गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले व‌र्ल्ड पाटीदार फेडरेशन बनाने की घोषणा

Gujarat Politicds पाटीदार राजनीति के दो दिग्गज सी के पटेल एवं नरेश पटेल व अन्य नेता वर्ल्ड पाटीदार फेडरेशन के गठन की तैयारी कर रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पाटीदार वैश्विक स्तर पर अपनी धमक दिखाना चाहते हैं।

Babita KashyapPublish: Thu, 30 Jun 2022 01:49 PM (IST)Updated: Thu, 30 Jun 2022 01:49 PM (IST)
गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले व‌र्ल्ड पाटीदार फेडरेशन बनाने की घोषणा

शत्रुघ्न शर्मा, अहमदाबाद। गुजरात में विधानसभा चुनाव से पहले ब्रांड पाटीदार को वैश्विक स्तर तक ले जाने के लिए गुजरात की दो सशक्त पाटीदार संस्थाओं के नेताओं ने एक बैठक कर वर्ल्ड पाटीदार फेडरेशन बनाने की घोषणा की। लेउवा व कडवा के बजाए अब पटेल समुदाय पाटीदार के रूप में अपनी एक पहचान बनाएगा।

खोडलधाम ट्रस्टी नरेश पटेल व उमियाधाम ट्रस्टी एवं नेशनल फैडरेशन आफ इंडियन अमेरिकन एसोसिएशन अध्यक्ष सी के पटेल सहित पाटीदार समाज के कई नेताओं ने गुरुवार को अहमदाबाद स्थित उमियाधाम में बैठक कर पटेल समाज को कडवा व लेउवा के बजाए पाटीदार के रूप में पहचान बनाने पर जोर दिया। गुजरात से लेकर दुनिया के विविध देशों में पटेल समाज की विविध संस्थाओं को एक अपील जारी कर वर्ल्ड पाटीदार फैडरेशन के बैनर तले आने का भी किया जाएगा। सी के पटेल करीब डेढ दशक पहले कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड चुके हैं जबकि नरेश पटेल पिछले कुछ माह तक गुजरात की राजनीति में सक्रिय होने की इच्छा रखते थे लेकिन समाज के वरिष्ठ लोगों की अनिच्छा को देखते हुए फिलहाल उन्होंने राजनीति का विचार टाल दिया है।

गौरतलब है कि राज्य में पहली बार बनी भाजपा की सरकार ने मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल ने राज्य की कमान संभालते हुए पाटीदार समाज को भी एक कुशल नेतृत्व दिया। ‌ उनसे पहले बाबू जसभाई पटेल, चिमन भाई पटेल जैसे दिग्गजों ने भी गैर भाजपाई सरकारों का नेतृत्व किया। केशुभाई के बाद उत्तरप्रदेश की राज्यपाल व पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल, केंद्रीय मंत्री परशोत्तम रुपाला, उपमुख्यमंत्री नितिन भाई पटेल, पूर्व उपमुख्य मंत्री नरहरी अमीन, सौरभ पटेल, कौशिक पटेल, विट्ठल रादडिया, नारण भाई पटेल, बाबू जमुनादास, आदि कई नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी के जरिए समाज में सरकार में अपनी एक अलग साख बनाई। विजय रुपाणी के मुख्यमंत्री पद से सितंबर 2021 में इस्तीफे के बाद एक बार फिर गुजरात के मुख्यमंत्री का पद पाटीदार समुदाय के नेता भूपेंद्र पटेल के खाते में आया।

पाटीदार नेता दिनेश बामणिया बताते हैं कि गुजरात से लेकर दुनिया के विविध देशों में बसे पाटीदार व इनकी संस्थाओं को एक मंच पर लाने का विचार लंबे समय से चल रहा था। समाज के दो दिग्गज सी के पटेल एवं नरेश पटेल ने पाटीदार समाज के नेताओं को साथ लेकर वर्ल्ड पाटीदार फेडरेशन के सपने को साकार करने का प्रयास शुरु किया है। दुनिया में ब्रांड पाटीदार की छवि को उभारने के साथ समाज की संस्था एवं लोगों को एक छत्र तले लाने का इसका प्रमुख उद्देश्य है। गुजरात में राजनीति, प्रशासन, कृषि, पशुपालन, रियल एस्टेट, सहकारी संस्था, होटल, रेस्टोरेंट्स सहित डायमंड, ऑटोमोबाइल, सिरामिक इंडस्ट्री आदि में पाटीदारों का खासा दबदबा है। अब ब्रांड पाटीदार समाज को एकसूत्र में पिरोने के साथ विश्व में एक पावर प्ले का भी रोल अदा करेगा।

पाटीदार राजनीति में पावर शेयरिंग

राजनीति के जानकार मानते हैं कि पाटीदार समुदाय एक बार फिर 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद अपने समुदाय के नेता को मुख्यमंत्री बनाने के लिए दबाव डाल सकता है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के रहते भाजपा ऐसे किसी दबाव के आगे झुकने वाली नहीं है लेकिन पाटीदार राजनीति में पावर शेयरिंग की स्थिति में रहना चाहते हैं। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति में काफी उठापटक होने की संभावना है ऐसे में पाटीदार समाज के कई और नए चेहरे भी सामने आएंगे।

दोनों ही नेता ओबीसी समुदाय से

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश ठाकुर एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं प्रदेश के दिग्गज नेता भरत सिंह सोलंकी दोनों ही नेता ओबीसी समुदाय से आते हैं, इसलिए मोटे तौर पर प्रदेश की राजनीति में ओबीसी बनाम पाटीदार का एक ध्रुवीकरण होता नजर आ रहा है। हालांकि कांग्रेस ने नेता विपक्ष के पद पर आदिवासी नेता सुखराम राठवा को बिठाकर आदिवासियों को अपने पक्ष में लेने की कोशिश की है लेकिन भाजपा भी आदिवासियों को रिझाने का पुरजोर प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2 मेगा रैली आदिवासी बहुल इलाकों में ही हुई है। कांग्रेस ने भी अपने पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की सभा आदिवासी क्षेत्र में ही की है।

Edited By Babita Kashyap

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