तीसरी लहर में वैरिएंट की टेस्टिंग नहीं होने से डॉक्टर असमंजस में, वे डेल्टा का इलाज कर रहे हैं या ओमिक्रोन का

ओमिक्रोन वैरिएंट की जांच के लिए दिल्ली सैम्पल भेजने पड़ते हैं मगर वहां से रिपोर्ट करीब 10 दिन में आती है। तब तक डॉक्टरों को पता ही नहीं होता कि वो डेल्टा वायरस संक्रमित मरीज का इलाज कर रहे हैं या फिर ओमिक्रोन संक्रमित का।

Manoj KumarPublish: Mon, 24 Jan 2022 10:00 AM (IST)Updated: Mon, 24 Jan 2022 10:00 AM (IST)
तीसरी लहर में वैरिएंट की टेस्टिंग नहीं होने से डॉक्टर असमंजस में, वे डेल्टा का इलाज कर रहे हैं या ओमिक्रोन का

जागरण संवाददाता, हिसार। तीसरी लहर में मिल रहे कोरोना के मामले ओमिक्रोन के है या डेल्टा वायरस के इस बारे में चिकित्सकों को भी नहीं पता। चिकित्सक भी असमंजस में है कि वे डेल्टा वायरस का उपचार कर रहे है या ओमिक्रोन का। गौरतलब है कि देश भर के ओमिक्रोन सैंपल की टेस्टिंग दिल्ली की लैब में की जाती है। दूसरी लहर के भयानक रूप के बाद जब डेल्टा के नए वेरिएंट की जांच ज़रूरी हो गयी तो दिल्ली सरकार ने अपनी दो लैब तैयार की थी।

इनमें से एक लैब सेंट्रल दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में जबकि दूसरी लैब साउथ दिल्ली के आईएलबीएस अस्पताल में बनाई गई है। देशभर के सैंपल यहां जमा होते है। लेकिन पूरे देश से सैंपल आने के कारण यहां लाखो सैंपल पेंडिंग पड़े हैं। इस कारण ओमिक्रोन की रिपोर्ट भी लेट पहुंच रही है।

गौरतलब है कि पहली लहर में कोविड-19 वायरस सामने आया था। इसके बाद दूसरी लहर में डेल्टा वायरस मिला था। तीसरी लहर में डेल्टा के ही ओमिक्रोन वैरिएंट के केस अफ्रीकी देशों में देखने को मिले हैं। वहीं अब इंग्लैंड में एक नया वैरिएंट और सामने आया है। लेकिन ओमिक्रोन की ही टेस्टिंग नहीं हो पा रही है तो नए वैरिएंट की टेस्टिंग कैसे होगी। चिकित्सकों को इस वायरस के बारे में स्तिथि क्लियर ना होने के कारण इसके उपचार संबंधी और यह किस तरह से करवट लेगा, इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है।

चिकित्सक सिर्फ केस के लक्षणों के आधार पर अंदाजा लगा रहे है। गौरतलब है कि कम टेस्टिंग के कारण हिसार में दो ओमिक्रोन के केस ही सामने आए थे। लेकिन विदेश से लौटे युवक युवती के ओमिक्रोन के सैंपल की रिपोर्ट भी सात दिन बाद आई थी। तब तक तो दोनों स्वस्थ भी हो चुके थे। चिकित्सक बताते है कि जब तक ओमिक्रोन की टेस्टिंग नहीं होगी, तब तक यह नहीं बताया जा सकता कि यह ओमिक्रोन के मामले हैं या डेल्टा के सिर्फ अंदाजा लगाया जा सकता है। क्योंकि अफ्रीकी देशों में देखने में आया है कि वहां ओमिक्रोन ने संक्रमण अधिक किया है। लेकिन इसके लक्षण हल्के है। गौरतलब है कि अब स्वास्थ्य विभाग नाक से स्वैब लेकर कोरोना की जांच करता हैं। कोरोना की पहली लहर में नाक और मुंह  दोनों से स्वैब लेकर जांच की जाती थी। लेकिन इसके बाद बहस छिड़ गई थी कि सैंपल मुंह से लिया जाना चाहिए। क्योंकि इसमें नाक से लिए जाने वाले सैंपल से पहले  पता लग जाता है।

वहीं अब शहर के सिविल अस्पताल में नाक से सैंपल लेकर कोरोना की जांच की जा रही है सिविल अस्पताल में अब प्रतिदिन  सुबह 9 से 5 बजे तक सैंपल लिए जाते है। हिसार में प्रतिदिन 2000 के करीब सैंपलिंग की जा रही है। अब  सेक्टर 1-4  में और अग्रोहा मेडिकल कालेज की लैब में सैंपलिंग की जांच होती है।

Edited By Manoj Kumar

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