ईयर एंडर 2021: इस साल यमुनानगर की इन हस्तियों ने खूब रोशन किया नाम, आपदा को बनाया अवसर

साल 2021 अपने आखिरी पड़ाव पर है। इस साल कोरोना ने खूब तबाही मचाई। लोग घरों में ही दुबक कर बैठे रहे। इन सब के बीच कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने आपदा को अवसर में बदलने का काम किया। पढ़िए इनकी प्रेरणादायक कहानी...

Rajesh KumarPublish: Sun, 26 Dec 2021 05:16 PM (IST)Updated: Sun, 26 Dec 2021 05:16 PM (IST)
ईयर एंडर 2021: इस साल यमुनानगर की इन हस्तियों ने खूब रोशन किया नाम, आपदा को बनाया अवसर

यमुनानगर, जागरण संवाददाता। साल 2021 के चंद दिन बचे हैं। कोरोना वायरस के कारण इस साल लोग खुद के लिए संघर्ष कर रहे थे। तब भी यमुनानगर की हस्तियों ने इस वर्ष भी खूब नाम रोशन किया। दूसरों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। लाकडाउन के समय में भी खुद को व्यस्त रखा और आगे बढ़ते गए।  

नंबर एक

बहुउद्देश्यीय खाद्य प्रसंस्करण मशीन बनाकर राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित हो चुके दामला के किसान धर्मवीर कांबोज को अब द हनी बी नेटवर्क क्रिटिविटी एंड इनक्लूसिव इनोवेशन अवार्ड-2020 से नवाजा गया है। यह अंतरराष्ट्रीय वार्षिक प्रतियोगिता द ग्लोबल हनी बी नेटवर्क की ओर से आयोजित की गई थी। इसमें 87 देशों के 2500 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इन प्रतिभागियों ने उनकी उपलब्धियों की प्रविष्टियां आनलाइन प्रस्तुत की थी। किसान धर्मवीर ने प्रथम स्थान हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राकेश जैन, द ग्लोबल हनी बी नेटवर्क के चेयरमैन प्रोफेसर अनिल कुमार गुप्ता द्वारा उनको सम्मान दिया गया। 65 डिग्री सेल्सियस तापमान तक किसी भी फल सब्जी को फ्राई करने व मक्का के कच्चे दानों से दूध निकालने वाली मशीन तैयार करने पर उनको यह अवार्ड मिला है।

ये भी जाने धर्मवीर के बारे में

# कृषि जगत में उत्कृष्ट कार्य करने पर वर्ष-2009 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, 2010 में तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पंवार ने फार्मर साइंटिस्ट का अवार्ड दिया।

# वर्ष 2013 में फूड प्रोसेसिंग मशीन मनाने पर फस्र्ट नेशनल अवार्ड वर्ष-2014 में एक जुलाई से 30 जुलाई तक राष्ट्रपति के मेहमान बनकर रहे।

मल्टीपपर्ज मशीन बनाने पर वर्ष-2015 में जिंबाबे के तत्कालीन राष्ट्रपति रार्बट मुगांबे ने उनको सम्मानित किया।

किसान धर्मवीर छठी कक्षा में थे जब इलेक्ट्रिक हीटर व बोरिंग करने की मश्ीन का माडल तैयार कर दिया था। आठवीं कक्षा एमरजेंसी लाइट बनाई।

65 डिग्री सेल्सियस तापमान तक किसी भी फल सब्जी को फ्राई करने व मक्का के कच्चे दानों से दूध निकालने वाली मशीन तैयार करने का आइडिया विदेशों में भी सराहा गया।

# वर्ष-1996 में उन्होंने जड़ी बूटियों की खेती शुरू की थी। एलोवेरा और अन्य प्रकार की जड़ी बूटियों की खेती व इनसे निर्मित दर्जनों उत्पादों ने इस संघर्षशील किसान को देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में ख्याति मिली है। अलग-अलग जड़ी बूटियों की खेती करने बाद धर्मवीर अब तुलसी की खेती भी कर रहे हैं। एलोवेरा से एलोवेरा जूस, एलोवेरा जैल, शैंपू, साबुन, लहुसन के विभिन्न उत्पाद, तुलसी का अर्क, आंवला कैंडी सहित अन्य कई तरह के उत्पाद तैयार करते हैं।

