रामपाल पोसवाल के जज्बे ने पूरे परिवार को दी देशभक्ति की प्रेरणा

अंकुर अग्निहोत्री पलवल गांव असावटा के रहने वाले स्वर्गीय रामपाल पोसवाल के परिवार को सैनिक

JagranPublish: Fri, 21 Jan 2022 07:21 PM (IST)Updated: Fri, 21 Jan 2022 07:21 PM (IST)
रामपाल पोसवाल के जज्बे ने पूरे परिवार को दी देशभक्ति की प्रेरणा

अंकुर अग्निहोत्री, पलवल: गांव असावटा के रहने वाले स्वर्गीय रामपाल पोसवाल के परिवार को सैनिकों वाला परिवार कहा जाता है। आज इस परिवार की तीसरी पीढ़ी सेना में रहकर देश की सेवा कर रही है। परिवार के सदस्य सेना में हवलदार से सूबेदार पद पर रहकर सरहद की रक्षा करते रहे हैं। देश सेवा का ऐसा जज्बा कि अन्य क्षेत्रों में आरामदायक नौकरी मिलने के बावजूद इस परिवार के बेटे सेना में सेवा को ही प्राथमिकता देते हैं।

स्वर्गीय रामपाल पोसवाल हवलदार थे। जनवरी, 1961 में वह सेना में भर्ती हुए थे। 1962 चीन-भारत, 1965 भारत-पाकिस्तान, 1971 भारत-पाक युद्ध में भाग लेकर उन्होंने दुश्मनों के छक्के छुड़ाने का काम किया था। 1976 में वह सेना से रिटायर हो गए थे। रामपाल के तीन पुत्र हैं।

बड़े बेटे श्यामवीर सेना में सूबेदार व रामवीर हवलदार के पद से रिटायर हो चुके हैं। सबसे छोटे बेटे ओमवीर फरीदाबाद स्थित एक निजी कंपनी में काम करते हैं। तीनों के सात बेटे हैं। सबकी शादी हो चुकी है। सात में से छह बेटे भारतीय सेना में देश की सेवा कर रहे हैं। श्यामवीर के तीनों बेटे धनवीर, मनवीर, दलवी सेना में हवलदार हैं। रामवीर के दो बेटे नरवीर नायक व उदयवीर सिपाही पद पर तैनात हैं। ओमवीर का एक बेटा चमनवीर हवलदार है और साथ ही कबड्डी के राष्ट्रीय खिलाड़ी भी हैं। वहीं दूसरा विजयवीर गुरुग्राम में एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है। पिता से मिला देश सेवा का जज्बा बड़े बेटे श्यामवीर बताते हैं कि पिता रामपाल में देश सेवा का जज्बा कूट-कूट कर भरा था। उनसे ही हमें भी सेना में जाने की प्रेरणा मिली। वह कहते थे कि जिदगी व मौत परमात्मा के हाथ में है। उनकी इच्छा थी कि पोसवाल परिवार की आने वाली पीढ़ी सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करती रहे। उन्हीं की इच्छा को हम आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। श्यामवीर कहते हैं कि सेना देश का ऐसा अंग है, जो कि भ्रष्टाचार मुक्त है। सैनिक अपनी जान की परवाह न करते हुए देश की रक्षा के लिए हर कुर्बानी देने के लिए तैयार रहते हैं। इसके लिए बेशक अपने प्राणों का बलिदान ही क्यों न देना पड़े। सेना की नौकरी में आराम कम और चिता अधिक होती है। एक सैनिक को हमेशा सतर्क रहना पड़ता है।

एक छत के नीचे रहता है 38 सदस्यों का यह परिवार

पोसवाल परिवार के साथ एक खास बात और जुड़ी है। इस परिवार की चार पीढि़यां एक छत के नीचे रहकर मिसाल पेश कर रही है। परिवार में 17 छोटे बड़े बच्चों सहित 38 सदस्य हैं। वहीं सबसे बुजुर्ग 85 वर्षीय बतासो देवी स्वर्गीय रामपाल पोसवाल की पत्नी परिवार की मुखिया है। इस परिवार का खाना आज भी एक चूल्हे पर बनता है।

Edited By Jagran

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