आउटसोर्स कर्मचारियों का डाटा जुटाने की चुनौती

राज्य में 120 कंपनियां सरकार को आउटसोर्स सेवाएं प्रदान कर रही हैं। पुलिस विभाग की सभी हेल्पलाइन सेवाएं आउटसोर्स पर चल रही हैं। इसके अतिरिक्त हिमाचल पथ परिवहन निगम का अधिकांश काम आउटसोर्स कर्मियों के कंधों पर चल रहा है। सरकार की सबसे बड़ी स्वास्थ्य एंबुलेंस सेवा आउटसोर्स है।

Neeraj Kumar AzadPublish: Sat, 22 Jan 2022 11:10 PM (IST)Updated: Sat, 22 Jan 2022 11:10 PM (IST)
आउटसोर्स कर्मचारियों का डाटा जुटाने की चुनौती

शिमला, राज्य ब्यूरो। राज्य में 120 कंपनियां सरकार को आउटसोर्स सेवाएं प्रदान कर रही हैं। पुलिस विभाग की सभी हेल्पलाइन सेवाएं आउटसोर्स पर चल रही हैं। इसके अतिरिक्त हिमाचल पथ परिवहन निगम का अधिकांश काम आउटसोर्स कर्मियों के कंधों पर चल रहा है। सरकार की सबसे बड़ी स्वास्थ्य एंबुलेंस सेवा आउटसोर्स है। सरकार के समक्ष आउटसोर्स कर्मचारियों का डाटा एकत्र करने की चुनौती खड़ी है। इसकी वजह विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से हुई भर्ती है। इसके अलावा कई आउटसोर्स कर्मी बीच में ही नौकरी छोड़कर चले जाते हैं, ये भी समस्या बना हुआ है। कुछ कंपनियां तो नियमित तौर पर वर्षों से कार्य कर रही हैं। लेकिन सत्ता परिवर्तन के साथ ही कई कंपनियां भी बदल जाती हैं। कंपनियों की संख्या इतनी बड़ी होने के कारण आउटसोर्स पर लगे कर्मचारियों की सही संख्या की जानकारी अब तक सरकार के पास उपलब्ध नहीं है।

एक अनुमान के मुताबिक सरकारी विभागों, निगम व बोर्ड में करीब 30 हजार कर्मचारी आउटसोर्स पर सेवाएं दे रहे हैं। आरोप हैं कि सेवा प्रदान करनी वाली ऐसी कंपनियां आउटसोर्स पर सेवारत कर्मियों को 10 हजार से भी कम वेतन देती हैं। इन कर्मियों के ईपीएफ काटने में भी गड़बड़ी की शिकायत सामने आई हैं। कई जगहों से इस तरह की शिकायतें हैं कि आउटसोर्स पर तैनाती के एक अथवा दो साल बाद ही कर्मियों का ईपीएफ काटा जाता है। कई बार तो कर्मचारी से ही दोनों शेयर काटे जा रहे हैं। आउटसोर्स कर्मियों के वेतन भुगतान की तारीखें भी अलग अलग हैं।

आउटसोर्स कर्मचारी पूर्व कांग्रेस सरकार के वक्त भी आंदोलन करते रहे। कांग्रेस सरकार के अंतिम वर्ष में होटल पीटरहाफ में आउटसोर्स कर्मचारियों के सम्मेलन में नीति बनाए जाने का आश्वासन दिया था। इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने भाग लिया था। इजसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र ङ्क्षसह को आमंत्रित किया गया था। कांग्रेस के सत्ता से बाहर होने के बाद इन कर्मियों का मामला वहीं खड़ा है। मंत्रिमंडलीय उप समिति के सदस्य शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज कहते हैं कि सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों को संरक्षण प्रदान करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। कमेटी की तरफ से आउटसोर्स पर सेवाएं देने वाले कर्मचारियों के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। उसके बाद कोई नीतिगत फैसला लिया जाएगा।

भाजपा सरकार ने चुनावी वर्ष पर प्रवेश करने से पहले आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए जल शक्ति मंत्री महेंद्र ङ्क्षसह ठाकुर की अध्यक्षता में कमेटी गठित की है। इस कमेटी में शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज एवं ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी को भी शामिल किया गया है। यह कमेटी अब तक आउटसोर्स कंपनियों से कर्मचारियों का डाटा एकत्र करने में जुटी है, ताकि उनको लेकर कोई नीतिगत फैसला लिया जा सके।

हमें शोषण से बचाया जाए

हिमाचल प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष शैलेंद्र शर्मा ने सरकार से मांग की कि आउटसोर्स कर्मचारियों को शोषण से बचाया जाए। उनकी समस्या के समाधान के लिए कैबिनेट सब कमेटी के गठन के फैसले का स्वागत करते हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर व सब कमेटी के अध्यक्ष महेंद्र ङ्क्षसह ठाकुर के समक्ष अपना पक्ष रख चुके हैं। राज्य में आउटसोर्स पर सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को न तो समय पर वेतन मिल रहा है और न ही वेतन पर्याप्त है। कई जगह ईपीएफ काटने में भी गड़बड़ी की शिकायतें मिली है और कई कर्मचारी 10 हजार रुपए से भी कम वेतन ले रहे हैं। सरकार को कर्मचारियों की सेवाएं अनुबंध पर लाने के अलावा उन्हें नियमित करने को लेकर नीतिगत फैसला लेना चाहिए।

Edited By Neeraj Kumar Azad

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