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अब कम ख़र्च में मिल पाएगा आईवीएफ ट्रीटमेंट, निसंतानों को मिली नई उम्मीद

अब कम ख़र्च में मिल पाएगा आईवीएफ ट्रीटमेंट, निसंतानों को मिली नई उम्मीदPublish Date:Mon, 08 Oct 2018 09:42 AM (IST)

किसी भी विवाहित जोड़े का दांपत्य जीवन तब तक अधूरा रहता है जब तक उन्हें संतान सुख प्राप्त नहीं हो जाता। वर्तमान परिदृश्य में भारत ही नहीं बल्कि देश-विदेश में भी विवाहित जोड़े निसंतानता से जूझ रहे हैं। दुनियाभर में निसंतानता की सबसे बड़ी वजह इनफर्टिलिटी है, जो कि महिला या पुरुष दोनों में से किसी में भी हो सकती है। पिछले दो दशकों में इनफर्टिलिटी के आंकड़ों में लगातार इज़ाफ़ा देखने को मिला है। इनफर्टिलिटी के बढ़ते आंकड़ों की वजह बदलती जीवनशैली, विवाह की बढ़ती उम्र, कामकाजी महिलाओं की बढ़ती संख्या, एल्कोहॉल और तंबाकू का बढ़ता सेवन और मोटापे का बढ़ता स्तर है, इसके साथ ही इनफर्टिलिटी की कुछ क्लीनिकल वजहें भी हैं जैसे पॉली-सिस्टिक ओवेरियन सिंडरोम(पीसीओएस), एंडोमेट्रियल ट्यूबरक्लोसिस और यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई)। लेकिन ऐसा नहीं है कि इनफर्टिलिटी का शिकार सिर्फ़ महिलाएं ही हो रही हैं बल्कि पुरुष भी इनफर्टिलिटी से जूझ रहे हैं। 
मेडिकल साइंस ने असिस्टिड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी(एआरटी) के ज़रिये इनफर्टिलिटी का इलाज संभव बनाया है। हालांकि भारत में इनफर्टिलिटी से जूझ रहे सिर्फ़ 1% दंपत्ति ही इसका इलाज करवाते हैं। इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट की तरफ़ निसंतान दंपत्तियों के कम रुझान की कई वजहें हैं जैसे - 

  • इलाज का ज़्यादा ख़र्च जो लगभग 1.5 लाख से 2 लाख रुपए प्रति साइकिल होता है। इनफर्टिलिटी के पूरे इलाज के दौरान दंपत्ति को कई ट्रीटमेंट साइकिल से गुज़रना पड़ता है ऐसे में इस इलाज का ख़र्च उठा पाना देश के लगभग 80% दंपत्तियों के लिए मुमकिन नहीं हो पाता।
  • देश में आईवीएफ विशेषज्ञों और एंब्रियोलॉजिस्ट की सीमित संख्या की वजह से एक बड़ी आबादी को ज़रुरत के मुताबिक इलाज नहीं मिल पाता।
  • आईवीएफ सेंटर और विशेषज्ञ डॉक्टर सिर्फ़ 8 मेट्रो शहरों में ही सीमित हैं। ऐसे में छोटे शहरों के दंपत्तियों को इनफर्टिलिटी का इलाज नहीं मिल पाता।
  • संतान सुख की चाह रखने वाले दंपत्तियों में इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट को लेकर जागरुकता की कमी।

