दिल्ली में राजपथ पर दिखेगा लद्दाख का जल जीवन मिशन, जल शक्ति मंत्रालय की झांकी रहेगी आकर्षण का केंद्र

इस समय बर्फ से जमे लद्दाख में विशेष पाइपों से लोगों को मिल रहा पानी किसी बरदान से कम नही है। पुरानी पाइपें सर्दियों में फट जाती थी ऐसे में सर्दियों में पानी की दिक्कत होना एक आम बात थी।

Vikas AbrolPublish: Sun, 23 Jan 2022 10:01 PM (IST)Updated: Sun, 23 Jan 2022 10:01 PM (IST)
दिल्ली में राजपथ पर दिखेगा लद्दाख का जल जीवन मिशन, जल शक्ति मंत्रालय की झांकी रहेगी आकर्षण का केंद्र

जम्मू, राज्य ब्यूरो : गणतंत्र दिवस परेड के लिए जल शक्ति मंत्रालय द्वारा बनाई गई झांकी केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की जलजीवन मिशन टीम का उत्साह बढा रही है।केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में शून्य से बीस डिग्री नीचे के तापमान में तेरह हजार फीट की उंचाई पर नल से जल पहुंचाने के अभियान की जद्दोजहद को जल शक्ति मंत्रालय की झांकी के जरिए प्रदर्शित किया जा रहा है। जल जीवन मिशन के तहत दो साल में लद्दाख की तीस प्रतिशत आबादी तक जल जीवन मिशन के तहत नल से जल पहुंचाया गया है।

कड़ी ठंड में भी लोगों तक पानी पहुचाने का अभियान जारी है। इस समय बर्फ से जमे लद्दाख में विशेष पाइपों से लोगों को मिल रहा पानी किसी बरदान से कम नही है। पुरानी पाइपें सर्दियों में फट जाती थी, ऐसे में सर्दियों में पानी की दिक्कत होना एक आम बात थी। ऐसे में जल शक्ति मंत्रालय की झांकी के जरिए लद्दाख में जारी मुहिम को प्रदर्शित करने से क्षेत्र में उत्साह बुलंद है। ऐसे में लद्दाख के सचिव अजीत साहु ने जल जीवन मिशन के तहत हो रहे काम को सराहने के लिए मंत्रालय की सराहना की है। साहु ने लद्दाख में जल जीवन मिशन को कामयाब बनाने में उपराज्यपाल के साथ लद्दाख अटानमस हिल डेवेलपमेंट काउंसिल लेह व कारगिल के योगदान की सराहना की है।

लद्दाख में इस मिशन के तहत दूरदराज के गांवों में इंसुलेटेड पाइप की मदद से पानी पहुंचाने के लिए जनवरी महीने की कड़ी ठंड में भी काम हो रहा है। झांकी में दर्शाया गया है कि 13,000 फुट की ऊंचाई पर सर्दियों में तापमान -20 डिग्री सेल्सियस से नीचे के तापमान में बुरादे और अल्युमीनियम से बनी 4 इंच डायामीटर की स्पेशल-इंसुलेशन से ढकी पाइपें में पानी चलता रहता है। पानी न जमें, इसमें सौर-ऊर्जा की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

शून्य से बीस डिग्री नीचे के तामपान में सारे जल-स्रोत जम जाते हैं, सामान्य पाइप फट जाती हैं व जल सप्लाई बंद हो जाती है। अब पशुओं और हेलिकाप्टर की मदद से निर्माण-सामग्री पहुंचा कर मुख्य जल आपूर्ति लाइनों को फ्रॉस्ट-लाइन से नीचे बिछाया जाता है, ताकि उनमें पानी न जमे । जहांपाइप फ्रॉस्ट-लाइन से ऊपर होती है वहां उनकी ग्लास-वूल से इंसुलेशन की जाती है।

Edited By Vikas Abrol

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