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कोरोना वायरस के अलावा फेफड़ों में इंफेक्शन के हैं कई कारण, ऐसे करें बचाव

फेफड़ों में इंफेक्शन केवल कोरोना वायरस संक्रमण से ही नहीं होता। बदलता मौसम और पर्यावरण प्रदूषण भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। बदलते मौसम में खासकर बुजुर्गों का खास ध्यान रखने की जरूरत है। बाहर खाना खाने से परहेज करें।

Umesh KdhyaniThu, 10 Jun 2021 02:44 PM (IST)
कोरोना वायरस के अलावा फेफड़ों में इंफेक्शन के हैं कई कारण, ऐसे करें बचाव

अंबाला, जेएनएन। बिगड़ता पर्यावरण संतुलन इंसान की सेहत पर बुरा असर डालता है। ऐसे में बहुत सचेत रहने की आवश्यकता है। शुद्ध हवा में कमी आना, जिससे ब्रेन स्ट्रोक के अलावा अस्थमा, सांस की बीमारी होना और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। खासकर बुजुर्गों की सेहत की देखभाल करने में लापरवाही हुई तो स्थिति बिगड़ सकती है।

लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने वाले लोगों में फेफड़ों के जुड़े संक्रमण का खतरा अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों में संक्रमण बढ़ने का डर भी पैदा हो गया है। अगर बुजुर्गों ने मास्क लगाने में लापरवाही बरती तो ठंड के साथ बिगड़ा पर्यावरण ब्रेन स्ट्रोक जैसी घातक बीमारी को बुलावा दे सकता है। इसलिए घातक साबित होने वाले पर्यावरण के खतरे से उबरने के लिए घर के बाहर मास्क लगाना होगा।

फेफड़े में इंफेक्शन का खतरा

कोरोना वायरस कमजोर फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर सबसे पहले हमला करता है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने वाले लोगों में फेफड़ों के जुड़े इंफेक्शंस का खतरा अधिक बढ़ जाता है। कोरोना वायरस कमजोर फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर सबसे पहले हमला करता है। ऐसे में वायु प्रदूषण के कारण संक्रमण बढ़ने का डर भी पैदा हो गया है।

बीमारी वाले और सर्तक रहें

नागरिक अस्पताल के चिकित्सक डा. शुभ ज्योति प्रकाश बताते हैं कि बदलते मौसम और बिगड़ा पर्यावरण संतुलन बीमार लोगों के लिए और खतरा साबित हो सकता है। इसलिए बुजुर्गों को बाहर का खाना खाने से परहेज करना चाहिए। संतुलित आहार के साथ गर्म पानी पीना लाभकारी साबित होगा।

खट्टी व तले खाद्य पदार्थ से बनाएं दूरी

असंतुलित पर्यावरण का बुरा असर सीधे इंसान की स्वास्थ्य पर पर पड़ता है। इसमें खानपान पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। नागरिक अस्पताल के एमबीबीएस डा. रनवीर नाथ कहतें हैं कि खट्टे और रिफाइंड व तेल में तली हुई चीजों का कम से कम प्रयोग करना चाहिए। इससे गले में इंफेक्शन से शुरूआत होती है और यह फेफड़े और पाचन प्रक्रिया पर सीधा असर डालती है। इसलिए लोगों को और अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।

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