हिमाचल के ये खेल सितारे देश दुनिया में बिखेर रहे चमक, क्रिकेट के अलावा इन खेलों में भी बनाई पहचान

Himachal Pradesh Foundation Day यूं तो राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने खेल की छाप छोडऩे वाले हिमाचल के खिलाडिय़ों की फेहरिस्त लंबी है लेकिन हाल के वर्षों में इस छोटे से पहाड़ी राज्य की प्रतिभाओं ने खेलों की दुनिया में काफी नाम कमाया है।

Rajesh Kumar SharmaPublish: Tue, 25 Jan 2022 06:29 AM (IST)Updated: Tue, 25 Jan 2022 08:13 AM (IST)
हिमाचल के ये खेल सितारे देश दुनिया में बिखेर रहे चमक, क्रिकेट के अलावा इन खेलों में भी बनाई पहचान

धर्मशाला, अजय अत्री। यूं तो राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने खेल की छाप छोडऩे वाले हिमाचल के खिलाडिय़ों की फेहरिस्त लंबी है लेकिन हाल के वर्षों में इस छोटे से पहाड़ी राज्य की प्रतिभाओं ने खेलों की दुनिया में काफी नाम कमाया है। मौजूदा समय में कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो विश्व खेल परिदृश्य में अपने खेल कौशल का प्रभाव छोड़ रहे हैं। क्रिकेट के अलावा बाक्सिंग, कबड्डी, शूटिंग और हाकी में यहां के युवाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान बनाई है।

ऋषि धवन  (क्रिकेट)

छोटी काशी यानी मंडी के इस हरफनमौला खिलाड़ी ने 2016 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था। उस वक्त टीम इंडिया की कमान महेंद्र सिंह धौनी के हाथ थी। हालांकि उस वक्त मिले अवसर को ऋषि धवन भुना नहीं पाए लेकिन घरेलू क्रिकेट में अपने शानदार प्रदर्शन से लगातार सुर्खियों में बने रहे। हाल ही में मजबूत तमिलनाडु को फाइनल मुकाबले में मात देकर हिमाचल की टीम को पहली बार विजय हजारे ट्राफी का खिताब दिलाया। टूर्नामेंट में कप्तान धवन ने अपने आलराउंड खेल का प्रदर्शन करते हुए हर किसी को हैरत में डाल दिया। उन्हें उम्मीद है कि इस प्रदर्शन के बल पर उन्हें फिर से टीम इंडिया में एंट्री का अवसर मिलेगा।

रेणुका सिंह ठाकुर  (क्रिकेट)

रोहड़ू (शिमला) की पारसा गांव की मध्यम गति की गेंदबाज रेणुका का चयन वूमेन क्रिकट वल्र्ड के लिए हुआ है। यह आयोजन चार मार्च से न्यूजीलैंड में होगा। यही नहीं न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली जाने वाली पांच मैच की एकदिवसीय मैचों की सीरीज में भी वह टीम का हिस्सा होंगी। हाल ही में रेणुका आस्ट्रेलिया में तीन मैचों की टी-20 सीरीज खेल चुकी हैं। रेणुका का कहना है कि उन्हें खुद पर पूरा भरोसा है कि वह टीम के लिए उपयोगी साबित होंगी। रेणुका ने काफी संघर्ष के बाद सफलता हासिल की है। जब वह तीन साल की थी तो उनके पिता का देहांत हो गया। उनका सपना था कि बेटी क्रिकेट बने। मां ने ही रेणुका और उनके भाई की परवरिश की। रेणुका हिमाचल की एकमात्र महिला गेंदबाज हैं। जिन्होंने नेशनल टूर्नामेंट में हैट्रिक ली है। अंडर-19 में कर्नाटक के खिलाफ रेणुका ने हैट्रिक बनाते हुए कुल पांच विकेट लिए थे। उनसे पहले सुषमा वर्मा और हरलीन देओल भी भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए खेल चुकी हैं।

अंजुम मोदगिल (शूटिंग)

