बिलासपुर एम्स में मरीजों का आनलाइन बन रहा डाटा बैंक

AIIMS Bilaspur यूएचआइ के जरिए अब आप एम्स बिलासपुर में एक बार पंजीकृत होने के बाद कई साल बाद भी अपने स्वास्थ्य रिकार्ड का ब्योरा एक क्लिक पर हासिल कर सकेंगे। इसके लिए एम्स बिलासपुर में इन दिनों हेल्थ इंफार्मेशन सिस्टम यानी (एचआइएस) प्रणाली को दुरुस्त किया जा रहा है।

Virender KumarPublish: Fri, 28 Jan 2022 11:30 PM (IST)Updated: Fri, 28 Jan 2022 11:30 PM (IST)
बिलासपुर एम्स में मरीजों का आनलाइन बन रहा डाटा बैंक

बिलासपुर, सुनील शर्मा।

AIIMS Bilaspur, यूनिक हेल्थ आइडी (यूएचआइ) के जरिए अब आप एम्स बिलासपुर में एक बार पंजीकृत होने के बाद कई साल बाद भी अपने स्वास्थ्य रिकार्ड का ब्योरा एक क्लिक पर हासिल कर सकेंगे। इसके लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर में इन दिनों हेल्थ इंफार्मेशन सिस्टम यानी (एचआइएस) प्रणाली को दुरुस्त किया जा रहा है। एम्स बिलासपुर में आने वाले मरीजों का पंजीकरण एक यूनिक आइडी के तहत किया जा रहा है जो आपको दी जाने वाली पर्ची पर पेशेंट आइडी या फिर यूएचआइडी नंबर के आगे लिखी होगी। एक बार यह आइडी दर्ज होने के बाद एम्स बिलासपुर के सिस्टम में आपका रिकार्ड तैयार होना शुरू हो जाएगा। इसके बाद जब भी आप अपना उपचार करवाने के लिए दोबारा एम्स में पहुंचेंगे तो पुराना रिकार्ड भी चिकित्सक के सामने कंप्यूटर स्क्रीन पर होगा।

एनडीएचएम से होगा कनेक्ट

केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत देश के सभी स्वास्थ्य संस्थानों को एक ही प्रणाली से जोडऩे की तैयारी में है। इसी कड़ी के तहत एम्स बिलासपुर में भी इस प्रणाली को शुरू किया गया है। एम्स बिलासपुर में इसके तहत अब तक 15 हजार से अधिक मरीजों का डाटा बैंक आनलाइन तैयार है। प्रतिदिन एम्स में दो सौ से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।

पर्ची के झंझट से मुक्ति

एचआइएस सिस्टम के लागू होने के बाद लोगों को पर्चियों के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी, अगर किसी मरीज की पर्ची गुम भी हो जाती है तो वह अपने यूनिक आइडी नंबर के जरिये एम्स में जाकर अपनी पर्ची निकलवा सकता है। इसके साथ ही दोबारा इलाज के लिए जाने पर वह इसी नंबर से उपचार लिया जा सकता है।

हेल्थ इंफार्मेशन सिस्टम को एम्स बिलासपुर में शुरू किया गया है। यहां मरीजों का पंजीकरण आनलाइन प्रणाली के तहत ही किया जा रहा है। प्रत्येक मरीज की पर्ची पर एक अगर यूएचआइडी नंबर लिखा होता है जिसकी मदद से एम्स के चिकित्सक उनका रिकार्ड आनलाइन प्रणाली में डाटा बैंक के रूप में रखेंगे।

-दिनेश कुमार वर्मा, मेडिकल सुपरीटेंडेंट, एम्स बिलासपुर

Edited By Virender Kumar

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