पर्यवेक्षकों के सामने ही भिड़े कांग्रेस नेता संजय अग्रवाल और महेंद्र कादियान

बैठक में दावेदार अपने बायोडाटा पर्यवेक्षकों को सौंप रहे थे। महेंद्र सिंह कादियान भी बायोडाटा सौंपने पहुंचे। पर्यवेक्षकों से उन्होंने कहा कि पार्टी जीतने वाले उम्मीदवारों को टिकट नहीं देती है।

JagranPublish: Thu, 25 Mar 2021 06:31 AM (IST)Updated: Thu, 25 Mar 2021 06:31 AM (IST)
पर्यवेक्षकों के सामने ही भिड़े कांग्रेस नेता संजय अग्रवाल और महेंद्र कादियान

जागरण संवाददाता, पानीपत : शहर और ग्रामीण जिलाध्यक्षों, ब्लाकों के अध्यक्षों के दावेदारों की सूची तैयार करने के लिए पर्यवेक्षक सुभाष गांधी, सह पर्यवेक्षक संदीप राणा ने सेक्टर-24 अग्रसेन भवन में नेताओं की बैठक ली। पर्यवेक्षकों के सामने ही बैठक में संजय अग्रवाल और महेंद्र सिंह के बीच जमकर बहस हुई।

बैठक में दावेदार अपने बायोडाटा पर्यवेक्षकों को सौंप रहे थे। महेंद्र सिंह कादियान भी बायोडाटा सौंपने पहुंचे। पर्यवेक्षकों से उन्होंने कहा कि पार्टी जीतने वाले उम्मीदवारों को टिकट नहीं देती है। वर्ष 2019 के चुनाव में शहर और पानीपत ग्रामीण सीट से वैश्य समाज के लोगों को टिकट दिया गया, बाकी जाति के नेताओं को नजरअंदाज कर दिया। कादियान की यह टिप्पणी संजय अग्रवाल को नागवार गुजरी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रूप से किसी जाति का नाम लेना उचित नहीं है। इसी बात को लेकर दोनों में जमकर बहस हुई। पर्यवेक्षकों ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों को शांत कराया।

बाद में सुभाष गांधी ने पत्रकारवार्ता में कहा कि जिलाध्यक्ष के लिए 11 नाम आ चुके हैं। अभी और दावेदार सामने आ सकते हैं। 27 मार्च तक यहां रहेंगे, ब्लाक अध्यक्ष पद के लिए भी सूची तैयार करनी है। शहर जिलाध्यक्ष के दावेदार

संजय अग्रवाल, विरेंद्र उर्फ बुल्लेशाह, नरेश अत्री, प्रेम सचदेवा और शशि लूथरा।

ग्रामीण जिलाध्यक्ष के लिए नाम

बिजेंद्र उर्फ बिल्लू कादियान, कर्ण सिंह कादियान, ओमवीर पंवार, जगदेव मलिक, संजय छौैक्कर और बलबीर रावल।

पूर्व जिलाध्यक्षों से की मुलाकात

पर्यवेक्षक ने बताया कि बुधवार को पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेश गुप्ता, धर्मपाल गुप्ता, जगदेव मलिक से बात की। इनके अलावा विरेंद्र उर्फ बुल्लेशाह सहित कई नेताओं से भी संगठन को मजबूत बनाने पर चर्चा हुई है।

पार्टी हाईकमान चुनेंगे ब्लॉक अध्यक्ष : इस बार ब्लॉक अध्यक्ष के नाम पर भी पार्टी हाईकमान सहित प्रदेश अध्यक्ष कुमारी सैलजा की मुहर लगेगी। कालांतर में जिलाध्यक्ष ही ब्लॉक अध्यक्ष चुनते थे। वह कई बार अपने चहेतों को ब्लॉक की जिम्मेदारी दे देते थे, इससे पार्टी को नुकसान उठाना पड़ता था।

Edited By Jagran

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