रेल मंत्रालय ले सकता है बड़ा फैसला, डीआरएम बनने की नीति में बदलाव के संकेत, 42 अधिकारियों के तबादले अटके

देशभर में 21 डीआरएम का कार्यकाल पूरा हो चुका है। नई पालिसी लागू होते ही ट्रांसफर होने की उम्मीद है। उम्र की शर्त और रेलवे की सर्विस में निर्धारित कोटा में बदलाव किया जा सकता है। रेल मंत्री चाहते हैं इसे और बेहतर किया जाए।

Anurag ShuklaPublish: Tue, 17 May 2022 04:22 PM (IST)Updated: Tue, 17 May 2022 04:22 PM (IST)
रेल मंत्रालय ले सकता है बड़ा फैसला, डीआरएम बनने की नीति में बदलाव के संकेत, 42 अधिकारियों के तबादले अटके

अंबाला, [दीपक बहल]। मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) बनने के लिए बनाई गई पालिसी और बेहतर करने के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव अब बदलाव करने के मूड में हैं। देश भर में 21 डीआरएम का कार्यकाल पूरा हो चुका है, लेकिन इन सभी का तबादला नई पालिसी के तहत होने के संकेत मिल रहे हैं। इस कारण 42 वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले अटके पड़े हैं।

दरअसल, मौजूदा समय डीआरएम बनने के लिए यदि उम्र 52 से अधिक है तो अधिकारी की बेदाग सर्विस और उसकी काबिलियत को दरकिनार कर दिया जाता है। इसी तरह जोन के महाप्रबंधक बनने के लिए भी कम से कम दो साल की नौकरी बची होनी चाहिए। इसलिए रेल मंत्री उम्र को लेकर नीति में बदलाव कर सकते हैं। इसके अलावा रेलवे की अलग-अलग ब्रांच की सर्विस में अधिकारियों का डीआरएम बनने का कोटा निर्धारित है। इस में भी कुछ बदलाव किया जा सकता है।

सूत्रों के मुताबिक रेलवे की पुराने नियमों में अब धीरे-धीरे बदलाव किए जा रहे हैं। मौजूदा समय में अधिकारी की सर्विस बेदाग है, वह काबिल भी है लेकिन उसकी उम्र 52 साल से अधिक है तो उसका नाम डीआरएम बनने के लिए तैयार की जाने वाली लिस्ट में शामिल नहीं किया जाता। देशभर में 68 मंडल हैं, जबकि डीआरएम पद की नियुक्ति की जाती है तो रेलवे की अलग-अलग विंग के अधिकारियों का कोटा तय है।

ट्रैफिक सर्विस में 14 अधिकारी ही डीआरएम रह सकते हैं। इसी तरह इंजीनियरिंग में 14, मकैनिकल में 14, इलेक्ट्रिकल में 12, सिग्नल एवं टेलीकाम (एस एंड टी) छह, अकाउंट में चार, पर्सनल में दो और स्टोर में दो का कोटा है। जब भी डीआरएम बनने के लिए पैनल बनाया जाता है, तो उम्र के साथ-साथ उक्त कोटे के अनुसार ही लिस्ट तैयार की जाती है। अब उम्र और कोटे की नीति में बदलाव किया जा सकता है।

हालांकि आधिकारिक रूप से जब तक नीति में बदलाव नहीं हो जाता, रेल अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। इसी प्रकार जोन के महाप्रबंधक बनने के लिए भी कम से कम दो साल की नौकरी बची होनी चाहिए और रेलवे बोर्ड में मेंबर बनने के लिए भी एक साल जीएम की नौकरी और एक साल नौकरी बची होनी चाहिए। जो अधिकारी डीआरएम बनते हैं, वे ही आगे जोन में महाप्रबंधक और फिर मेंबर बनते हैं। यदि डीआरएम के बनने की नीति में बदलाव हुआ, तो महाप्रबंधक और बोर्ड मेंबर बनने की नीति में भी बदलाव हो सकता है। उधर, उत्तर रेलवे के चीफ पब्लिक रिलेशन आफिसर दीपक कुमार ने बताया कि तबादला पालिसी के बारे में बोर्ड ही बता सकता है।

इन डीआरएम के कार्यकाल हो चुके हैं पूरे

नवंबर 2019 में 21 अधिकारियों को डीआरएम बनाने के बाद सूची जारी की थी। डीआरएम का पद एक मंडल में 2 साल ही होता है। ऐसे में अधिकारियों का कार्यकाल पूरा हो चुका है,लेकिन इनका तबादला अब हो सकता है कि नई पालिसी के तहत ही किया जाए। नई पालिसी लागू होती है, तो डीआरएम बनने वाले अधिकारियों का पैनल भी उसकी के अनुसार तय होगा। जिन अधिकारियों का कार्यकाल पूरा हो चुका है, उनमें डीआरएम अंबाला जीएम सिंह, रतनाम के विनीत गुप्ता चक्रधरपुर के विजय कुमार साहू, मुंबई सेंट्रल के जीवीएल त्य कुमार, रायपुर एसईसीआर श्याम सुंदर गुप्ता, नांदेड़ उपिंदर सिंह, हुबली के अरविंद मलखेड़े, लखनऊ जंक्शन से मोनिका अग्निहोत्री, अजमेर के नवीन कुमार परशुरामका, संबलपुर के प्रदीप कुमार, जबलपुर के संजय बिस्वास, मालदा टाउन के यतेंद्र कुमार, बिलासपुर के आलोक सहाय, जोधपुर के आशुतोष पंत, कोटा के पंकज शर्मा, मुंबई के शलभ गोयल, सोलापुर के शैलेश गुप्ता, खड्गपुर के मनोरंजन प्रधान, पुणे से रेणु शर्मा, गंटूर से आर मोहन राजा, दानापुर से सुनील कुमार शामिल हैं।

Edited By Anurag Shukla

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