देश में पहली बार एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल और लुब्रिकेंट का ट्रायल शुरू

फरीदाबाद में एक्सट्रा ग्रीन डीजल से चलने वाली बसों का ट्रायल शुरू हुआ।

JagranPublish: Sat, 22 Jan 2022 07:51 PM (IST)Updated: Sat, 22 Jan 2022 07:51 PM (IST)
देश में पहली बार एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल 
और लुब्रिकेंट का ट्रायल शुरू

जागरण संवाददाता, फरीदाबाद : डीजल से चलने वाले वाहनों से उत्सर्जित कार्बन मोनोक्साइड, सल्फर, कैडमियम तथा नाइट्रोजन के आक्साइड पर्यावरण प्रदूषित करने का बड़ा कारण बनते हैं। इंडियन आयल अनुसंधान केंद्र ने एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल और कांबो लुब्रिकेंट के रूप में अपने नए अनुसंधान से देशभर में वायु प्रदूषण को कम करने की उम्मीद जगाई है। अनुसंधान केंद्र ने शनिवार को देश में पहली बार हरियाणा रोडवेज की 20 बसों में एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल डाल कर ट्रायल के रूप में इसकी शुरुआत कर दी है। प्रदेश के परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा ने एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल से चलने वाली बस को झंडी दिखाकर रवाना किया। करीब 40 हजार किलोमीटर का ट्रायल पूरा होने के बाद पूरे प्रदेश की हरियाणा रोडवेज की बसों में प्रयोग किया जाएगा।

इस अवसर पर परिवहन मंत्री ने कहा कि एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल और कांबो लुब्रिकेंट का प्रयोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सपनों को साकार करेगा। इंडियन आयल ने राष्ट्र हित में बेहतरीन कदम उठाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2070 तक कार्बन न्यूटन यानी नेट जीरो कार्बन इकनामी का लक्ष्य रखा है। इस अवसर पर इंडियन आयल के अधिकारी डा.दीपक सक्सेना, गंगाशंकर मिश्र, मुकुल महेश्वरी, महाप्रबंधक डा.पंकज भटनागर, सहायक प्रबंधक एचआर कमेलश गुप्ता मौजूद थे। इंडियन आयल के आरडी सेंटर के निदेशक डा.एसएसबी रामा कुमार ने बताया कि चूंकि उनका अनुसंधान केंद्र फरीदाबाद में ही है, इसलिए अपने शहर को ट्रायल केंद्र के रूप में चुनना बेहतर है।

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क्या है एक्सट्रा ग्रीन डीजल

इंडियन आयल के आरडी सेंटर के निदेशक डा.एसएसबी रामाकुमार के अनुसार आम डीजल क्रूड आयल से बनता है। एक्सट्रा ग्रीन डीजल में हमने अपने अनुसंधान केंद्र में विकसित किए गए इनोवेटिव केमिकल सब्सेंट्स (रासायनिक पदार्थ)का मिश्रण किया है। इसमें कोई टाक्सिक नहीं है, कोई मैटेलिक कंटेंट नहीं हैं। आम डीजल के प्रयोग से इंजन में कार्बन जम जाता है, जबकि ग्रीन डीजल कार्बन को साफ करने में मदद करेगा। इससे इंजन साफ सुथरा रहेगा, तो प्रदूषण कम होगा। डा.रामाकुमार के अनुसार ग्रीन डीजल के प्रयोग से 20 प्रतिशत प्रदूषण की कमी आएगी। इससे इंजन की क्षमता भी बढ़ेगी और माइलेज भी बढ़ेगा। एक लीटर आम डीजल में कोई गाड़ी अगर 15 किलोमीटर चलती है, तो ग्रीन डीजल से पांच प्रतिशत ज्यादा चलेगी। इस तरह पर्यावरण को भी फायदा होगा और गाड़ी मालिक का खर्च भी कम होगा। ग्रीन डीजल की कीमत कम या ज्यादा के सवाल पर डा.रामाकुमार ने कहा कि आम डीजल से इसकी कीमत मामूली रूप से ज्यादा होगी। उन्होंने बताया कि ट्रायल पूरा होने के बाद इसके परिणाम पर नजर डाली जाएगी और उसके बाद बोर्ड आफ डायरेक्टर्स की बैठक में हमारी देश के विभिन्न जिलों में स्थित रिफाइनरी से उपलब्धता सुनिश्चित करने को हरी झंडी मिलेगी। फरीदाबाद में रहता है सर्वाधिक प्रदूषण

औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में एक-दो महीने को छोड़कर बाकी महीने आमजन साफ हवा को तरसते रहते हैं। इस साल वायु प्रदूषण का पीएम 2.5 का स्तर देशभर में कई बार टाप पर रहा। यहां पीएम 2.5 का स्तर 450 तक पहुंच जाता है। पर्यावरणविद एडवोकेट पीके मित्तल के निश्चित रूप से इस तरह के अनुसंधान व वायु को कम प्रदूषित करने वाले ईंधन की जरूरत है। उम्मीद करते हैं कि इंडियन आयल के वैज्ञानिकों की अपेक्षा के अनुरूप परिणाम मिलेंगे।

Edited By Jagran

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