अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में सफलता के साथ ऐसे बदले हालात, पढ़ें 2021 के महत्वपूर्ण घटनाक्रम हमारे साथ

नेशनल कांफ्रेंस के प्रधान फारूक अब्दुल्ला समेत पार्टी के तीन सांसदों ने दिल्ली में परिसीमन आयोग की बैठक का बहिष्कार कर प्रदेश की सियासत को गर्मा दिया। भाजपा ने इसे लोगों की आवाज दबाने की साजिश करार दे नेकां के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

Vikas AbrolPublish: Wed, 29 Dec 2021 10:05 AM (IST)Updated: Wed, 29 Dec 2021 01:24 PM (IST)
अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में सफलता के साथ ऐसे बदले हालात, पढ़ें 2021 के महत्वपूर्ण घटनाक्रम हमारे साथ

जम्मू, जेएनएन। पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर जिस दिन से अनुच्छेद 370 की बेड़ियों से मुक्त हुआ उसी दिन से ही केंद्र शासित प्रदेश का सफलता की ऊंचाईयों की ओर बढ़ना तय था। प्रदेश की अर्थव्यस्था बढ़ाने की बात हो या फिर स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने की। हरेक क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा निर्देश पर केंद्र सरकार के प्रतिनिधि कदम से कदम मिलाकर प्रदेश सरकार के साथ आगे बढ़ते रहे। वर्ष 2021 में जम्मू-कश्मीर में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी हुए। पेश हैं उनके कुछ अंश:

जनवरी :

जनवरी महीने में जिला विकास परिषद के चेयरमैन चुनने की राजनीति हावी रही। भाजपा जिला विकास परिषद चुनाव में 75 सीटें जीतकर सबसे मजबूत रही। इस महीने में विपक्षी दलों ने भी विधानसभा चुनाव जल्द करवाने की मांग को लेकर मोर्चा खोला। साल के पहले महीने में पर्यटन, सड़काें, बुनियादी ढांचे की पड़ताल करने के लिए 31 सदस्यीय संसदीय कमेटी कश्मीर के तीन दिवसीय दाैरे पर पहुंची।

फरवरी :

नेशनल कांफ्रेंस के प्रधान फारूक अब्दुल्ला समेत पार्टी के तीन सांसदों ने दिल्ली में परिसीमन आयोग की बैठक का बहिष्कार कर प्रदेश की सियासत को गर्मा दिया। भाजपा ने इसे लोगों की आवाज दबाने की साजिश करार दे नेकां के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

राज्यसभा से सेवानिवृत्त होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी जम्मू में सक्रिय हो गए। उनके जम्मू पहुंचने के साथ ही उनके समर्थक खेमे में राजनीति तेज हो गई।

चौबीस सदस्यीय सदस्यीय विदेशी राजनयिकों के दल ने जम्मू कश्मीर का दौरा कर प्रदेश की नब्ज टटोली।

मार्च :

मार्च महीने में कांग्रेस की गुटबाजी सतह पर आ गई। गुलाम नबी आजाद के जम्मू कश्मीर में सक्रिय होते ही आजाद विरोधी मुखर हो गए। इसके बाद आजाद समर्थकों ने प्रदेश अध्यक्ष जीए मीर को हटाने के मुद्दा पर मोर्चा खोल दिया।

कांग्रेस व अन्य दलों की गुटबाजी का फायदा लेने के लिए भाजपा ने अन्य राजनीतिक दलों के नाराज नेताओं, कार्यकर्ताअआं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

अप्रैल :

कोरोना से उपजे हालात ने जम्मू कश्मीर में राजनीति पर ब्रेक लगा दी। भाजपा ने बीस अप्रैल के बाद अपने सभी राजनीतिक कार्यक्रम टाल दिए। वहीं प्रदेश कांग्रेस ने भी ग्रामीणों के मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए संभाग में गांव-गांव जाने की अपनी मुहिम भी टाल दी ।

मई :

जम्मू कश्मीर में बड़े फैसले करने की मुहिम के तहत सरकार ने दशकों से चली आ रही सरकार के दरबार को साल में दो बार मूव करने की प्रक्रिया को खत्म कर दिया। प्रदेश के श्रीनगर व जम्मू सचिवालयों ने ई आफिस व्यवस्था में काम करना शुरू दिया। उपराज्यपाल ने कहा कि इस प्रक्रिया को रोकने से सालाना 200 करोड़ रूपये बचेंगे।

दरबार मूव को रोकने के विरोध में कश्मीर में सियासत गर्मा गई। कश्मीर के राजनीतिक दलों ने इसे कश्मीर व कश्मीर के लोगों के हितों को दांव पर लगाने की मुहिम करार दिया।

जून :

दिल्ली में 24 जून को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली सर्वदलीय बैठक के बाद जम्मू कश्मीर में सियासत में तेजी आ गई। कश्मीर के राजनीतिक दलों ने राज्य दर्जे की बहाली का मुद्दा उठाया।

