तीन गांवों में सेम की चपेट में आई सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद

मोहम्मद हारून हथीन क्षेत्र में सेम की समस्या किसानों का पीछा नहीं छोड़ रही है। तीन गांव म

JagranPublish: Fri, 21 Jan 2022 07:26 PM (IST)Updated: Fri, 21 Jan 2022 07:26 PM (IST)
तीन गांवों में सेम की चपेट में आई सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद

मोहम्मद हारून, हथीन: क्षेत्र में सेम की समस्या किसानों का पीछा नहीं छोड़ रही है। तीन गांव मीरपुर, बिघावली, दूरेंची में बोई गई सैकड़ों एकड़ रबी की फसल को सेम ने अपनी चपेट में लिया है। खेती पर लाखों रुपये लगा चुके किसान खेतों में भरे पानी से परेशान हैं। इसके कारण फसलें पीली पड़ने लगी है।

गुरुग्राम कैनाल से सटे आधा दर्जन गांवों की ज्यादातर भूमि सेम की चपेट में आई हुई है। बारिश के दिनों में यहां पर बारिश के कारण गांव मठेपुर, दूरेंची, छांयसा, बिघावली, मीरपुर, हुंचपुरी, महलूका, रणसीका, रीबड़, स्यारौली तथा कई अन्य गांवों में सेम के कारण उपजाऊ भूमि में सेम की समस्या और ज्यादा गहरा जाती है। यह सिलसिला कई सालों से चला आ रहा है। सेम प्रभावित गांवों बिघावली, मीरपुर, दूरेंची, छांयसा, मठेपुर व कई अन्य गांवों में जैसे-तैसे करके रबी की फसल के रूप में गेहूं की बोआई की गई थी। किसानों ने बोआई के दौरान खाद, बीज के रूप में लाखों रुपये खर्च किए हैं। लेकिन, अब गेहूं की फसल जैसे ही बढ़ने लगी है, उसी के साथ सेम ने फिर से खेतों में अपनी दस्तक दे दी है। पिछले दिनों बारिश से भी खेतों में पानी का इजाफा ही हुआ था।

सबसे ज्यादा सेम का प्रभाव फिलहाल मीरपुर, बिघावली, दूरेंची गांवों में दिखाई दे रहा है। ज्यादा पानी की वजह से खेतों में बोई गई गेहूं की फसल पीली पड़ने लगी है। हालांकि किसान कई बार खेत में बढ़े पानी की निकासी कर चुके हैं, लेकिन बार-बार यही समस्या दो चार दिन बाद फिर दिखाई देने लगती है, जिससे किसानों की नींद हराम हो चुकी है। किसानों को खेतों में लगी फसल से पानी निकालने में अच्छा खासा पैसा बर्बाद करना पड़ रहा है।

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सेम का प्रमुख कारण: गुरुग्राम कैनाल से सटे आसपास के गांवों के लोगों ने खेतों में मछली पालन के तालाब बनाए हुए हैं। ये तालाब जमीन को खोदने की बजाए जमीन के ऊपर मेंढ़ लगाकर बनाए गए हैं, जो नियमानुसार गलत हैं। जब तालाबों को भरा जाता है, तो मेंढ़ से ऊपर पानी होने के कारण आसपास की जमीन में रिसाव होता रहता है। इसी कारण सेम की समस्या बार-बार बनती है, जो कृषि करने वाले किसानों के लिए एक अभिशाप बनी हुई है। रही सही कसर पिछले दिनों बारिश ने पूरी कर दी।

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सेम के लिए किए गए थे दर्जनभर बोर: सेम प्रभावित मंढनाका, मंडकोला, स्यारौली व कई अन्य गांवों में सरकार ने पाइप लाइन योजना के तहत करीब एक दर्जन जमीनी बोर किए थे। ताकि सेम के पानी को जमीनी बोरों से निकाला जा सके, तथा किसान खेतों से पैदावार ले सकें। लेकिन, यह योजना सीमित क्षेत्र तक रही, जिसका दूसरे गांवों के किसानों का लाभ नहीं मिल सका है।

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बिघावली गांव के आसपास मछली पालन के तालाबों की वजह से उपजाऊ भूमि में सेम बढ़ा है। इसी कारण गेहूं की परवान चढ़ रही फसल खराब होने के कगार पर है।

-नैम सिंह, किसान बिघावली

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खेतों में लाखों रुपये की लागत लगाई थी। लेकिन, सेम ने अपनी दस्तक दे दी है, जिससे फसल गलने के कगार पर पहुंच चुकी है। पानी निकालकर तंग आ चुके हैं।

-हरी सिंह, किसान बिघावली

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गेहूं की लहलहाती फसलों में पिछले दिनों हुई बारिश व तालाबों के ओवर फ्लो पानी की वजह से सेम बढ़ा है। सारी फसल खराब होने लगी है। पानी की निकासी पर काफी पैसा बर्बाद कर दिया है।

-तौफिक , किसान निवासी मीरपुर

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-सिचाई विभाग की तरफ से सेम प्रभावित गांवों में बरसाती पानी की निकासी भी की गई थी। तालाबों को भरने वाले किसानों के इंजनों को भी गुरुग्राम कैनाल से बंद करा दिया है। कुछ जमीनी बोरों का प्रस्ताव भी भेजा गया है।

-रियाज अहमद, एसडीओ सिचाई विभाग

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सेम की समस्या वर्षों पुरानी है। इसके लिए कई जमीनी बोर कराए जा चुके हैं। अभी इनकी और आवश्यकता है। इसके लिए जहां जरूरत है, उसके लिए सरकार को प्रपोजल भिजवाएं गए हैं। मेरी प्राथमिकता है कि यह समस्या हल हो।

-प्रवीण डागर, विधायक हथीन

Edited By Jagran

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