ईयर एंडर 2021: जम्मू-कश्मीर में 2021 ने सत्ता पर काबिज होने की उम्मीदों को पंख लगाए

जारी वर्ष में परिसीमन आयोग ने 7 विधानसभा सीटें बढ़ाने की दिशा में 2 बैठकें की। इसके साथ परिसीमन आयोग की टीम ने जारी वर्ष में जुलाई महीने में जम्मू कश्मीर का दौरा कर स्पष्ट संकेत दे दिए कि इस दिशा में गंभीरता से कार्रवाई हो रही है।

Vikas AbrolPublish: Wed, 29 Dec 2021 09:22 AM (IST)Updated: Wed, 29 Dec 2021 09:22 AM (IST)
ईयर एंडर 2021: जम्मू-कश्मीर में 2021 ने सत्ता पर काबिज होने की उम्मीदों को पंख लगाए

जम्मू, विवेक सिंह। वर्ष 2021 ने केंद्र शासित जम्मू कश्मीर में अपने पहली सरकार बनाकर सत्ता पर काबिज होने की राजनीतिक दलों की उम्मीदों को पंख लगा दिए। जाते साले ने प्रदेश में चुनावी सरगर्मियों में तेजी के लिए मार्ग प्रशस्त कर दिया। वर्ष में परिसमीन आयोग की गतिविधियों में तेजी ने सभी राजनीतिक दलों को हरकत में ले ला दिया। ऐसे मे सत्ता में काबिज होने की उनकी उम्मीदों को पंख लग गए। साल के पहले छह महीनों में सियासी सरगर्मियों की रफ्तार भले ही धीमी रही हो लेकिन 24 जून को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस संबंध में प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं की बैठक में सियासत को हवा दे दी।

जारी वर्ष में परिसीमन आयोग ने 7 विधानसभा सीटें बढ़ाने की दिशा में 2 बैठकें की। इसके साथ परिसीमन आयोग की टीम ने जारी वर्ष में जुलाई महीने में जम्मू, कश्मीर का दौरा कर स्पष्ट संकेत दे दिए कि इस दिशा में गंभीरता से कार्रवाई हो रही है। आयोग ने साल के अंतिम माह में सात सीटें बढ़ाने के लिए अपना प्रस्तावित ड्राफ्ट पेश कर राजनीतिक दलों को चुनाव के लिए कमर कस लेने के निर्देश दे दिए।

परिसीमन आयोग के प्रस्तावित ड्राफ्ट ने जम्मू कश्मीर में बयानबाजी को भी बढ़ावा दिया। ऐसे में कश्मीर में आधार रखने वाले दलों ने अनुच्छेद 370 व राज्य के दर्जे की बहाली के साथ जम्मू को छह विधानसभा सीटें देने की तैयारी को मुद्दा बना लिया। कश्मीर को एक व जम्मू को छह सीटें देने के ड्राफ्ट को लेकर प्रदेश भाजपा भी लोगों के बीच आ गई। पार्टी ने यह संदेश दिया कि 370 हटने के बाद जम्मू से राजनीतिक भेदभाव के दिन लद गए। पहली बार जम्मू को उसका हक देने की दिशा में गंभीरता से कार्रवाई हुई। इससे पहले सिर्फ भेदभाव हुआ।इन हालात में कश्मीर केंद्रित राजनीतिक दलों ने भी अपने सियासी उम्मीदों को पूरा करने के लिए दौरे तेज कर दिए। दिसंबर महीने में ही पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती व उमर अब्दुल्ला ने भी जम्मू संभाग के दौरे किए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने भी जम्मू संभाग के कई हिस्सों के दौरे कर अपने समर्थकों का उत्साह बढ़ाने के साथ हाईकमान को स्पष्ट संकेत दिए कि चुनाव की तैयारियों के बीच प्रदेश में राजनीति में उनका खासा प्रभाव है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने भी अगस्त महीने से जम्मू कश्मीर के दो दौरे कर पहले कश्मीर व उसके बाद जम्मू संभाग में पार्टी गतिविधियों को तेजी दी।वर्ष 2021 में जम्मू कश्मीर में विकास को तेजी देने के लिए मोदी सरकार ने सांसदों व मंत्रियों के दौरे करवाकर लगातार दखल दी। संसदीय समितियो के सदस्यों के दौरों के साथ केंद्रीय मंत्रियों के खूब दौरे हुए। ऐसे में यहां सीमा से लेकर ग्रामीण इलाकों तक संसदीय समितियों में शामिल विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों ने विकास को परखा।

लोकसभा के स्पीकर ओम बिडला समेत 100 से अधिक सांसदों ने जम्मू कश्मीर, लद्दाख दौरे कर विकास को तेजी दी। सितंबर महीने से 71 केंद्रीय मंत्रियों ने मोदी सरकार की आउटरीच मुहिम के दूसरे चरण में जमीनी सतह पर दौरे कर लोगों की उम्मीदें जानने के साथ जमीन पर हो रहे विकास कार्यों की निगरानी की। भाजपा ने यहां लोगों के बीच जाकर इन दौरों को जनउम्मीदों को पूरा करने की मुहिम बताया तो वहीं विपक्षी दलों ने इस विधानसभा चुनाव की जमीन तैयार करने के लिए भाजपा की रणनीति का हिस्सा बताया।

Edited By Vikas Abrol

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