कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर बोले- इस योजना से खेतों में आएगी हरियाली

भू-जल स्तर में निरंतर आ रही कमी के मद्देनजर सरकार ने किसानों व बागवानों के लिए प्रधानमंत्री कृषि ङ्क्षसचाई योजना प्रति बूंद अधिक उत्पादन लागू की है जिससे जल संरक्षण के साथ-साथ गैर ङ्क्षसचित क्षेत्रों में भी कृषि उत्पादन में वृद्धि की जा सकेगी।

Manoj KumarPublish: Sat, 15 Jan 2022 11:04 PM (IST)Updated: Sat, 15 Jan 2022 11:04 PM (IST)
कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर बोले- इस योजना से खेतों में आएगी हरियाली

ऊना, संवाद सहयोगी। भू-जल स्तर में निरंतर आ रही कमी के मद्देनजर सरकार ने किसानों व बागवानों के लिए प्रधानमंत्री कृषि ङ्क्षसचाई योजना प्रति बूंद अधिक उत्पादन लागू की है जिससे जल संरक्षण के साथ-साथ गैर ङ्क्षसचित क्षेत्रों में भी कृषि उत्पादन में वृद्धि की जा सकेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि आएगी। इसके अलावा कृषि के लिए वर्षा जल पर निर्भरता वाले क्षेत्रों में जल संचय और वर्षा जल दोहन से जल संरक्षण और भू-जल स्तर को भी बढ़ाया जा सकेगा।

कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने बताया कि सरकार इस योजना को लोकप्रिय बनाने पर बल दे रही है। इसके तहत सूक्ष्म ङ्क्षसचाई-ड्रिप एवं स्प्रिंकलर प्रणाली स्थापित करने के लिए लघु एवं सीमांत किसानोंं को 80 प्रतिशत तथा बड़े किसानों को 45 प्रतिशत अनुदान का प्रविधान किया गया है।

ड्रिप इरिगेशन सिस्टम पर खर्च

उपनिदेशक बागवानी विभाग अशोक धीमान ने बताया कि प्रति हेक्टेयर अधिक दूरी की फसल पर 12 वर्गमीटर की दूरी पर ड्रिप ङ्क्षसचाई स्थापित करने के लिए 27 हजार, 10 वर्गमीटर पर 28 हजार, नौ पर वर्गमीटर पर 30 हजार तक की लागत आती है और जैसे-जैसे फसल की प्रजाति के अनुसार दूरी कम होती जाएगी, इसकी लागत बढ़ती जाएगी। न्यूनतम 1.2 बाई 0.6 वर्गमीटर पर 1.58 लाख तक लागत आती है, जिस पर सरकार अनुदान दे रही है। एक हेक्टेयर भूमि पर स्प्रिंकलर ङ्क्षसचाई प्रणाली पांच वर्गमीटर की दूरी पर स्थापित करने पर 73.5 हजार और तीन वर्गमीटर पर 84 हजार लागत आती है। मिनी स्थानातंरित स्प्रिंकलर प्रणाली की लागत 10 वर्गमीटर पर 1.06 लाख तथा आठ वर्गमीटर पर 1.17 लाख प्रति हेक्टेयर आती है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को प्रशिक्षित करने का भी प्रविधान किया है जिसके लिए किसानों को राज्य के भीतर परिवहन सुविधा सहित एक हजार रुपये प्रतिदिन देने का प्रविधान है।

क्या है ड्रिप सिंचाई प्रणाली

माइक्रो सिंचाई योजना या ड्रिप सिंचाई योजना एक विशेष विधि है, जिसके माध्यम से पानी को पौधों की जड़ों तक सीधे पहुंचाया जाता है। इसमें पानी को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कम अंतराल पर नालियों के माध्यम से पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है जिससे पौधों को लगातार पानी मिलता रहता है और ज्यादा पानी भी खर्च नहीं होता। इस कार्य में पाइप, बाल्व, नालियां तथा एमीटर का प्रयोग किया जाता है। साधारण ङ्क्षसचाई में अधिकतर पानी जो पौधों को मिलना चाहिए, वो भाप बनकर उड़ जाता है या जल रिसाव से जमीन के अंदर चला जाता है जिससे पानी अधिक खर्च होता है। इस नई पद्धति से जल की बचत होती है और फसल को उपयुक्त पानी भी मिल जाता है। इस पद्धति से कम दाब और नियंत्रण से सीधे पौधों के जड़ों तक पानी के साथ-साथ उर्वरक की भी आपूर्ति होगी जिससे पोषक तत्वों की लीङ्क्षचग व वाष्पीकरण के नुकसान से भी बचाव होगा।

क्या हैं लाभ

ड्रिप इरिगेशन सिस्टम से पौधों को रोजाना पानी दिया जा सकता है, जिससे पानी जड़ के आसपास सदैव पर्याप्त मात्रा में रहता है। इस विधि से जमीन में जल और वायु उचित मात्रा में रहती है और पौधों की वृद्धि सही तरीके से व जल्दी होती है। उबड़-खाबड़ भूमि जहां पानी को आसानी से नहीं पहुंचाया जा सकता, ऐसी भूमि पर भी इस विधि से ङ्क्षसचाई करके अधिक पैदावार करना संभव होगा। फसली बीमारियों व खरपतवार पर नियंत्रण के साथ-साथ 30 प्रतिशत तक खाद की बचत और 10 प्रतिशत तक मजदूरी की लागत में कमी होगी।

Edited By Manoj Kumar

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept