पिछले सात साल से देश तीव्र गति से विकास के पथ पर अग्रसर : जेबीएस यादव

कारगिल युद्ध में विशेष भूमिका निभाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) जेबीएस यादव ने कहा कि पिछले साल सात से देश में विकास की गति तेज हुई है।

JagranPublish: Thu, 27 Jan 2022 05:18 PM (IST)Updated: Thu, 27 Jan 2022 05:53 PM (IST)
पिछले सात साल से देश तीव्र गति से विकास के पथ पर अग्रसर : जेबीएस यादव

जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: पंजाब से आतंकवाद के खात्मे, बांग्लादेश को आजाद कराने और कारगिल युद्ध में विशेष भूमिका निभाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) जेबीएस यादव ने कहा कि पिछले साल सात से देश में विकास की गति तेज हुई है। वह अपने 70 साल से अधिक के अनुभव के आधार पर पर यह कह सकते हैं कि इस समय देश में विकास की गति अत्यधिक है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1950 से 1960 तक देश का काफी विकास हुआ। 1960 से लेकर नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्री बनने से पहले तक देश के विकास की दर काफी सुस्त हो गई। इसके बाद नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से स्थिति में तेजी से बदलाव आया है। देश मजबूती से विकास के पथ पर अग्रसर हो रहा है।

लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) जेबीएस यादव ने यह बातें बुधवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर सेक्टर-23 स्थित स्विस काटेज स्कूल परिसर में दैनिक जागरण की ओर से आयोजित राष्ट्रगान देश का मान कार्यक्रम में कहीं। पांच साल से यह कार्यक्रम गुरुग्राम और एनसीआर में 26 जगहों पर आयोजित हो रहा है। वह यहां बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। जेबीएस यादव ने दैनिक जागरण के राष्ट्रगान देश का मान कार्यक्रम की सराहना की। कहा कि यह समाचार पत्र सदैव राष्ट्र और अपने सामाजिक सरोकारों के प्रति सजग रहता है। उन्होंने दैनिक जागरण के सात सरोकारों पर खरा उतरने वालों को सम्मानित किया। स्कूल के विद्यार्थियों ने शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश कर सभी का मन मोह लिया।

जेबीएस यादव ने कहा कि देश को आजादी दिलाने के लिए अनगिनत लोगों ने अपने प्राणों को न्योछावर किया। 1857 से 1947 के बीच बहुतों ने अपना खून बहाया है। आज देश बाह्य और आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहा है। चीन और पाकिस्तान कभी भी भारत को खुशहाल नहीं देखना चाहेंगे। अन्य देश भी नहीं चाहते कि भारत मजबूत हो। जेबीएस यादव ने कहा कि यदि आंतरिक चुनौतियों की बात की जाए तो इसमें जनसंख्या विस्फोट सबसे बड़ी समस्या है। यह सभी प्राकृतिक संसाधनों को निगलती जा रही है। इसके अलावा धर्म, भाषा, क्षेत्र आदि के नाम पर विवाद भी आंतरिक चुनौती है।

स्विस काटेज स्कूल के निदेशक अरुण डागर ने कहा इस तरह के कार्यक्रम भारतीय संस्कृति के प्रति विद्यार्थियों लगाव बढ़ाते हैं। प्रिसिपल नीना थिमाया ने कहा आगे भी इस तरह के आयोजन कराते रहेंगे। कार्यक्रम के आयोजन में राजहंस आटो के प्रबंध निदेशक जयपाल यादव का विशेष सहयोग रहा। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन से युवाओं को सीख मिलती है।

Edited By Jagran

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