गणतंत्र दिवस पर इस बार कश्मीर में बढ़ी तिरंगे की मांग, हालात शांत व नियंत्रण में

कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय ने कहा कि नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर बीते एक साल संघर्ष विराम जारी है लेकिन हमने अपनी सतर्कता का स्तर बिल्कुल नहीं घटाया है। हम पूरी तरह सजग हैं क्योंकि हमारा दुश्मन बहुत ही चालाक व धूर्त है।

Rahul SharmaPublish: Wed, 26 Jan 2022 08:09 AM (IST)Updated: Wed, 26 Jan 2022 08:09 AM (IST)
गणतंत्र दिवस पर इस बार कश्मीर में बढ़ी तिरंगे की मांग, हालात शांत व नियंत्रण में

श्रीनगर, राज्य ब्यूरो : कश्मीर में इस बार गणतंत्र दिवस खास होगा क्योंकि लोगों में अब आतंकियों का डर खत्म हो गया है। इसीलिए वह खुलेआम तिरंगा लेकर निकलते हैं। यही कारण है कि इस बार गणतंत्र दिवस पर कश्मीर में तिरंगे की मांग बढ़ गई है। यह बात भारतीय सेना की चिनार कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय ने खुद कही है। उन्होंने इसे कश्मीर में सकारात्मक बदलाव बताया है। साथ ही कहा कि कश्मीर में हालात पूरी तरह शांत व नियंत्रण में है। आतंकी हिंसा में कमी आ रही है। कश्मीर के लोग व नौजवान हिंसा के मार्ग पर चलने के बजाय उन तत्वों से लड़ें जो उन्हें अपने समाज और राष्ट्र के खिलाफ बंदूक उठाने के लिए उकसाते हैं।

श्रीनगर में एक समारोह के बाद मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कोर कमांडर ने कहा कि नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर बीते एक साल संघर्ष विराम जारी है, लेकिन हमने अपनी सतर्कता का स्तर बिल्कुल नहीं घटाया है। हम पूरी तरह सजग हैं, क्योंकि हमारा दुश्मन बहुत ही चालाक व धूर्त है। हम जंगबंदी को जारी रखना चाहते हैं ताकि एलओसी के दोनों तरफ बसी आम जनता सुरक्षित और शांत वातावरण में ङ्क्षजदगी गुजार सके।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मजबूरी थी जो उसने बीते साल फरवरी में जंगबंदी की पुनर्बहाली पर अमल का एलान किया। इसके पीछे उसका मकसद क्या था और वह आगे क्या चाहता है, यह आने वाला समय बताएगा। इसे जानने के लिए हम हालात पर लगातार निगरानी रखे हुए हैं। हम एक ऐसे दुश्मन से निपट रहे हैं, जो सिर्फ अपना स्वार्थ देखता है। पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आज भी घुसपैठियों को इस तरफ धकेलने की साजिश में लगी हुई है।

युवा समझ लें...समय बदल गया है : आतंकी हिंसा के लिए बंदूक उठाने वाले युवाओं से सैन्य अधिकारी ने कहा कि अब समय बदल चुका है। लोग भी समझदार हो रहे हैं। हिंसा के रास्ते पर गए कम उम्र के युवाओं को अभी समझ में नहीं आएगा कि उन्होंने यह बंदूक किसलिए उठाई है। जब उनकी उम्र 24-25 साल होगी, तब पता चलेगा कि यह रास्ता गलत है, इस पर सिर्फ तबाही है। इसीलिए वापस जिंदगी की तरफ लौटो। वरना हश्र वही होगा जो वह अच्छी तरह जानते हैं।

सीमा पार से अधिक मुल्क में छिपे दुश्मनों से खतरा : कोर कमांडर ने कहा कि एलओसी के पार बैठे दुश्मनों से ज्यादा खतरनाक वह लोग हैं जो हमारे ही मुल्क में हैं। यह लोग अपने स्वार्थ के लिए यहां हमारे युवाओं को बरगला रहे हैं। इसलिए हमें अपने घर के भीतर, अपने मुल्क के भीतर भी सबकुछ ठीक रखना होगा। विदेश में छिपे कट्टरपंथियों से भी बचकर रहना होगा, जो इंटरनेट मीडिया के जरिये कश्मीर के लोगों को बरबाद करने पर तुले हैं।  

Edited By Rahul Sharma

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