हालांकि देशभर में ऐसे दंपत्ति भी हैं जो कभी निसंतानता से जूझ रहे थे और आज उनके घरों में बच्चे की किलकारियां गूंज रही हैं और ये सब आईवीएफ ट्रीटमेंट की वजह से ही मुमकिन हो पाया है। देश में कुछ ऐसे संस्थान भी हैं जो इनफर्टिलिटी को लेकर सजग हैं और ख़ासतौर पर आईवीएफ क्षेत्र में बेहद ही कम कीमतों पर सेवाएं मुहैया करा रहे हैं। ऐसा ही एक संस्थान है इंदिरा आईवीएफ, जिसने पिछले 8 सालों में देशभर की 32 हज़ार मांओं को आईवीएफ के ज़रिये मातृत्व का सबसे बड़ा तोहफा दिया है। इंदिरा आईवीएफ के संस्थापक डॉ. अजय मुर्डिया ने 8 साल पहले देश में इनफर्टिलिटी की गंभीरता को समझते हुए इस संस्थान की शुरुआत की थी। इंदिरा आईवीएफ के आज देशभर में 50 आईवीएफ सेंटर हैं। दंपत्तियों में जागरुकता बढ़ाने के लिए डॉ. मुर्डिया और इंदिरा आईवीएफ ने देशभर के 20 राज्यों के 520 शहरों में 1683 जागरुकता शिविर लगाए, जहां नि:संतान दंपत्तियों को आईवीएफ के फायदों के बारे में बताया गया। इंदिरा आईवीएफ में क्लोज वर्किंग चैंबर तकनीक के ज़रिये आईवीएफ ट्रीटमेंट को अंजाम दिया जाता है जिसकी सफलता दर रिकॉर्ड 72 फीसदी है। इंदिरा आईवीएफ की सफलता के पीछे सबसे बड़ी वजह ये है कि जो इलाज दूसरे संस्थानों में 3 से 5 लाख में उपलब्ध है वही इलाज इंदिरा आईवीएफ में मात्र 1.5 से 2 लाख में किया जाता है लिहाज़ा ज़्यादा से ज़्यादा दंपत्ति अब आईवीएफ ट्रीटमेंट ले पाएंगे और अपने जीवन में भर पाएंगे संतान सुख।

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निसंतान दंपत्ति इन आसान तरीकों से पा सकते हैं संतान सुख

निसंतान दंपत्ति संतान की चाहत में हर तरह के उपाय और तरीके आज़मा लेते हैं लेकिन इससे उन्हें कुछ फायदा नहीं होता। ऐसे में आइये देखते हैं कुछ ऐसे आसान तरीके जिनसे निसंतान दंपत्तियों को मिला संतान सुख। आईवीएफ तकनीक के ज़रिये निसंतान दंपत्ति अपने जीवन में संतान सुख पा सकते हैं। आईवीएफ तकनीक के ज़रिये ट्यूब ब्लॉकेज और अंडों की कमी की वजह से मां न बन पाने वाली महिलाएं भी संतान सुख पा सकती हैं।

महिलाओं में इनफर्टिलिटी की वजह बन रही आधुनिक जीवनशैली और तनाव

देश में इनफर्टिलिटी से जूझने वाली महिलाओं की तादाद में इज़ाफ़ा देखने को मिला है। ऐसे में ये ज़रुरी हो जाता है कि महिलाएं अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए अपने जीवन के फैसले लें। अतिरिक्त तनाव और देर से विवाह भी महिलाओं की फर्टिलिटी पर असर डाल रहा है, इसके साथ ही फास्ट फूड और बढ़ता वज़न जैसी समस्याएं भी आजकल की महिलाएं झेलती हैं जिसकी वजह से महिलाओं को इनफर्टिलिटी से जूझना पड़ रहा है। आईवीएफ की अत्याधुनिक तकनीक के ज़रिये इनफर्टिलिटी से जूझ रहे दंपत्तियों को संतान सुख प्राप्त हो सकता है।

पुरुषों में तनाव, आधुनिक जीवनशैली, करियर का तनाव बन रहीं शुक्राणुओं की कमी की वजह

आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी के बीच करियर का तनाव, नशा और देर से शादी पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी की बड़ी वजह बन रहे हैं। कोई भी दंपत्ति अगर एक वर्ष या उससे ज़्यादा से बिना गर्भनिरोधक के साथ रह रहा है और फिर भी उन्हें संतान नहीं होती तो ऐसे में इसे निसंतानता कहते हैं। पुरुषों में इसके कई कारण हो सकते हैं इसलिए पुरुषों के लिए ये सबसे ज़्यादा ज़रुरी हो जाता है कि वो जल्द किसी विशेषज्ञ से परामर्श लें। पुरुषों में इनफर्टिलिटी के आंकड़ें भी लगातार बढ़ रहे हैं ऐसे में चिकित्सा विज्ञान पुरुषों को भी ये विकल्प प्रदान करता है कि वो अपने शुक्राणुओं की गुणवत्ता बढ़ा सकते हैं और अत्याधुनिक तकनीक के ज़रिये अपना इलाज करवा सकते हैं। ऐसे कई पुरुष हैं जिन्होंने इन तकनीकों के ज़रिये अपना इलाज करवाया और पिता का सुख भी पाया है।

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