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Jammu Kashmir: पशु चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा जम्मू कश्मीर, 1000 से भी अधिक पद खाली

प्रत्येक चिकित्सालय में एक चिकित्सक व एक फार्मासिस्ट का होना आवश्यक है। बावजूद इसके कुछ पशुचिकित्सालयों में मात्र एक डाक्टर और फार्मासस्टि ही काम चला रहा है।

Rahul SharmaSat, 11 Jul 2020 01:20 PM (IST)
Jammu Kashmir: पशु चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा जम्मू कश्मीर, 1000 से भी अधिक पद खाली

जम्मू, अवधेश चौहान: काेरोना वायरस से जूझ रहे जम्मू कश्मीर में पशु चिकित्सकों की भारी कमी है। जिस कारण बेजुबनों को इलाज भी नहीं मिल पा रहा है। प्रदेश में करीब 736 पशु चिकित्सक ही हैं जिनमें से 200 के करीब प्रशासनीय कार्यों में लगे हुए हैं। जिनमें कुछ वरिष्ठ वेटनरी डाक्टर पदोन्नति पाने पर लाइव स्टाक आफिसर, डिप्टी डायरेक्टर, ज्वांइट डायरेक्टर बन जाते है और इनका काम पशुपालन और भेड़पालन विभागाें में प्रशासनिक कार्यों तक ही सीमित रह जाता है। पशुपालन और भेड़पालन विभागों में 1000 से भी अधिक वेटनरी डाक्टरों की कमी से जूझ रहा है।

कठुआ, सांबा में नही है सर्जन पशु चिकित्सक: जम्मू संभाग के कठुआ, सांबा में तो एक भी सर्जन पशुचिकित्सक नही है। अगर कोई जानवर हादसे में घायल हो जाए या किसी का सीजेरियन करना पड़े तों किसानों को काफी मुश्किल झेलनी पड़ती है। ऐसी सूरत में किसानों को अपने जानवर लेकर शेर ए कश्मीर यूनिवर्सिटी आफ एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नालॉजी में लेकर आना पड़ता है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार पशु चिकित्सकों की कमी की वजह से राज्य में पशुओं की नस्ल सुधार के साथ पशुपालन विभाग में संचालित कार्यक्रमों पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

राज्य में एक हजार पशु चिकित्सकोंं की कमी हैं: मामले की गंभीरता को देखते हुए पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव वेटनरी असिस्टेंट सर्जन (वीएएस) के पदों की भर्ती प्रक्रिया तेज करने पर जोर दिया है। अभी तक रोजगार केंद्रों में करीब 2 हजार वेटनरी डाक्टर रजिस्टर्ड हैं। जबकि इन बेरोजगरों की संख्या 4 हजार के करीब है। बेशक प्रशासन ने 70 के करीब वेटनरी डाक्टरों के पदों की भरपाई के लिए लोक सेवा आयोग को भेजा है। राज्य में एक हजार वेटनरी असिस्टेंट सर्जनों की जरूरत है, ताकि राज्य में पशुधन को संतोषजनक स्वास्थ्य कवर प्रदान किया जा सके। इससे किसानों की आय को दोगुना करने में भी मदद मिल सकती हैं। प्रत्येक चिकित्सालय में एक चिकित्सक व एक फार्मासिस्ट का होना आवश्यक है। बावजूद इसके कुछ पशुचिकित्सालयों में मात्र एक डाक्टर और फार्मासस्टि ही काम चला रहा है।

क्या कहते हैं पशु पालक: अखनूर के मुर्गीपालक कर्ण सिंह का कहना है कि मौजूदा समय में किसान अब इसे फायदे का सौदा नही मान रहे हैं। रही सही कसर कोरोना ने पूरी कर दी है। जम्मू के अंतर्ररष्ट्रीय सीमा के अरनिया क्षेत्र में पर रहने वाले किसान महेश सिंह का कहना है कि सीमापार पाकिस्तान से आए दिन गोलाबारी के कारण सैकड़ाें लाइलाज पशु मारे जाते हैं, जबकि इनसे अधिक घायल हो जाते है। जो इलाज न मिल पाने के कारण मर जाते हैं।यही कारण है कि आज भी दुग्ध उत्पादन में जम्मू कश्मीर पड़ोसी राज्य पंजाब पर ही निर्भर है। जबतक गाए, भैंसों की नस्लों में सुधार नही होगा तब तक राज्य के किसान फलीभूत नही हो सकते।

डिप्टी डायरेक्टर सतीश गंगवाल का कहना है कि पशु चिकित्सकाें की कमी समूचे राज्य में हैं। नई भर्तियां नही हो पाई हैं। हर वर्ष 10 से 20 डॉक्टर रिटायर हो जाते हैं।

वहीं सेव एनिमल एंड वैल्यू एनवायमेंट की चैयरपर्सन रम्पी मदान का कहना है कि वेटनरी डाक्टरों की श्रमता विकास बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए वर्क शाप करवाई जाएं। जिससे की सर्जन वेटनरी डाक्टरों की कमी को दूर किया जा सके। 

Edited By: Rahul Sharma

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