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मिलिए सिरसा की जल योद्धा से, लगन ऐसी कि गांवों में एक बूंद पानी भी व्यर्थ नहीं जाता

सिरसा की सुनीता देवी जल योद्धा के रूप में काम कर रही हैं। 2018 में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग एवं जल स्वच्छता सहायक संगठन से जुड़ी थीं। तभी से जल बचत को ध्येय बनाया। तीन साल से गांव गांव जाकर पानी बचाने का संदेश दे रही हैं।

Umesh KdhyaniThu, 15 Apr 2021 08:31 PM (IST)
मिलिए सिरसा की जल योद्धा से, लगन ऐसी कि गांवों में एक बूंद पानी भी व्यर्थ नहीं जाता

सिरसा/रानियां, जेएनएन। सिरसा के रानियां खंड के गांव सुल्तानपुरिया की रहने वाली 26 वर्षीय सुनीता क्षेत्रवासियों को जल बचाने का संदेश दे रही हैं। पिछले तीन सालों से सुनीता सक्षम युवा के तौर पर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग सेवाएं दे रही हैं। गांव-गांव में जाकर लोगों को जल बचाने का संदेश देती है।

उनके प्रयासों से रानियां खंड के दर्जन भर से अधिक गांवों में जल बचत का प्रभावी संदेश गुंजायमान हुआ है। क्षेत्र के गांवों में कहीं भी टोंटियों से जल व्यर्थ बहता नहीं दिखाई देता। सुनीता का कहना है कि पानी प्रकृति की अनमोल सौगात है। वर्ष 2018 में जबसे वह जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग एवं जल स्वच्छता सहायक संगठन से जुड़ी तो उन्हाेंने जल बचत को अपने जीवन का ध्येय बनाया। पिछले तीन सालों से गांव गांव में जाकर लोगों को पानी बचाने का संदेश दे रही हैं।

खुली टोटियों पर लगवा चुकीं टैप

उन्होंने बताया कि रानियां खंड के गांव सुल्तानपुरियाा, धोतड़, बुखारा खेड़ा, खारिया, बंगी ढाणी, मंगालिया, फतेहपुरिया सहित आसपास के गांवों में लोगों के जल बचाने का संदेश दे चुकी हैं। गांव में विभाग द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के तहत उनके प्रयासों से बड़ी संख्या में खुली टोटियों पर टैप लगवा चुकी हैं। ग्रामीणों को शुद्ध व साफ पानी का महत्व बताने की जागरूकता मुहिम का असर भी साफ दिखाई देने लगा है। अब खंड के अधिकतर गांवों में स्वच्छ जल की आपूर्ति होती है। 

जल संरक्षण के लिए मिल चुका है सम्मान 

सुनीता देवी की मेहनत व लगन को देखते हुए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग एवं जल स्वच्छता सहायक संगठन सिरसा द्वारा उन्हें सर्वश्रेष्ठ जल संरक्षण पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा सुनीता को रानियां खंड की छह ग्राम पंचायतों द्वारा जल मित्र व जल योद्धा पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। जल संरक्षण के क्षेत्र में मिले सम्मान के बारे में सुनीता का कहना है कि वे स्वयं को गौरंवांवित महसूस करती है। जल प्रकृति का सबसे नायाब तोहफा है, इसे बचाने के लिए हम सबको मिलकर प्रयास करना होगा, तभी हमारा मिशन सार्थक होगा।

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