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इस तरह आईवीएफ को पहली बार में बनाया जा सकता है सफल

इस तरह आईवीएफ को पहली बार में बनाया जा सकता है सफलPublish Date:Tue, 20 Nov 2018 12:45 PM (IST)

देश में इनफर्टिलिटी के आंकड़े और नि:संतान दंपत्तियों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में चिकित्सा विज्ञान ने इनफर्टिलिटी से जूझ रहे दंपत्तियों को ‘’आईवीएफ’’ जैसे एक बेहद ही कारगर इलाज का तोहफा दिया है। मौजूदा समय में आईवीएफ को लेकर दंपत्तियों में बढ़ती जागरुकता की वजह से कई नि:संतान महिलाएं आईवीएफ अपना रही हैं। आईवीएफ ट्रीटमेंट लेने वाली लगभग सभी महिलाएं यही चाहती हैं कि वो पहले आईवीएफ चक्र में ही गर्भवती हो जाएं। साथ ही कुछ महिलाओं के मन में आईवीएफ ट्रीटमेंट को लेकर कई दुविधाएं रहती हैं। आईवीएफ ट्रीटमेंट के दौरान महिला को ट्रीटमेंट के कई स्टेज से गुजरना पड़ता है, ऐसे में इलाज ले रही महिला यही चाहती है कि वो आईवीएफ ट्रीटमेंट से पहली बार में ही प्रेगनेंट हो जाए ताकि उसे दूसरी बार आईवीएफ ट्रीटमेंट से न गुज़रना पड़े।

इन्दिरा आईवीएफ गुडगांव सेंटर की फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. निधि सलूजा का कहना है कि आईवीएफ ट्रीटमेंट का सफल होना कई स्थितियों पर निर्भर करता है। कई मामलों में आईवीएफ पहली बार में सफल नहीं हो पाता, जिसकी वजह से महिलाओं में निराशा और तनाव की स्थिति भी पैदा होती है। लेकिन कुछ ऐसे तरीके भी हैं जिन पर ध्यान दिया जाए तो ये तरीके आईवीएफ को पहली बार में सफल बनाने में मददगार साबित होते हैं।

आइये सबसे पहले जानते हैं कि आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाइज़ेशन) क्या है?

आईवीएफ एक मेडिकल प्रक्रिया है, जिससे महिला को गर्भधारण करने में मदद मिलती है। आईवीएफ नि:संतान दंपत्तियों के लिए एक वरदान की तरह है जिसकी वजह से कई निसंतान दंपत्तियों के जीवन में आज संतान सुख आया है। ऐसे कई दंपत्ति हैं जिन्होंने आईवीएफ से पहले गर्भधारण के लिए कई तरह के तरीके अपनाएं लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। लेकिन आईवीएफ अपनाने के बाद अब उनके घर में मासूम की किलकारियां गूंज रही हैं। आईवीएफ उपचार में महिला के अंडाशय से अंडों को निकाला जाता है और लैब में उनका मिलन पुरूष के शुक्राणुओं से कराया जाता है। ये सबकुछ एक बेहद ही संतुलित और अनुकूल वातावरण में किया जाता है। मिलन की प्रक्रिया के बाद अंडा फर्टीलाइज़ होता है जिसे बाद में महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस दौरान इस बात का पूरा ध्यान रखा जाता है कि सुरक्षित तरीके से अच्छा भ्रूण बन सके। आईवीएफ ट्रीटमेंट लेने के बाद महिला को कई तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए। आइये जानते हैं इन सावधानियों के बारे में:

भारी वज़न न उठाएं

इन्दिरा आईवीएफ गाज़ियाबाद सेंटर की फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. पूजा सिंह बताती हैं कि आईवीएफ प्रकिया के बाद महिला को भारी सामान नहीं उठाना चाहिए। भारी वज़न उठाने से पेट की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है जिससे आईवीएफ प्रक्रिया पर गहरा असर पड़ सकता है। इस दौरान महिलाओं को शारीरिक परिश्रम नहीं करना चाहिए।