नंबर दो :

ओलंपिक खेलों में तीसरी बार हिस्सा लेने वाले जगाधरी के शूटर संजीव राजपूत का नाम इस बार युवा की जुंबा पर रहा है, हालांकि टोक्यो ओलिंपिक में शहर के शूटर संजीव राजपूत लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाए। वह 50 मीटर राइफल थ्री पाजिशन शूटिंग में 39 खिलाड़ियों में 32वें नंबर पर रहे। लोगों ने उनसे पदक जीतने की जो उम्मीदें लगा रखी थी। वह यहीं टूट गई। तीनों राउंड में संजीव राजपूत ने मात्र 1157 अंक अर्जित किए। उनको प्रधानमंत्री व सीएम मनोहर लाल भी सम्मानित कर चुके हैं।

40 वर्षीय संजीव राजपूत इससे पहले वर्ष 2008 व 2012 में भी ओलंपिक खेलों में क्वालीफाई कर चुके हैं। वह सामान्य परिवार से हैं। उनके भाई मनोज राजपूत ने कहा कि संजीव काफी मेहनती है। अब भी वह तैयारी में लगे रहते हैं। फिट रखने के लिए संजीव राजपूत सुबह उठते ही सबसे पहले योग और इसके बाद प्रेक्टिस करते हैं। खुद को एकाग्रचित रख सकें। इसके लिए वह अाध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर से भी मदद लेते हैं।

नंबर तीन :

सिविल सर्जन यमुनानगर डा. विजय दहिया इस वर्ष में काफी चर्चा में रहे। वह यमुनानगर के गांव मुंडामाजरा के रहने वाले हैं। उन्हें प्राइम टाइम रिसर्च मीडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से बेस्ट हास्पिटल एडमिनिस्ट्रेटर आफ द ईयर का पुरस्कार मिला। उन्हें यह पुरस्कार कोरोना से बचाव के लिए किए गए इंतजामों के आधार पर मिला है। जिस समय कोविड महामारी फैली। उस समय सिविल अस्पताल की नई बिल्डिंग का निर्माण कार्य चल रहा था। ऐसे में सिविल सर्जन डा. विजय दहिया ने महज 18 दिनों में ईएसआइ में कोविड अस्पताल स्थापित कराया। स्वास्थ्य सेवाओं का विभाजन भी किया गया। प्रसुति ग्रह, महिला रोग सुविधाएं उप-जिला नागरिक अस्पताल जगाधरी, आपातकालीन सुविधाएं सिविल अस्पताल में की गई। जिससे अन्य मरीजों को भी कोई दिक्कत न आए। कोविड अस्पताल में केंद्रीय आक्सीजन सिस्टम, वेंटिलेटर, 50 बिस्तरों की व्यवस्था के साथ-साथ मरीजों, स्टाफ नर्स व चिकित्सा अधिकारियों के लिए पूरी व्यवस्था कराई गई। जब कोरोना की दूसरी लहर में आक्सीजन की किल्लत बनी, तो सिविल सर्जन ने बंद पड़ी फैक्ट्री में आक्सीजन प्लांट चालू कराया। यहां से जिले के साथ-साथ अन्य जगहों पर भी आपूर्ति की गई। उनकी इस व्यस्था की काफी सराहना हुई थी।

नंबर चार :

कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर तलाकौर के किसान 58 वर्षीय गुरमेल सिंह किसान रत्न अवार्ड -2021 से नवाजे जाएंगे। उनको यह सम्मान चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार में किसान दिवस पर राज्यपाल बंडारू दत्तारेय ने दिया। यह जिले के लिए बड़ी उपलब्धि रही है। गुरमेल 30 एकड़ भूमि पर खेती करते हैं। वह हाईटेक किसान हैं। आधुनिक यंत्रों के साथ कार्य करने के साथ जल संरक्षण की दिशा में भी लगे हुए है। खेतों को समतल करने के लिए लेजर लेवलर का प्रयोग करने वाले गुरमेल सिंह जिले के पहले किसान हैं। बेड प्लांटिंग, सूक्ष्म सिंचाई, फव्वारा विधि से सिंचाई और धान की सीधी बिजाई करते हैं। परंपरागत फसलों के साथ-साथ फल व सब्जियों की खेती भी आधुनिक तकनीकी से कर रहे हैं। कृषि कार्यों के साथ-साथ दूध उत्पादन में भी अच्छी उपलब्धि है। गन्ना की फसल के साथ प्याज, लहसुन, आलु व सरसों की खेती करते हैं। एक फसल के साथ दूसरी फसल उगाकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। साथ ही इसके लिए दूसरे किसानों को भी जागरूक करते हैं। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए धान की बजाय मक्का व आलू की फसल को अधिक तरजीह देते हैं। इसके अलावा रासायनिक खादों का प्रयोग न के बराबर करते हैं। इनके स्थान पर हरी खाद का प्रयोग अधिक करते हैं।

नंबर पांच :

सुमन की तारिफ करते हैं सीएम व वनमंत्री तक

एमएससी बायोटेक पास जिले के गांव शहजादवाला की सुमन चौधरी ने नौकरी छोड़कर पंचायत का चुनाव लड़ा। उन्होंने मेहनत के बलबूते पर न केवल गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि गांव की 38 एकड़ जमीन पर बाग लगाकर ग्राम पंचायत की आमदनी बढ़ाने का भी काम किया। आने वाले दिनों में इस बाग से पंचायत को 30 लाख रुपये सालाना की आमदनी होगी। इसके लिए इस वर्ष राज्य वन महोत्सव में उनको वनमंत्री कंवरपाल गुर्जर व केंद्रीय मंत्री रतन लाल कटारिया ने सम्मानित कर चुके हैं।

झाड़ियों की जगह बाग देख सभी होते हैं  हैरान :

गांव शहजादवाला जिस 38 एकड़ रेतीली जमीन पर कुछ साल पहले केवल झाड़, फूंस ही उगता था, अब वहां फलदार पौधे खड़े हैं। ऐसी जमीन पर हरे भरे पेड़ देख कर हर कोई हैरान है क्योंकि रेत में न तो धान होता था और न ही गेहूं। गांव के दोनों तरफ बरसाती नदी बहती है। इसलिए ज्यादातर जमीन रेतीली है। गांव की करीब 125 एकड़ में से 38 एकड़ जमीन पर केवल फूंस ही उगता था। 125 एकड़ की नीलामी के बाद ग्राम पंचायत को मुश्किल से डेढ़ लाख रुपये सालाना ही मिलते थे। अब तो यह घट कर 80 हजार रुपये ही रह गई थी। इसमें से गत वर्ष 38 एकड़ जमीन पर आम, अमरूद बेहड़ा, जामुन, जमोआ, नींबू, आड़ू के पौधे लगाए। दो साल बाद फलों की नीलामी करने से पंचायत को 30 लाख रुपये सालाना की आमदनी होगी। सुमन ने बताया कि गांव में बाग लगाने की योजना को लेकर वह अपने पति विजय पाल के साथ शिक्षा एवं वन मंत्री कंवरपाल गुर्जर से मिली थी। जब उन्होंने पूरा प्रोजेक्ट समझा तो मंत्री ने इसकी काफी सराहना की थी। तब कंवरपाल गुर्जर ने डीएफओ सूरजभान से बात की। उन्होंने पूरा सहयोग किया। वन विभाग ने गांव में 4200 पौधे लगाए, जिनमें 3000 आम के पौधे हैं। कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने गांव की महिलाओं को रोजगार दिया। उनसे मास्क बनवाए।

Edited By Rajesh Kumar

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