हरियाणा की सरस्वती नदी को पुर्नजीवित करने के लिए बनाया जा रहा डैम, हिमाचल ने भी दी जमीन

सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने के लिए आदिबद्री व हिमाचल प्रदेश की सीमा पर 88 एकड़ जमीन पर डैम बनाया जा रहा है। इसमें बरसात व पहाड़ों की तलहटी से आने वाले पानी को स्टोर किया जाएगा। आदिबद्री में सरस्वती नदी का उद्गम स्थल भी है।

Rajesh KumarPublish: Tue, 18 Jan 2022 04:17 PM (IST)Updated: Tue, 18 Jan 2022 04:17 PM (IST)
हरियाणा की सरस्वती नदी को पुर्नजीवित करने के लिए बनाया जा रहा डैम, हिमाचल ने भी दी जमीन

यमुनानगर, जागरण संवाददाता। सरस्वती नदी को पुर्नजीवित करने के लिए सरकार पूरी तरह से गंभीर है। 21 जनवरी को हरियाणा व हिमाचल प्रदेश के सीएम आदिबद्री में आ रहे हैं। इसके लिए तैयारियां जोरों से हो रही है। डैम के लिए एमआइयू पर हस्ताक्षर होने पर यहां होने वाले कामों में तेजी आएगी। साथ ही गांव रामपुर कांबोज के पास बनाए जाने वाले रिजरवायर में कार्य भी तेजी आएगी। जब यह कार्य पूरे हो जाएंगे तो इस क्षेत्र का विकास होगा। हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच के मुताबिक बहुत जल्द सरस्वती नदी में जल प्रवाहित होगा। इस दिशा में सरकार बहुत ही गंभीरता से कार्य कर रही है। इस कार्य में हमें लोगों का भी सहयोग मिल रहा है।

सात साल पहले खोदाई का कार्य शुरू हुआ था

सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व प्रांत संघ चालक दर्शन लाल जैन ने दो दशकों तक काफी संघर्ष किया। उसके बाद सरकार इस दिशा में गंभीर हुई। उनके प्रयास से ही वर्ष 2014 में विधानसभा अध्यक्ष कंवरपाल गुर्जर के अध्यक्षता में बिलासपुर उपमंडल के गांव रूलाहेडी में सरस्वती नदी के लिए खोदाई का कार्य शुरू किया। उनकी इस कठिन  मेहतन के कारण ही उनको सरकार ने पदम भूषण के सम्मान से नवाजा था। खोदाई करते हुए गांव मुगलावाली में सरस्वती नदी की जल धारा फूट गई थी। जिसके बाद यहां पर राज्य व केंद्रीय सरकार के कई मंत्री पूजा अर्चना के लिए पहुंचे थे। सीएम ने भी यहां पर आयोजित कार्यक्रम में कहा था कि सरस्वती को पुनर्जीवित करने में कोई कमी नही छोड़ी जाएगी।

आदिबद्री में डैम

योजना के तहत आदिबद्री व हिमाचल प्रदेश की सीमा पर 88 एकड़ जमीन पर डैम बनाया जा रहा है। इसमें बरसात व पहाड़ों की तलहटी से आने वाले पानी को स्टोर किया जाएगा। आदिबद्री में सरस्वती नदी का उद्गम स्थल भी है। आदिबद्री से सरस्वती नगर के ऊंचा चांदना तक खोदाई होती है। यह दो दर्जनों से ज्यादा गांव की जमीन से गुजरेगी। कुछ किसानों ने खुद ही अपनी जमीन सरस्वती के लिए देने की घोषणा की हुई है। पानी किसानों के लिए सिंचाई के काम भी आएगा। हर साल लाखों क्यूसेक पानी बर्बाद हो जाता है। डैम के निर्माण के बाद पानी बर्बाद नहीं होगा।  

350 एकड़ जमीन पर रिजरवाए बनाने की योजना

सरस्वती नदी के लिए बिलासपुर उपमंडल के गांव रामपुर कांबोज, रामपुरा हेडियान व छिलौर में 350 एकड़ जमीन पर रिजरवाए (इसमें बरसात का पानी एकत्र होगा।) बनाए जाने की तैयारी है। इसमें बरसात का पानी एकत्र किया जाएगा। इस पानी को जरूरत के हिसाब से सरस्वती नदी में छोड़ा जाएगा। इस स्थान पर पर्यटन के तौर भी विकसित करने की योजना है। पर्यटकों के लिए यहां पर सुविधाएं भी होगी।

Edited By Rajesh Kumar

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