जम्मू कश्मीर में फैली है महामारी...पर जम्मू स्वास्थ्य विभाग के पास एक एपीडोमोलोजिस्ट तक नहीं

पहले डा. एडीएस मन्हास ही इस पद पर थे लेकिन गत वर्ष एक मई को उनका तबादला कर राजकीय मेडिकल कालेज अस्पताल जम्मू का चिकित्सा अधीक्षक नियुक्त कर दिया गया। साथ ही उन्हें एपीडोमोलोजिस्ट का कार्यभार भी देखने को कहा गया।

Rahul SharmaPublish: Tue, 18 Jan 2022 07:49 AM (IST)Updated: Tue, 18 Jan 2022 07:49 AM (IST)
जम्मू कश्मीर में फैली है महामारी...पर जम्मू स्वास्थ्य विभाग के पास एक एपीडोमोलोजिस्ट तक नहीं

जम्मू, रोहित जंडियाल : जम्मू कश्मीर में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़े हैं। तीसरी लहर का असर हर दिन बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार प्रत्येक दिन हालात की समीक्षा कर नए आदेश जारी कर रही है, लेकिन हैरानी की बात है कि जम्मू संभाग में स्वास्थ्य विभाग के पास स्थायी एपीडोमोलोजिस्ट (महामारी विशेषज्ञ) तक नहीं है। इस पद पर अभी तक स्थायी नियुक्ति नहीं हो पाई है। फिलहाल, राजकीय मेडिकल कालेज अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. एसडीएस मन्हास के पास इसका अतिरिक्त कार्यभार है। वहीं, कश्मीर संभाग में इस पद पर स्थायी नियुक्ति पहले से है।

स्वास्थ्य विभाग में एपीडोमोलोजिस्ट का पद हमेशा से ही अहम रहा है। इसके बावजूद इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया गया। इस पद पर स्थायी नियुक्ति के स्थान पर किसी डाक्टर को इंचार्ज बना दिया जाता है। पिछले दो वर्षों से कोरोना महामारी फैली हुई है फिर भी स्थायी नियुक्ति नहीं हुई है।

यही नहीं, ब्लैक फंगस को भी महामारी घोषित है। हालांकि, इन बीमारियों से निपटने के लिए उपराज्यपाल सहित पूरा जम्मू कश्मीर प्रशासन लगा हुआ है, लेकिन एपीडोमोलोजिस्ट कोई भी नहीं है। पहले डा. एडीएस मन्हास ही इस पद पर थे, लेकिन गत वर्ष एक मई को उनका तबादला कर राजकीय मेडिकल कालेज अस्पताल जम्मू का चिकित्सा अधीक्षक नियुक्त कर दिया गया। साथ ही उन्हें एपीडोमोलोजिस्ट का कार्यभार भी देखने को कहा गया।

यह कहता है नियम

नियमों के अनुसार एपीडोमोलोजिस्ट के पद पर नियुक्ति के लिए एपीडोमोलोजी में डिग्री चाहिए। अगर ऐसा न हो तो पब्लिक हेल्थ या इससे संबंधित विषय में डिग्री होनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग जम्मू में जिस डाक्टर के पास यह योग्यता है, उन्हें जिला अस्पताल सांबा का चिकित्सा अधीक्षक नियुक्त किया गया है।

स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार विभाग में किसी भी पद पर नियुक्ति के लिए कोई नियम पालन नहीं है, जिसे जब चाहें और जहां चाहे नियुक्त किया जा सकता है। स्थायी नियुक्तियों की ओर कोई ध्यान नहीं है। एपीडोमोलोजिस्ट का पद भी इन्हीं में एक है। इस समय जब महामारी फैली हुई है, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को चाहिए था कि किसी विशेषज्ञ की स्थायी नियुक्ति एपीडोमोलोजिस्ट के पद पर होती।

कई और पद भी हैं खाली

कोरोना महामारी के इस दौर में स्वास्थ्य विभाग के कई अहम पद खाली हैं। इन पदों के अतिरिक्त प्रभार सौंपे गए हैं या फिर कोई भी काम नहीं कर रहा। हेडक्वार्टर के डिप्टी डायरेक्टर का पद दो वर्ष से खाली है। डिवीजनल न्यूट्रिशयनल अधिकारी का पद भी खाली है। स्टोर कंट्रोलर का पद भी एक जनवरी से रिक्त है। आरएसपुरा के बीएमओ और गांधीनगर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक के पदों पर भी अतिरिक्त प्रभार ही सौंपे गए हैं।

यही नहीं, कोविड की दूसरी लहर में ट्राइएज अस्पताल की सबसे अहम भूमिका निभाने वाले चेस्ट डिजीज अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक का पद भी खाली है। मनोरोग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक ही इस अस्पताल का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे हैं। यह वह अस्पताल है, जहां से पहली और दूसरी लहर में मरीजों की प्राथमिक जांच के बाद उन्हें अन्य कोविड अस्पतालों में भेजा जाता था। 

Edited By Rahul Sharma

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept