यमुनानगर नगरपालिका के अधीन आने वाली कालोनियों की रजिस्ट्री नहीं कर रहे अधिकारी, लोग परेशान

यमुनानगर के तहसील कार्य से जुड़े लोगों के मुताबिक रजिस्ट्रियां बंद होने से जहां आमजन को परेशानी हो रही है वहीं वसीका नवीस का कार्य भी कम हुआ है। पहले रादौर तहसील में होने वाले रजिस्ट्री के कार्य में करीब करीब 50 प्रतिशत रजिस्ट्री कार्य रादौर-छोटाबांस का होता था।

Naveen DalalPublish: Sun, 23 Jan 2022 10:04 AM (IST)Updated: Sun, 23 Jan 2022 10:04 AM (IST)
यमुनानगर नगरपालिका के अधीन आने वाली कालोनियों की रजिस्ट्री नहीं कर रहे अधिकारी, लोग परेशान

रादौर(यमुनानगर), संवाद सहयोगी। यमुनानगर नगरपालिका के अधीन आने वाली कालोनियों में रजिस्ट्री न होने से लोग परेशान हैं। इससे एक ओर जहां राजस्व विभाग को प्रतिदिन मिलने वाली लाखों रुपये की अस्टाम ड्यूटी नहीं मिल रही, वहीं दूसरी ओर नपा की आमदनी पर भी असर पड़ रहा है। नगरपालिका के अधीन पड़ने वाली अधिकांश कालोनियां को अवैध एरिया में शामिल होना इसका कारण बताया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण उन्हें यह परेशानी उठानी पड़ रही है। समय पर नपा प्रशासन इस मामले में पैरवी नहीं कर पाया।

लोग चक्कर लगा लगा हुए परेशान

स्थानीय निवासी सुभाष, जसविंद्र, रजनीश, प्रवीन, रामकुमार, प्रिंस, बंसीलाल, विपिन, शमशेर ने बताया कि नगरपालिका के अधीन आने वाली अधिकांश कालोनियां में इन दिनों लोगों को प्लाटों की रजिस्ट्री करवाने की समस्या से जूझना पड़ रहा है। क्षेत्र की नई ही नहीं पुरानी कालोनियां भी इसमें शामिल हैं। जब कोई व्यक्ति अपने प्लाट की रजिस्ट्री करवाने के लिए आनलाइन अप्वाइटमेंट लेता चाहता है तो उसे नहीं मिलती। दो वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन लोगों की यह समस्या हल नहीं हुई। अधिकारियों के पास जब वह जाते हैं तो तहसील के अधिकारी उन्हें इस बारे नगरपालिका में जाकर बात करने की बात कहते हैं। जबकि नपा अधिकारी उन्हें तहसील में भेज देते हैं। जिससे लोग नगरपालिका व तहसील के चक्कर लगाकर थक चुके हैं। 

आमजन से लेकर वसीका नवीस के कार्य भी बाधित

तहसील कार्य से जुड़े लोगों के मुताबिक रजिस्ट्रियां बंद होने से जहां आमजन को परेशानी हो रही है वहीं वसीका नवीस का कार्य भी कम हुआ है। पहले रादौर तहसील में होने वाले रजिस्ट्री के कार्य में करीब करीब 50 प्रतिशत रजिस्ट्री कार्य रादौर-छोटाबांस का होता था। लेकिन अब यह कार्य कम हो गया है। जिससे रजिस्ट्रीया लिखने वालो की आमदन भी आधी रह गई है। वहीं जिन लोगों को अपनी जरूरत के अनुसार प्लाट खरीदना था वह नहीं खरीद पा रहे है और जो लोग अपना प्लाट बेचना चाहते थे उनके प्लाट नहीं बिक पा रहे है। जिससे लोगों के कार्य रूके हुए है। अगर रजिस्ट्रीया खुलती है तो सरकार के राजस्व में भी इजाफा होगा और लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा।

आधी से भी कम रह गई नपा की आमदन

नपा के लेखाकार नीरज कांबोज ने बताया कि रजिस्ट्री रूकने से नपा को होने वाली आमदन आधी से भी कम रह गई है। वर्ष 2017-18 में नपा के पास करीब 50 लाख अस्टाम डयूटी से आए थे। जबकि 2018-19 में यह बढ़कर करीब 67 लाख 50 हजार रुपये हो गई थी। उसके बाद यह आमदन घटनी शुरू हुई। 2019-20 में यह 58 लाख रह गई। जबकि 2020-21 में उन्हें केवल 21 लाख रुपये की आमदन हुई। अप्रैल 2021 के बाद अब तक नपा को करीब 15 लाख रुपये की आमदन ही हुई है।

विधानसभा में विधायक उठा चुके है मुद्दा

नगरपालिका सचिव राकेश वालिया ने बताया कि यह मामला पूरे प्रदेश से जुड़ा है। रादौर विधायक बीएल सैनी ने भी यह मामला विधानसभा सत्र के दौरान उठाया था। इसलिए नपा के पास से भी संबंधित जानकारी मांगी गई थी। मामला सरकार के संज्ञान में है। उम्मीद है कि जल्द ही यह मामला सुलझ जाएगा, जिससे लोगों को राहत मिलेगी। रजिस्ट्रियां बंद होने से नगरपालिका को मिलने वाली अस्टाम ड्यटी व डव्लेपमेंट फीस में काफी गिरावट आई है। इससे मिलने वाली फीस से विकास कार्यो में मदद मिलती थी।

अधिकारी के अनुसार

पहले रादौर में पंचायत बनी हुई थी लेकिन 2016 में यहां पर नगरपालिका का गठन हुआ। जिसके बाद यहां पर बनी अधिकांश कालोनियां अवैध कालोनियों की सूची में शामिल हो गई। अवैध कालोनियों की आईडी पोर्टल पर जरनेट नहीं होती। जबकि रजिस्ट्री होने के लिए यह होना जरूरी है। मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में भी है। जिसकी प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि जल्द ही इस समस्या का हल हो जाएगा।

-----सुरेश कुमार, तहसीलदार।

Edited By Naveen Dalal

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