कठिन व्यायाम से बचें

आईवीएफ के बाद महिलाओं को किसी भी तरह के कठिन व्यायाम से बचना चाहिए। इस दौरान महिलाएं टहल सकती हैं और मेडिटेशन कर सकती हैं।

प्रोजेस्टेरॉन का सेवन करें

गर्भावस्था के दौरान महिला के लिए ये ज़रूरी हो जाता है कि वो प्रोजेस्टेरॉन का नियमित सेवन करें। ऐसा करने से शरीर में प्रोजेस्टेरॉन का स्तर ठीक रहेगा और गर्भावस्था बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। आईवीएफ के बाद डॉक्टर इंजेक्शन द्वारा महिला को कृत्रिम प्रोजेस्ट्रोन देते हैं।

डॉक्टरी सलाह का पालन करें 

आईवीएफ की प्रक्रिया में सबसे अहम है कि आप डॉक्टरी सलाह का पालन करें। डॉक्टर की बताई हर बात और हर सलाह आपके लिए गर्भधारण करने में फायदेमंद होगी। आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान ऐसे पल भी आते हैं जब महिलाएं मानसिक तौर पर खुद से जूझ रही होती हैं, ऐसे में डॉक्टरी सलाह और हौसले से ही महिलाओं को आईवीएफ के दौरान हिम्मत मिलती है।

सही क्‍लीनिक का चुनाव करें

आईवीएफ की सफलता का सबसे बड़ा मूलमंत्र है सही डॉक्टर और क्लीनिक का चुनाव करना। आईवीएफ की प्रक्रिया के लिए एक बेहद ही अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है ऐसे में ये ज़रूरी है कि आप जिस क्लीनिक से आईवीएफ ट्रीटमेंट लेने जा रहे हैं उनके पास आईवीएफ को सफल बनाने के लिए सभी अत्याधुनिक तकनीक मौजूद हों। ऐसा ही एक प्रख्यात आईवीएफ सेंटर है इन्दिरा आईवीएफ सेंटर, जो अत्याधुनिक क्लोज्ड वर्किंग चेंबर तकनीक के ज़रिये आईवीएफ ट्रीटमेंट को अंजाम देता है। साढ़े 7 वर्षों में यह आईवीएफ सेंटर अब तक 35 हज़ार सफल आईवीएफ कर चुका है।

आई वी एफ में आपके लिए ये भी ज़रूरी हो जाता है कि आप विशेषज्ञ आईवीएफ सेंटर और डॉक्टरों से ही आईवीएफ ट्रीटमेंट लें।

निःसंतानता से जुड़ा आपका कोई भी सवाल है तो इन्दिरा आईवीएफ कि वेबसाइट विजिट करें और अपनी समस्या लिखें। अधिक जानकारी के लिए इस नंबर 07230062729 पर कॉल करें। 

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क्या है Polycystic Ovarian Disease? जीवनशैली और खान-पान में बदलाव है ज़रूरी

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिसीज़ यानी पीसीओडी आजकल महिलाओं में तेज़ी से बढ़ रही है। इसका सबसे बड़ा कारण होता है हॉर्मोन असंतुलन और ये महावारी के चक्र के असंतुलन के रुप में सामने आता है। इसके लक्षणों में मोटापा बढ़ना, चेहरे पर बाल आना, मुहांसे आना और तैलीय त्वचा होना है। पीसीओडी की वजह से कम उम्र की महिलाओं को भी निसंतानता की समस्या से जूझना पड़ता है। पीसीओडी की वजह से महिला के शरीर में बनने वाले अंडे सही समय पर नहीं फूटते और इनकी गुणवत्ता में भी कमी आ जाती है। पीसीओडी के इलाज के दौरान जीवनशैली और खान-पान में बदलाव करना ज़रूरी होता है, इस दौरान महिला को कृत्रिम हॉर्मोन इंजेक्शन दिए जाते हैं जिससे महिला की महावारी को नियमित किया जा सके। पीसीओडी में निसंतानता होने पर आईयूआई का विकल्प मौजूद है लेकिन अगर आईयूआई से भी गर्भधारण नहीं हो पाता तो ऐसे में आईवीएफ ही सबसे कारगर उपाय है।

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