शुरू हो गया है। इसमें मेडिकल कालेजों में पीजी कर रहे सभी विद्यार्थियों, चाहे वे क्लीनिकल विभागों में हों या फिर नान क्लीनिकल में, उन्हें तीन महीने जिला अस्पतालों में काम करना होगा। इन तीन महीने की ड्यूटी के दौरान उनके रहने-खाने, यातायात और सुरक्षा संबंधी सुविधाओं का ध्यान रखा जाएगा।

डा. यशपाल शर्मा, निदेशक, न्यू मेडिकल कालेजेज

जम्मू संभाग में छह जिलों में डिस्ट्रिक्ट रेजीडेंसी प्रोग्राम शुरू किया गया है। कुल 42 डाक्टरों को जिला अस्पतालों में भेजा गया है। इससे पीजी कर रहे डाक्टरों को भी काफी कुछ सीखने का अवसर मिलेगा। इससे मरीजों को भी लाभ होगा।

डा. रेनू शर्मा, स्वास्थ्य निदेशक जम्मू  

Edited By Vikas Abrol

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