सिचाई या धुआं करके पाले से बचा सकते हैं फसलों को

तापमान में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। ठंड के साथ पाला पड़ने की भी संभावना बढ़ जाती है।

JagranPublish: Fri, 31 Dec 2021 04:25 PM (IST)Updated: Fri, 31 Dec 2021 04:25 PM (IST)
सिचाई या धुआं करके पाले से बचा सकते हैं फसलों को

जागरण संवाददाता, झज्जर : तापमान में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। ठंड के साथ पाला पड़ने की भी संभावना बढ़ जाती है। जिससे सीधा फसलों को नुकसान हो सकता है। इसलिए, ऐसे मौसम में किसानों को सावधानी बरतनी चाहिए। सावधानी बरतकर वे अपनी फसलों को भी बचा सकते हैं। बर्फबारी होने के कारण वर्तमान में सभी तरफ ठंड का असर दिखाई दे रहा है। रात का पारा लगातार गिर रहा है, यदि पारा चार डिग्री से नीचे जाता है तो शीत लहर व पाले की संभावना बनती है। फिलहाल न्यूनतम तापमान पांच डिग्री या इससे ऊपर ही बना हुआ है। साथ ही शाम को आसमान साफ हो, हवा बंद हो, तापमान कम हो तो सुबह पाला पड़ने की संभावना होती है। पाला पड़ने से रबी सीजन की फसलों में 20 से 70 प्रतिशत तक का नुकसान हो सकता है। बता दें कि पाले के प्रभाव से फल और फूल झड़ने लगते है। प्रभावित फसल का हरा रंग समाप्त हो जाता है। पत्तियों का रंग मिट्टी के रंग जैसा दिखता है। ऐसे में पौधों के पत्ते सड़ने से बैक्टीरिया जनित बीमारियों का प्रकोप अधिक बढ़ जाता है। पत्ती, फूल एवं फल सूख जाते है। फल के ऊपर धब्बे पड़ जाते हैं और स्वाद भी खराब हो जाता है। पाले से फल और सब्जियों में कीटों का प्रकोप भी बढ़ जाता है। सब्जियों पर पाले का प्रभाव अधिक होता है। कभी-कभी शत प्रतिशत सब्जी की फसल नष्ट हो जाती है। शीत ऋतु वाले पौधे दो डिग्री सेल्सियस तक का तापमान सहने में सक्षम होते है। इससे कम तापमान होने पर पौधे की बाहर व अंदर की कोशिकाओं में बर्फ जम जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक पाले से बचाव के लिए किसानों को सावधानी बरतनी होगी। जिस रात पाला पड़ने की संभावना हो, उस रात 12 से 2 बजे के आसपास खेत को ठंडी हवाओं से बचाने के लिए कूड़ा-कचरा, घास-फूस जलाकर धुआं करना चाहिए। पाला पड़ने की संभावना हो तब खेत में सिचाई करनी चाहिए। नमी युक्त जमीन में काफी देर तक गर्मी रहती है और भूमि का तापमान कम नहीं होता है, आधा से दो डिग्री तक तापमान बढ़ जाता है। पौधों को पुआल या पालीथीन शीट से ढंक दें, ध्यान रहे पौधों का दक्षिण-पूर्वी भाग खुला रहे। - क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र रईया झज्जर महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के तकनीकी सहायक अशोक सिवाच ने बताया कि किसान पाले से बचाव के लिए फसलों का ध्यान रखें। पाला पड़ता है तो फसलों की देखभाल जरूरी है, ताकि नुकसान होने से बचाया जा सके।

Edited By Jagran

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