Love Hostel Movie Review: बेतरतीब 'स्पीड ब्रकरों' ने बिगाड़ी रोमांच की डगर पर 'डागर' की रफ्तार

बॉबी देओल ने फिल्म में प्रभावशाली काम किया है। हालांकि कमजोर एक्जीक्यूशन ने फिल्म की लय और रोमांच दोनों का कबाड़ा कर दिया है। एक वैचारिक रूप से मजबूत विषय पर बनी कमजोर फिल्म है लव हॉस्टल। हालांकि मुख्य कलाकारों के अभिनय ने इसे संभालकर रखा है।

Manoj VashisthPublish: Sat, 26 Feb 2022 12:35 AM (IST)Updated: Sat, 26 Feb 2022 07:19 AM (IST)
Love Hostel Movie Review: बेतरतीब 'स्पीड ब्रकरों' ने बिगाड़ी रोमांच की डगर पर 'डागर' की रफ्तार

मनोज वशिष्ठ, नई दिल्ली। लव हॉस्टल की कहानी हरियाणा के कस्बाई इलाके में स्थापित एक ऐसे समाज का प्रतिनिधित्व करती है, जिसमें सामाजिक मान्यताएं, सही या गलत से परे, पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थानांतरित होते हुए मन-मस्तिष्क में इतने गहरे तक धंस जाती हैं कि बालों की सफेदी और बच्चों का लाड़-प्यार भी इसे ओवरलैप नहीं कर पाता और इन मान्यताओं की खाई में डूबे इंसान के सामने जब जिंदगी कोई अप्रिय घटना लेकर आती है तो उससे एक 'डागर' पैदा होता है, जो फिल्म में बॉबी देओल का किरदार है।

लव हॉस्टल दो अलग मजहबों के प्रेमियों को लेकर ऐसी ही सामाजिक मान्यता और पूर्वाग्रह का खूनी चेहरा भी है, जहां रिश्ते-नाते, आपसी संबंध और बच्चों के लिए ममता तक दम तोड़ देती है। इस दिखावे के ढेर पर अगर कुछ बचता है तो वो अपने समाज में सिर नीचा ना होने का मिथ्या दंभ, जो बच्चों की बलि चढ़ाने से भी बाज नहीं आता। खाप के बीच अपना तमाशा ना बने, इसलिए उन बच्चों को तमाशा पूरी दुनिया में बना दिया जाए, जिन्हें कभी दुनिया की बुरी नजर से बचाने के लिए खुद ढाल बने रहे। एक बेहतरीन विचार से जन्मी कहानी लव हॉस्टल एक्जीक्यूशन के स्तर पर कमजोर नजर आती है। 

लव हॉस्टल रोमांच के हाइवे पर दौड़ती एक ऐसी कहानी है, जहां अचानक आने वाले स्पीड ब्रेकर रफ्तार का मजा किरकिरा करते रहते हैं। एक स्पीड ब्रेकर गुजरने के बाद एक शानदार सफर की उम्मीद जगती है, मगर कुछ दूर चलते ही फिर कोई स्पीड ब्रेकर आ जाता है और कहानी की गाड़ी डगमग होने लगती है। 

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इस गाड़ी को बीच-बीच में संभालने का काम बॉबी देओल के किरदार डागर ने किया है। एक निर्दयी और भाव शून्य हत्यारे के किरदार को बॉबी के चेहरे पर मेकअप की गाढ़ी परत और खिचड़ी दाढ़ी, बालों और पहनावे ने एक रहस्मयी गहराई दी है। ऐसे किरदारों में बॉबी को देखने के दर्शक आदी नहीं है और यही लव हॉस्टल का सबसे बड़ा आकर्षण हैं। 

लव हॉस्टल डागर, ज्योति दिलावर और अहमद शौकीन की कहानी है। ज्योति, अहमद से प्यार करती है और ऐन शादी के मौके पर उसके साथ भाग जाती है। ज्योति अपनी एक दोस्त और एक ईमानदार वकील की मदद से कोर्ट मैरिज कर लेते हैं। दोनों को घरवाले कोई नुकसान ना पहुंचा सकें, इसलिए मजिस्ट्रेट उन्हें तब तक के लिए सेफ हाउस में रखने का आदेश देते हैं, जब तक ज्योति के घरवाले अदालत में आकर इसकी पुष्टि नहीं करते कि वो उन्हें चोट नहीं पहुंचाएंगे। इसके लिए ज्योति के परिवार को एक हफ्ते का वक्त दिया जाता है। इस सेफ हाउस को ही लव हॉस्टल कहा गया है, क्योंकि अलग समुदाय या धर्म में शादी करने वाले जोड़ों को इधर ही भेजा जाता है। इनमें कुछ जोड़े ऐसे भी होते हैं, जिनके घर वालों ने पलटकर नहीं देखा। इसीलिए छह-छह महीनों से यह लव हॉस्टल ही उनका घर बना हुआ है।

अहमद की बैक स्टोरी भी है। वो कसाई का बेटा है और एक स्थानीय गुंडे देवी सिंह के लिए डिलीवरी ले जाने का काम करता है। दिलेर, देवी और अहमद का मध्यस्थ है। यह डिलीवरी हथियारों से लेकर ड्रग्स की भी हो सकती है। हालांकि, इसे साफ नहीं किया गया है। अहमद इस काम से दूर होना चाहता है, मगर देवी उसके पिता को अवैध हथियार रखने के जुर्म में फंसाकर जेल भिजवा देता है और डिलीवरी करने के लिए मजबूर कर देता है।अहमद आईपीएस ऑफिसर राठी की मदद से इस पचड़े में से निकलना चाहता है, मगर निकल नहीं पाता। 

