झांसे में न आएं, स्वास्थ्य विभाग 'बूस्टर डोज' के लिए कभी फोन नहीं करता

बूस्टर डोज अभियान के साथ ही साइबर ठगों ने ठगी का नया तरीका अपना लिया है। ठग लोगों को फोन कर कोरोना ओमिक्रोन वैरिएंट से बचाव के लिए टीके का बूस्टर डोज लगवाने का झांसा दे रहे हैं।

JagranPublish: Mon, 17 Jan 2022 04:10 PM (IST)Updated: Mon, 17 Jan 2022 04:10 PM (IST)
झांसे में न आएं, स्वास्थ्य विभाग 'बूस्टर 
डोज' के लिए कभी फोन नहीं करता

जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: देश में 10 जनवरी से शुरू हुए बूस्टर डोज (सतर्कता डोज) अभियान के साथ ही साइबर ठगों ने ठगी का नया तरीका अपना लिया है। ठग लोगों को फोन कर कोरोना ओमिक्रोन वैरिएंट से बचाव के लिए टीके का बूस्टर डोज लगवाने का झांसा दे रहे हैं। पंजीकरण कराने के लिए मोबाइल पर ओटीपी भेजा जाता है। ओटीपी बताते ही खाते से पैसे निकाल लिए जाते हैं। ऐसे में सभी जिलावासियों को सतर्कता बरतने की जरूरत है। सिविल सर्जन ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा किसी के पास इस प्रकार की काल नहीं की जाती है।

यह जानकारी सिविल सर्जन डा. विरेंद्र यादव ने दी। डा. विरेंद्र यादव ने बताया कि कोरोना टीकाकरण के नाम पर चल रहे अभियान का फायदा साइबर फ्राड करने वाले भी उठा रहे हैं और लोगों को आर्थिक चपत लगाई जा रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल गुरुग्राम में अभी ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन फिर भी सभी को सतर्क रहने की जरूरत है।

सिविल सर्जन ने कहा कि साइबर ठग ईमेल के जरिए संदेश भेजकर कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रोन से बचाव के लिए बूस्टर डोज लगवाने की सलाह दे रहे हैं। बूस्टर डोज के लिए पंजीकरण का लिक भेजा जाता है। फिर उसमें डिटेल भरवाकर और ओटीपी शेयर करने को कहा जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे मामले देखने को मिल रहे हैं।

फोन करने वाले खुद को स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी बताते हैं। इसके बाद वह पूछते हैं कि आप को कोविड-19 की दूसरी डोज लगी है या नहीं। जैसे ही सामने वाला व्यक्ति दूसरी डोज की बात कहता है, इसके बाद बताया जाता है कि क्या आप ओमिक्रोन से बचने के लिए तीसरी डोज लगाने के इच्छुक हैं। हां का जवाब देते ही ठग द्वारा ओटीपी भेजा जाता है। ओटीपी बताते ही खाते से पैसे निकल जाते हैं।

Edited By Jagran

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