This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.
OK

एमआरसी डांगी गया जेल, आपरेटर अमित फिर दस दिन के रिमांड पर

आरसी फर्जीवाड़े में गिरफ्तार किए गए कंप्यूटर आपरेटर अमित को एक बार फिर से रिमांड पर लिया गया है।

JagranSat, 27 Feb 2021 06:20 AM (IST)
एमआरसी डांगी गया जेल, आपरेटर अमित फिर दस दिन के रिमांड पर

जागरण संवाददाता, यमुनानगर :

आरसी फर्जीवाड़े में गिरफ्तार किए गए कंप्यूटर आपरेटर अमित व एमआरसी राजेंद्र डांगी का रिमांड शुक्रवार को खत्म हो गया। उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। जहां से राजेंद्र डांगी को जेल भेज दिया गया, जबकि आपरेटर अमित कुमार को फिर से रिमांड पर लिया गया। उसे अब सेक्टर 17 थाने में दर्ज केस में दस दिन के रिमांड पर लिया गया है।

आरसी फर्जीवाड़े का खेल जगाधरी एसडीएम कार्यालय के सरल केंद्र से चल रहा था। सिरसा पुलिस ने यह फर्जीवाड़ा उजागर किया था। इसके बाद तत्कालीन जगाधरी एसडीएम दर्शन सिंह ने आपरेटर अमित कुमार समेत चार कर्मियों के खिलाफ सेक्टर 17 थाने में केस दर्ज कराया गया। एक अन्य बिलासपुर एसडीएम की ओर अमित कुमार पर दर्ज कराया गया। दोनों मामलों में जांच के लिए एसआइटी गठित कर दी गई। फिलहाल दो डीएसपी व तीन इंस्पेक्टरों की गठित एसआइटी मामले की जांच कर रही है।

सिरसा कोर्ट से अमित को लिया था रिमांड पर :

एसआइटी की पकड़ में आने से पहले ही आरोपित अमित ने सिरसा कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। वहां से सिरसा पुलिस ने रिमांड पर लिया। उससे 25 लाख रुपये की रिकवरी भी हुई थी। बाद में एसआइटी ने उसे बिलासपुर थाने में दर्ज केस में रिमांड पर लिया था। दो बार उसे रिमांड पर लिया। शुक्रवार को रिमांड पूरा हुआ। अब उसे सेक्टर 17 थाने में दर्ज केस में दस दिन के रिमांड पर लिया गया है। एसआइटी के इंस्पेक्टर सुखबीर सिंह ने बताया कि आरोपित राजेंद्र डांगी को जेल भेजा गया। उससे ढाई लाख रुपये की रिकवरी हुई है। अभी गाड़ियों की रिकवरी नहीं हो सकी है। अमित से मात्र 50 हजार रुपये की रिकवरी हुई है। सिरसा से ही प्रोडक्शन वारंट पर लिए गए सुनील चिटकारा भी एसआइटी के पास ही है। अधिकारियों से लेकर कर्मियों तक का नाम

बताया जा रहा है कि रिमांड के दौरान एसआइटी ने फर्जीवाड़े में गिरफ्तार किए गए सुनील चिटकारा, अमित, राजेंद्र डांगी व एमआरसी संजीव कुमार को आमने सामने बिठाकर पूछताछ की। पूछताछ में अधिकारियों व कर्मियों के नाम सामने आए हैं। पूछताछ में पता लगा कि अधिकारियों के इशारे पर ही यह पूरा खेल चल रहा था। हालांकि एसआइटी इसमें जांच की बात कह रही है। वर्ष 2018 से यह फर्जीवाड़ा चल रहा था। इस दौरान चार एसडीएम यहां पर तैनात रहे और एमआरसी भी बदले गए। बढ़ रहा रिमांड, बरामदगी के नाम पर कुछ नहीं

अभी तक एसआइटी इन आरोपितों तीन बार रिमांड पर ले चुकी है, लेकिन अभी तक कोई भी वाहन रिकवर नहीं हो सका है। कुछ पैसों की बरामदगी हुई है, लेकिन जिस हिसाब से फर्जीवाड़ा किए जाने का दावा किया जा रहा है। उससे हिसाब किताब करोड़ों में पहुंच रहा है। अभी तक एसआइटी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेची गई गाड़ियां भी बरामद नहीं कर सकी। दो डीलर रोहतक निवासी राम निवास व सोनीपत निवासी कृष्ण भी अभी गिरफ्त से बाहर हैं।

यमुनानगर में कोरोना वायरस से जुडी सभी खबरे

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!