मूलत: ऊना के धुसाड़ा की अर्जुन अवार्डी अंजुम मोदगिल ने शूटिंग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी नाम कमाया है। कई पदकों पर अचूक निशाने लगा चुकी हैं। टोक्यो ओलिंपिक के दौरान शूटिंग टीम के लिए पहला कोटा हासिल करने वाली अंजुम मोदगिल शानदार प्रदर्शन के बावजूद इस बड़े टूर्नामेंट में मेडल से चूक गई थीं। मोदगिल 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन इवेंट में 15वें स्थान पर रहीं। अंजुम का कहना है कि उस दिन वह अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दे पाई थीं लेकिन उन्हें पूरा विश्वास है कि वह दुगने जोश से अगले ओलिंपिक में देश के लिए पदक जीतने की कोशिश करेंगी और सफल भी होंगी।

अजय ठाकुर (कबड्डी)

नालागढ़ के अजय ठाकुर को देश के स्टार कबड्डी खिलाडिय़ों में गिना जाता है। भारतीय कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान ने कई मौकों पर देश को गर्व करने के मौके दिए हैं। 2014 में एशियन गेम्स और 2016 के वल्र्ड कप में भारतीय टीम को गोल्ड दिलाने में अजय की अहम भूमिका रही थी। उन्हें अर्जुन अवार्ड और पदमश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है। प्रो-कबड्डी हो या फिर कोई बड़ा टूर्नामेंट। अजय ठाकुर हर बार चैंपियन की तरह प्रदर्शन करते हैं।अजय ने अपने नैसर्गिक खेल से हर टूर्नामेंट में छाप छोड़ी है। प्रो-कबड्डी के स्टार खिलाडिय़ों में भी अजय का नाम सबसे ऊपर आता है। हर सीजन में उनका खेल निखरा है। यह स्टार खिलाड़ी इस बार दिल्ली से दम दिखा रहा है। उन्हें टीम ने 46 लाख रुपये की अच्छी खासी बोली पर खरीदा है। अजय पिछले सीजन में तमिल थलाइवा से खेले थे।

वरुण कुमार (हाकी)

हिमाचल के चंबा निवासी वरुण कुमार टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे हैं। इससे पहले 1964 में स्वर्ण जीतने वाली भारतीय टीम का नेतृत्व ऊना निवासी पद्मश्री चरणजीत सिंह ने किया था। चंबा के डलहौजी से ताल्लुक रखने वाले वरुण के पिता पेशे से ट्रक ड्राइवर हैं, जो पंजाब के जालंधर में परिवार सहित गुजर बसर करते हैं। वरुण का कहना है कि टोक्यो में पदक जीतने पर हिमाचल के लोगों ने बेहद प्यार दिया। वरुण ने कहा कि हाकी की नेशनल टीम में जगह बनाने तक का सफर आसान नहीं रहा। इसके लिए उनके पिता ने न केवल प्रेरित किया बल्कि खुद तंगहाली में रहकर उन्हें खेल का सामान महंगी, हाकी स्टिक  इत्यादि लाकर देते रहते थे। ऊना से दीपक ठाकुर भी लंबे समय तक नेशनल हाकी टीम में खले चुके हैं।

आशीष चौधरी (बाक्सिंग)

जिला मंडी के सुंदरनगर निवासी आशीष चौधरी ओलिंपिक में खेलने वाले हिमाचल के पहले बाक्सर हैं। आशीष टोक्यो ओलंपिक में 75 किलोग्राम भारवर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। पिता के देहांत के माह भर बाद ही आशीष ने ओलंपिक क्वालिफाइंग मुकाबले में इंडोनेशिया के बाक्सर को एकतरफा मुकाबले में हराकर ओलिंपिक का टिकट हासिल किया था। हालांकि वो टोक्यो ओलिंपिक में पदक जीतने में कामयाब नहीं हो सके। लेकिन इससे पहले आशीष ने एशियाई चैंपियनशिप और वल्र्ड चैंपियनशिप में मेडल जीते थे। आशीष को ओलंपिक में मेडल न जीत पाने का अफसोस तो है लेकिन कहते हैं कि यह अनुभव आगे के लिए काम आएगा और पूरा विश्वास है कि अपनी खामियों को दूर कर भारत के लिए अगले ओलिंपिक में पदक अवश्य लाएंगे। देश को भी उनसे बहुत उम्मीदें हैं। आशीष को बचपन से ही बाक्सिंग का शौक था और उन्होंने महज नौ वर्ष की उम्र में ग्लव्स पहने लिए थे।

Edited By Rajesh Kumar Sharma

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