चुनावों को लेकर हरियाणा-पंजाब सीमा पर फोर्स तैनात, चेकिग जारी

पंजाब में फरवरी माह में होने वाले विधानसभा चुनावों के क्रम में लगाई गई धारा-144 प्रभावी होते ही हरियाणा पंजाब बार्डर पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) और पंजाब पुलिस की तैनाती कर पंजाब की सीमा में प्रवेश करने वाले वाहनों की सघन चेकिग की जा रही है।

JagranPublish: Thu, 20 Jan 2022 08:05 PM (IST)Updated: Thu, 20 Jan 2022 08:05 PM (IST)
चुनावों को लेकर हरियाणा-पंजाब सीमा पर फोर्स तैनात, चेकिग जारी

जागरण संवाददाता, अंबाला : पंजाब में फरवरी माह में होने वाले विधानसभा चुनावों के क्रम में लगाई गई धारा-144 प्रभावी होते ही हरियाणा पंजाब बार्डर पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) और पंजाब पुलिस की तैनाती कर पंजाब की सीमा में प्रवेश करने वाले वाहनों की सघन चेकिग की जा रही है। अंबाला के आसपास लगते पंजाब के गांव में चुनावों को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनैतिक समझ रखने वालों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

गौरतलब है कि पंजाब में धारा-144 लगा दी गई है। इसके चलते पूरे पंजाब में साफ-सुथरे और पारदर्शिता से परिपूर्ण चुनाव कराने संबंधी प्रक्रिया अपनाई जाने लगी है। हरियाणा से पंजाब सीमा में प्रवेश करने वाले वाहनों के जरिये शराब और अन्य अवैध पदार्थों की तस्करी रोके जाने के लिए आइटीबीपी और पंजाब पुलिस की टीम नियमित चेकिग कर रही है। जवानों ने बताया कि वाहन चालकों से आवश्यक नियमानुसार पूछताछ की जा रही है और गाड़ियों में किसी अवैध वस्तु को तो नहीं ले जाया जा रहा इस बात गहनता से जांच की जा रही है। वोटिग को लेकर चर्चाएं तेज, जन समस्याएं हैं केंद्र में

पंजाब की सीमा में प्रवेश के साथ ही हाईवे से करीब दो किलोमीटर दूर बसे गांव राजगढ़ में चुनावी माहौल का जायजा लेने के दौरान यहां के लोगों से बात की गई। ग्रामीणों ने दल विशेष पर ज्यादा कुछ कहने से बचते हुए जन सुविधाओं में विस्तार करने वाली पार्टी को विजय बनाने की बात कही। बताया कि गांव की आबादी करीब तीन हजार है जिसमें से 1000-1200 के करीब वोटर हैं। इन सुविधाओं की लंबे समय से की जा रही मांग

गांव में पांचवीं तक का ही स्कूल है जिसके कारण यहां के बच्चों को इससे आगे की पढ़ाई करने के लिए बाहर जाना पड़ता है। कम से कम आठवीं कक्षा तक का स्कूल की लंबे समय से मांग की जा रही है।

- जसवंत, ग्रामीण गांव में डिस्पेंसरी नहीं है और इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है, इससे बड़ी परेशानी होती है कई बार इस तरफ जिम्मेदार लोगों का ध्यान दिलाया गया है। लेकिन अभी तक व्यवस्था नहीं बनी है।

- जसवंत सिंह, ग्रामीण स्थानीय स्तर पर बस अड्डा होना चाहिए जिससे कि ग्रामीणों विशेषकर बुजुर्गाें को बस आदि पकड़ने के लिए हाईवे पर न जाना पड़े।

- गुरनाम सिंह, ग्रामीण

Edited By Jagran

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