घोषणाओं के पिटारे में बंद नगीना का विकास

55 वर्षों के दौरान प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में न केवल क्रांति आई बल्कि जनता भी मुख्यधारा से जुड़ती चली गई। नगीना में उपतहसील मार्च 1994 को वजूद में आई लेकिन अभी तक इसे तहसील का दर्जा नहीं मिला।

JagranPublish: Sun, 07 Nov 2021 05:41 PM (IST)Updated: Sun, 07 Nov 2021 05:41 PM (IST)
घोषणाओं के पिटारे में बंद नगीना का विकास

शेरसिंह चांदोलिया, नगीना

55 वर्षों के दौरान प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में न केवल क्रांति आई बल्कि जनता भी मुख्यधारा से जुड़ती चली गई। नगीना में उपतहसील मार्च 1994 को वजूद में आई लेकिन अभी तक इसे तहसील का दर्जा नहीं मिला। क्षेत्र के गांव मांडीखेड़ा में दो अक्टूबर 1997 को बने अस्पताल को 300 बिस्तर में अपग्रेड नहीं किया गया है। वर्ष 1985 में बने विकास खंड को उपमंडल का दर्जा नहीं मिला है। यहां 1979 में नगरपालिका का गठन हुआ था, जिसे किसी कारणवश रद कर दिया गया। यह नगरपालिका आज नगीना के विकास में मील का पत्थर साबित होती।

16 मई 1960 को बने प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा अधूरा पड़ा है। नगीना 1993 में बने जवाहर नवोदय विद्यालय को 25 अक्टूबर 2008 को गांव बाई में स्थापित कर दिया गया। मेवात की राजधानी बड़कली चौक पर जाम से निजात नहीं मिल रही है। खूनी हाइवे 248ए पर सबसे अधिक मौतें होती हैं। दिल्ली मुंबई वडोदरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पर गांव मरोडा में नगीना पिनगवां स्टेट हाइवे पर कट नहीं मिलना भी नगीना क्षेत्र की तरक्की में रुकावट बना हुआ है। हालांकि संघर्षो की बदौलत स्कूली शिक्षा, सड़क और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बदलाव हुए हैं, जिनका श्रेय मेवात आरटीआइ मंच, गालिब मौजी खान फाउंडेशन व महिला संगठन जागो चलो और अन्य सामाजिक संगठनों को जाता है। ये सुविधाएं नहीं

फिरोजपुर झिरका, नूंह, पुन्हाना और तावडू को छोड़कर नगीना क्षेत्र में उपमंडल, तहसील, बस अड्डा, नगरपालिका, अनाज मंडी, अग्निशमन केंद्र, विश्राम गृह की सुविधा नहीं है।

उपतहसील के 68 गांवों की जनसंख्या पौने तीन लाख हो चुकी है। वहीं क्षेत्रफल, पटवार सर्किल और दूरी के हिसाब से नगीना क्षेत्र सभी मापदंड पूरा करता है। लेकिन आज तक अनदेखी ही रही। ग्राम पंचायतों में काफी विकास कार्य हुए लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य नहीं हुए। आम जनता को राहत कम मिली है। अधिकतर योजनाएं लाभार्थियों तक नहीं पहुंची।

- मुमताज अली, जिला पार्षद रीठट किसी भी पार्टी की सरकार रही हो, उसने महिलाओं के उद्धार के लिए कार्य नहीं किया। नगीना क्षेत्र में जो भी विकास योजनाएं आईं उनकी धारा दूसरी तरफ मोड़ दी गई। मौजूदा सरकार के सात साल बेमिसाल रहे लेकिन नगीना अनदेखी का शिकार रहा।

- सबीला जंग, प्रधान जागो चलो महिला मंच नगीना को मेवात की राजधानी माना जाता था, जिसकी पहचान धूमिल होती जा रही है। मेवात की तरक्की के लिए प्रयास जारी हैं। उम्मीद है आगामी समय में मेवात को गुरुग्राम की तर्ज पर देखा जाएगा।

- मामन खान इंजीनियर, विधायक फिरोजपुर झिरका नगीना में उपमंडल और सभी मांगे सरकार तक पहुंच चुकी हैं। उम्मीद है जजपा सरकार आने वाले समय में सभी मांगों को पूरा करेगी।

- जान मोहम्मद अटेरना, जजपा हल्का अध्यक्ष फिरोजपुर झिरका

Edited By Jagran

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