सालभर हिमाचल की राजनीति का केंद्र रहा कांगड़ा, चुनावों ने कइयों का बिगाड़ा खेल, ये दिग्‍गज नेता नहीं रहे

Year Ender 2021 कोरोना संक्रमण महामारी के बीच वर्ष 2021 में जिला कांगड़ा प्रदेश की राजनीति का केंद्र ही रहा है। इस वर्ष प्रदेश की राजनीति में कई रणनीतियां बनी और ग्रामीण व शहरी निकाय सहित विधानसभा के उपचुनाव भी हुए

Rajesh Kumar SharmaPublish: Sun, 26 Dec 2021 07:15 AM (IST)Updated: Sun, 26 Dec 2021 08:17 AM (IST)
सालभर हिमाचल की राजनीति का केंद्र रहा कांगड़ा, चुनावों ने कइयों का बिगाड़ा खेल, ये दिग्‍गज नेता नहीं रहे

धर्मशाला, मुनीष गारिया। Year Ender 2021, कोरोना संक्रमण महामारी के बीच वर्ष 2021 में जिला कांगड़ा प्रदेश की राजनीति का केंद्र ही रहा है। इस वर्ष प्रदेश की राजनीति में कई रणनीतियां बनी और ग्रामीण व शहरी निकाय सहित विधानसभा के उपचुनाव भी हुए, जिसमें कुछ सरकार के पक्ष में रहे तो कुछ परिणामों ने विपक्ष के चेहरे भी खिला दिए। इसके अलावा इस साल प्रदेश के तीन राजनेता भी खाेए। वहीं, कोरोना काल के चलते अपने आवास में रह रहे धर्मगुरु दलाईलामा के दीदार भी लगभग दो सालों के बाद उनके अनुयायियों को हुए। वहीं अंतिम माह में दो साल के बाद तपोवन में विधानसभा का शीतकालीन सत्र भी हुआ, जिसमें सवर्ण वर्ग के लोगों के आगे सरकार को झुकना पड़ा और सामान्‍य आयोग की मांग को मानना पड़ा।

चुनावी रणनीतियों की बात की जाए तो 17 से 19 फरवरी तक शिला धर्मशाला में प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक हुई। यह बैठक राजनीतिक दृष्टि में इसलिए महत्वपूर्ण थी, क्योंकि बैठक में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा आए हुए थे। उन्होंने प्रदेश सरकार को 2022 विस चुनावों में मिशन रिपीट को लेकर जरूरी टिप्स दिए। जिसके तहत उन्होंने ग्रामसभा से विधानसभा का नारा भी दिया।

निकाय चुनाव

अप्रैल माह में नगर निगम धर्मशाला व नवगठित नगर निगम पालमपुर के चुनाव हुए। शहरी निकाय के इस चुनावों में भाजपा धर्मशाला में तो कांग्रेस का गढ़ तोड़ने में कामयाब रही और 11 पार्षद सरकार ने अपने बना लिए और फिर एक निर्दलीय को अपने में मिलाकर नगर निगम का गठन कर लिया। इसके विपरीत नगर निगम पालमपुर में भाजपा को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा। 15 वार्डों वाले नगर निगम पालमपुर में सरकार के हाथ मात्र तीन ही पार्षद लगे।

फतेहपुर में उपचुनाव

सुजान सिंह पठानिया के निधन के बाद अक्टूबर माह के विधानसभा क्षेत्र फतेहपुर में उप-चुनाव हुए। जिसमें सुजान सिंह पठानिया के बेटे एवं कांग्रेस प्रत्याशी भवानी पठानिया पर हल्के की जनता से विश्वास जताते हुए विस सदन में पहुंचाया।

उपचुनाव में बिखरी फतेहपुर भाजपा

फतेहपुर में उपचुनाव के दौरान भाजपा का बिखराव भी जगजाहिर हो गया। कृपाल परमार का टिकट काटकर बलदेव ठाकुर को दिया तो हलके में सियासी घमासान मच गया। सिर्फ परमार ही नहीं टिकट के अन्य कई तलबगारों ने भी अपनी अपनी राह पकड़ ली। पोस्टर वार, परमार का त्यागपत्र और अन्य घटनाक्रमों से फतेहपुर भाजपा की संगठनात्मक शक्ति तार-तार से होती नजर आई। टिकट कटने के बाद परमार ऐसे मौन हुए कि चुनाव खत्म हो जाने तक उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार तो दूर किसी राजनीतिक कार्यक्रम में हिस्सा तक नहीं लिया। परमार बिल्कुल मौन साधु बन गए थे।

पहली बार कांगड़ा पहुंचे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक बनने के बाद मोहन भागवत 16 से 20 दिसंबर को पहली बार कांगड़ा प्रवास पर रहे। इस दौरान राज्यपाल हिमाचल प्रदेश, प्रदेश भाजपा के शीर्ष नेतृत्व सहित आरएसएस के हर जिला प्रचारक भी कांगड़ा में रहे। यहां उन्होंने संगठन का धार देने के साथ साथ धर्मशाला से देश के सैनिकों व पूर्व सैनिकों को सम्मान संदेश दिया।

दो साल बाद हुए दलाई लामा के दीदार

कोरोना काल शुरू होने के साथ ही धर्मगुरु दलाई लामा से अपने अनुयायियों के साथ मिलकर जुलना बंद कर दिया था। सभी टीचिंग भी स्थगित कर दीं थीं। वह मैक्लोडगंज स्थित अपने आवास में अपने स्टाफ के तीन लोगों के साथ ही मिल रहे थे। आवास से बाहर भी नहीं दिखाई देते थे। यहां तक ही अपने जन्मदिवस पर भी वह नहीं निकले। 20 दिसंबर को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत उनके मिलने उनके आवास पहुंचे तो वह जनता के सामने आए। मोहन भागवत से मिलने से चार दिन पूर्व वह निर्वासित तिब्बत प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग से भी मिले थे।

कांगड़ा के इन नेताओं के हुए निधन

12 फरवरी: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक एवं पूर्व मंत्री सुजान सिंह पठानिया का 78 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्हें वर्ष 2017 में अधरंग (पैरालिसिस) हो गया था, तबसे उनकी तबीयत ठीक नहीं रहती थी।

30 अक्टूबर

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के तेजतर्रार नेता जीएस बाली का 67 वर्ष की उम्र में नई दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद अस्वस्थता के कारण बाली कुछ दिनों से एम्स में भर्ती थे। बाली नगरोटा बगवां विस क्षेत्र से चार बार विधायक, जबकि दो बार वीरभद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। उनके पास परिवहन, खाद्य आपूर्ति, पर्यटन और तकनीकी शिक्षा विभाग का प्रभार रहा।

29 नवंबर

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध समाजसेवी एवं विधानसभा क्षेत्र पालमपुर के पूर्व विधायक डाक्‍टर शिव कुमार का निधन हो गया। वह हिमाचल के एकमात्र आंखों के अस्पताल मारंडा, सलियाणा स्थित बेसहारा एवं वृद्ध आश्रम के अलावा कई शिक्षण संस्थाओं के जनक रहे।

Edited By Rajesh Kumar Sharma

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