प्रधानमंत्री के जम्मू कश्मीर में परिसमीन आयोग की कार्यवाही के बाद जल्द विधानसभा चुनाव करवाने का आश्वासन देने के बाद राजनीतिक दलों ने तैयारी तेज कर दी।

जम्मू कश्मीर के भाजपा नेताओं ने दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपीइ नड्डा व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से बैठक की। बैठक में आतंकवादियों का निशाना बन रहे कश्मीर के कार्यकर्ताओं को सुरक्षा देने का मुद्दा भी उठा।

जुलाई :

जम्मू कश्मीर के लोगों की आकांक्षाएं जानने के लिए परिसीमन आयोग का दौरा। आयाेग की टीम ने कश्मीर व जम्मू संभाग में विधानसभा सीटों के परिसीमन को लेकर बैठकों में जिलों की जनसंख्या, भौगोलिक हालात, आदि की जानकारी ली। परिसीमन का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए टीम ने डिप्टी कमिश्नरों, डिवीजन कमिश्नरों, मुख्यसचिव, चुनाव अधिकारियों से भी बैठकें की।

पीएम से बैठक के बाद श्रीनगर में पीपुल्स अलायंस फार गुपकार डेक्लेरेशन के दलों की पहली बैठक। मिलकर कश्मीर के मुद्दे उठाने की रणनीति बनी।- अनुच्छेद 370 के बाद तेज हुई नाइंसाफी दूर करने की मुहिम के तहत प्रदेश की बेटियों से शादी करने वाले अन्य प्रदेशों के निवासी अब डोमिसाइल सर्टिफिकेट के हकदार हो गए।

जम्मू कश्मीर में डाेमिसाइल कानून में संशोधन कर अन्य प्रदेशों में ब्याही बेटियों के पतियों को अधिकार देने के विरोध में कांग्रेस सामने आ गई। पार्टी ने यह कहकर मोर्चा खोल दिया कि सरकार अन्य प्रदेशों के लाेगों पर प्रदेश को जमीनें व नौकरियां लुटाने की दिशा में काम कर रही है।

अगस्त :

श्रीनगर में पीपुल्स अलायंस फार गुपकार डेक्लेरेशन के दलों की बैठक में 370 की बहाली का मुद्दा जोरशोर से उठाने की तैयारी की। जम्मू कश्मीर में कांग्रेस को मजबूत बनाने की मुहिम के तहत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे। यह 370 हटने के बाद राहुल गांधी का पहला दौरा था।

संसदीय समितियों के दौरे तेज। लोकसभा के स्पीकर आेम बिडला के नेतृत्व में कई सांसदों ने जम्मू कश्मीर, लद्दाख दौरे कर विकास को तेजी दी।

सितंबर :

राहुल गांधी कश्मीर के बाद जम्मू के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे। उन्होंने जम्मू में पार्टी नेताअों से बैठकों कर उन्हें प्रदेश में कांग्रेस को मजबूत बनाने की कार्यवाही करने के लिए निर्देश दिए।

जम्मू कश्मीर में जनउम्मीदे जानने के लिए मोदी सरकार के मंत्रियों की आउटरीच मुहिम का दूसरा चरण शुरू। इस मुहिम के तहत 71 मंत्रियों ने जम्मू कश्मीर के दौरे कर जमीनी सतह पर विकास की थाह ली।

अक्टूबर :

एनआइए की टीमों ने कश्मीर के गांदरबल, बडगाम, बांडीपोरा, शाेपियां के साथ जम्मू संभाग के किश्तवाड़ व जम्मू जिले में छापे मारे। कश्मीर के दलों इन छापों को राजनीति से प्रेरित बताया।

नवंबर :

मुफ़्ती परिवार के लोगों से ईडी के पूछताछ को पीडीपी ने बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया। महबूबा मुफ्ती की सरकार विरोधी बयानबाजी तेज।

भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक। जिलों में पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं को जोरशोर से लोगों में जाने के निर्देश।

दिसंबर :

परिसीमन आयोग की दिल्ली में दूसरी बैठक में विधानसभा की सीटें बढ़ाने के मुद्दे पर बैठक। कश्मीर के दलों ने उठाया क्षेत्र से भेदभाव होने का मुद्दा।

जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव की सात सीट बढ़ाने के लिए परिसीमन आयोग के प्रस्तावित ड्राफ्ट पर राजनीति तेज। भाजपा, कश्मीर के दलों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर।

परिसीमन आयोग के ड्राफ्ट में जम्मू संभाग में 6 व कश्मीर संभाग में 1 सीटें बढ़ाने के विरोध में पीपुल्स अलायंस फार गुपकार डेक्लेरेशन के दलों ने 1 जनवरी 2022 को बंद का आह्वान किया।

Edited By Vikas Abrol

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept