किसानों की पर्यावरण संतुलन के प्रति बढ़ी जागरूकता, नहीं जला रहे पराली

बवानीखेड़ा खंड के किसान धीरे-धीरे पर्यावरण संतुलन के प्रति जा

JagranPublish: Mon, 29 Nov 2021 07:53 PM (IST)Updated: Mon, 29 Nov 2021 07:53 PM (IST)
किसानों की पर्यावरण संतुलन के प्रति बढ़ी जागरूकता, नहीं जला रहे पराली

राजेश कादियान, बवानीखेड़ा : बवानीखेड़ा खंड के किसान धीरे-धीरे पर्यावरण संतुलन के प्रति जागरूक होने लगे हैं। अब तक क्षेत्र में 96 प्रतिशत धान की फसल की कटाई का कार्य पूर्ण हो चुका है। इस बार खेतों में अभी तक दो ही मामले पराली जलाने के सामने आए हैं। जबकि गत वर्ष 16 मामले पराली जलाने के सामने आए थे। इसके साथ-साथ किसान खेतों में पराली प्रबंधन के कार्य में भी जुट गए हैं। इस कड़ी में किसान स्ट्राबेलर मशीन से पराली की गांठे बनवाना शुरू किया है। ताकि खेतों में पराली जलाने की जरूरत ही महसूस न हो। हालांकि बवानीखेड़ा खण्ड में अभी तक किसी भी किसान के पास स्ट्ररा बेलर मशीन नहीं है। किसान बाहरी क्षेत्र से यह मशीन बुलाकर खेतों में पराली की गांठें बना रहे हैं। हालांकि मशीन वाले इसके बदले किसान को पैसे नहीं देते वे अपने स्तर पर ही पराली की गांठें बनाकर अपने साथ ले जा रहे हैं। इससे किसानों को खेतों में पराली नहीं जलानी पड़ती और उन्हें समय पर बिजाई के लिए जमीन तैयार करने में भी आसानी हो जाती है।

वहीं कृषि विभाग द्वारा जो किसान स्ट्रा बेलर मशीन से गांठ बनावकर पराली प्रबंधन का कार्य करता है उस किसान को कृषि विभाग प्रोत्साहन स्वरूप हजार रुपये प्रति एकड़ की राशि भी उपलब्ध करवा रहा है। हालांकि किसान द्वारा इस राशि का लाभ लेने के लिए कृषि विभाग की साइट पर आनलाइन आवेदन करना होता है। इतना ही नहीं स्ट्रा बेलर मशीन खरीदने के लिए कृषि विभाग व्यक्तिगत रूप से किसान को 50 प्रतिशत तथा 11 लोगों की कमेटी के गठन पर 80 प्रतिशत अनुदान दे रहा है। विभाग ने चलाया था जागरूकता अभियान

गांव भैणी के किसान प्रदीप ने बताया कि उसने सिरसा क्षेत्र से स्ट्रा बेलर की मशीन मंगवाकर गांठें बनवाई हैं ताकि पराली का उचित प्रबंधन हो सके। कृषि विभाग ने भी इस बार किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक किया। इस बारे में पंचायत, नंबरदार, ग्राम सचिव एवं मौजिज व्यक्तियों का सहरा लिया गया। इसी के चलते इस बार बवानीखेड़ा खंड में अभी तक दो ही पराली जलाने के मामले सामने आए हैं। बवानीखेड़ा खण्ड में करीब साढे़ छह हजार हैक्टेयर में धान की फसल की रोपाई की गई थी। अब तक 96 प्रतिशत किसानों ने धान की कटाई का कार्य पूरा कर लिया है। गत वर्ष 16 मामले आए थे सामने

खंड कृषि अधिकारी डा. शमशेर सिंह ढुल ने बताया कि क्षेत्र में इस बार पराली जलाने के मामलों में काफी कमी आई है। गत वर्ष पराली जलाने के 16 मामले सामने आए थे। जबकि इस बार दो ही मामले सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि यहां का किसान पर्यावरण संतुलन को लेकर जागरूक हो रहा है। हालांकि पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कृषि विभाग द्वारा कार्रवाई भी अमल में लाई गई है। दो किसानों पर पराली जलाने के मामले में करीब साढ़े सात हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

Edited By Jagran

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