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..देश रहूं या विदेश रहूं मैं, मेरी पहचान कराती है हिदी

कार्यक्रम में कृष्ण गोपाल विद्यार्थी कुमार राघव बिल्लू जट्ट अनिल भारतीय कौशल समीर व अशोक साहिल आदि कवियों ने भावपूर्ण काव्यपाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

JagranTue, 14 Sep 2021 09:00 PM (IST)
..देश रहूं या विदेश रहूं मैं, मेरी पहचान कराती है हिदी

बहादुरगढ़ (वि.) कलमवीर विचार मंच के तत्वाधान में हिदी दिवस पर पटेल पार्क स्थित मां देवकी कृष्ण व्यायामशाला में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृष्ण गोपाल विद्यार्थी, कुमार राघव, बिल्लू जट्ट, अनिल भारतीय, कौशल समीर व अशोक साहिल आदि कवियों ने भावपूर्ण काव्यपाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अनिल भारतीय द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से शुरू हुए कार्यक्रम में रचनाकारों ने हिदी के उत्थान व इसके महत्व को विषय बनाया हास्यपूर्ण प्रस्तुति से हंसाया भी। सभी को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में करनैल सिंह, धीरज कुमार, कृष्ण प्रजापति, प्रवीण कुमार, जोगेंद्र सिंह उपस्थित रहे। कृष्ण गोपाल विद्यार्थी की कविता यूं रही।

हिदी है मातृभूमि के श्रृंगार की तरह, धड़कन की तरह, प्यार के विस्तार की तरह

जब नाव राष्ट्रधर्म की संकट में घिरी हो, हिदी ही काम आती है पतवार की तरह

वहीं अनिल भारतीय ने हिदी के महत्व को यूं बयां किया।

हिदी से उजले हैं दिन और रातें, हिदी से चंदा और सूरज की बातें।

चांदी-सी रात कर, चांद की बात कर, बातें दिन-रात कर, हिदी में बात कर।

बिल्लू जट की पंक्तियां यू रही। मेरी बाकी उंगलियां उस उंगली से बहुत जलती हैं। जिस उंगली को पकड़ कर मेरी बिटिया चलती है। कभी कभी बाकी उंगलियां भी बहुत इठलाती हैं, जब वे भी मेरी बिटिया की मुट्ठी में आती हैं।

कुमार राधव की रचना थी..भारत मां के स्वप्न सलोने, जिनका अनुमान लगाती है हिदी।

देश रहूं या विदेश रहूं मैं, मेरी पहचान कराती है हिदी। वहीं कौशल समीर ने भावनाओं को रचना का रूप दिया।

यह देश हमारा है, हमें जान से प्यारा है। इस देश की किस्मत को हिदी ने संवारा है। वहीं अशोक साहिल की पंक्तियां यूं थी। किरणों के रथ पर होकर सवार आज, मुस्काती भोर मेरे द्वार चली आई है।

चंचल हवाएं भी गुनगुना रहीं हैं राग,डालियों पे कली मंद-मंद मुस्काई है।

Edited By Jagran

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