खैर, लौटते हैं सेफ हाउस यानी लव हॉस्टल की तरफ। कोर्ट मैरेज के बाद अहमद और ज्योति सेफ हाउस में रहने लगते हैं। ज्योति की दादी कमला डागर को पकड़ने की जिम्मेदारी इन दोनों को देती है। डागर हिंदू-मुस्लिम शादियों को समाज की गंदगी मानता है और इसे साफ करना अपना फर्ज समझता है। डागर सेफ हाउस पहुंच जाता है और वहां अहमद को मारने की कोशिश करता है, मगर अहमद उस पर जवाबी हमला करता है और ज्योति के साथ भाग जाता है। डागर किसी बुरे सपने की तरह इनके पीछे पड़ जाता है। आईपीएस राठी अहमद की मदद करना चाहता है और कमला दिलावर को समझाने की कोशिश करता है, मगर कमला अपनी इज्जत की खातिर दोनों को मरवाने से भी संकोच नहीं करती। डागर की इस क्रूर मानसिकता के पीछे अतीत की एक घटना है, जिसके तार राठी के साथ उसकी दुश्मनी से भी जुड़े हैं। 

लव हॉस्टल की कहानी में कुछ ऐसी बातें भी हैं, जो आसानी से हजम नहीं होतीं। ज्योति ने सीए की पढ़ाई की है और दिल्ली की एक कम्पनी में आर्टिकलशिप की है, मगर उसके सोचने-समझने का तरीका बिलकुल ऐसा नहीं लगता कि वो सीए है। उसका बर्ताव, शारीरिक भाषा और प्रतिक्रिया जाहिर करने का तरीका बचकाना और भावनात्मक तौर पर अनियंत्रित है। अहमद के किरदार को गढ़ने में भी लेखकों की लाचारी जाहिर होती है। उसके चारित्रिक गुणों को देखते हुए ज्योति के साथ उसकी जोड़ी खुद में अजीब लगती है।

कुछ घटनाक्रम ऐसे दिखाये गये हैं, जो बेहद सतही लगते हैं। डागर दोनों की जान के पीछे पड़ा है, मगर ऐसी विकट परिस्थिति में भी ज्योति अहमद को जबरन अपने घर भेजती है, ताकि वो उसकी छोटी बहन को वहां से निकालकर ला सके, जिसकी शादी उसी दूल्हे से करवायी जा रही है, जिससे ज्योति की होने वाली थी। यह जानते हुए भी कि उसकी दादी अहमद के खून की प्यासी है, वो अहमद को इमोशनल करके भेज देती है। अहमद चला भी जाता है और ज्योति के पिता की मदद से छोटी बहन को निकाल लाता है। हालांकि, इसके बाद क्या होता है, वो यहां बताना ठीक नहीं। यह पूरा सीक्वेंस जिस तरह से दिखाया गया है, उस पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल लगता है। 

लव हॉस्टल की कहानी का दूसरा सबसे कमजोर पक्ष यह है कि यह पहले सीन से आखिरी सीन तक प्रेडिक्टेबल है, जिससे सस्पेंस पैदा करने के लिए गढ़े गये दृश्य भी असरहीन साबित होते हैं। गोली लगने के बाद डागर पशु अस्पताल जाता है, जहां से वो एक कुतिया को अपने साथ ले आता है। इस दृश्य का फिल्म के ओपनिंग दृश्य से गहरा संबंध है। अगर आप सस्पेंस फिल्मों के शौकीन हैं तो आपको यह अंदाजा लगाने में देर नहीं लगेगी कि डागर का कुतिया को गोद लेना कहानी को किस तरफ लेकर जा रहा है। डागर की बैक स्टोरी को थोड़ा कायदे से दिखाया जा सकता था, जो इस फिल्म में हो रही घटनाओं की बहुत बड़ी वजह है। डागर कागजों में मर चुका है। इलाके में लोग उसे पहचानते भी हैं, मगर फिर भी इस पर कहीं से कोई प्रतिक्रिया नहीं होती। 

लव हॉस्टल में अभिनय की बात करें तो बॉबी देओल ने डागर के किरदार को बेहतरीन ढंग से निभाया है। इस किरदार में उनकी भावशून्यता किरदार की अप्रत्याशितता और क्रूरता को उभारने का काम करती है। बॉबी एक भी दृश्य में किरदार की सीमाओं से बाहर नहीं निकले हैं। विक्रांत मैसी और सान्या मल्होत्रा ठीकठाक हैं। दोनों ही अच्छे कलाकार हैं। उनकी क्षमताओं को देखते हुए ये किरदार निभाना उनके लिए चुनौती नहीं रही होगी। आईपीएस ऑफिसर के किरदार में राज अर्जुन प्रभावशाली हैं, मगर कहानी जिस तरह अंजाम तक पहुंचती है, उसमें राज के पास ज्यादा सम्भावनाएं नहीं थीं। कमला दिलावर के किरदार में स्वरूपा घोष रौबदार लगी हैं। लव हॉस्टल बॉबी, विक्रांत और सान्या के लिए देखी जा सकती है। हालांकि, वैचारिक तौर पर इतना संगीन विषय होने के बावजूद लव हॉस्टल असर नहीं छोड़ती, मगर तीनों मुख्य किरदारों के अभिनय के लिए देखी जा सकती है, जो इसका सबल पक्ष है

कलाकार- बॉबी देओल, विक्रांत मैसी, सान्या मल्होत्रा, राज अर्जुन, स्वरूपा घोष आदि।

निर्देशक- शंकर रमन

निर्माता- गौरी खान

रेटिंग- **1/2 

Edited By Manoj Vashisth

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