Dhamaka Movie Review: कार्तिक आर्यन के संजीदा अभिनय के बीच अतिरंजना के धमाके, पढ़ें पूरा रिव्यू

Dhamaka Movie Review कार्तिक आर्यन की धमाका शुक्रवार को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो चुकी है। फिल्म की रफ्तार तेज है। घटनाक्रम सांस नहीं लेने देते मगर पटकथा के लिहाज से फिल्म शिथिल है जिसके प्लॉट में कई ढीले सिरे छोड़ दिये गये हैं।

Manoj VashisthPublish: Fri, 19 Nov 2021 05:45 PM (IST)Updated: Sat, 20 Nov 2021 07:56 AM (IST)
Dhamaka Movie Review: कार्तिक आर्यन के संजीदा अभिनय के बीच अतिरंजना के धमाके, पढ़ें पूरा रिव्यू

मनोज वशिष्ठ, नई दिल्ली। बांद्रा सी-लिंक को एक मजदूर से आतंकवादी बने शख्स ने बम से उड़ा दिया है। ब्रिज गिरने वाला है और कई लोगों की जान जोखिम में है। आतंकी अवॉर्ड विजेता पूर्व प्राइम टाइम न्यूज एंकर के जरिए अतीत में मजदूरों के साथ हुई एक ज्यादती के लिए सरकार के मंत्री से ऑन-एयर माफी की मांग कर रहा है। माफी के बिना वो ब्रिज पर रेस्क्यू ऑपरेशन भी नहीं करने दे रहा है। 

न्यूज रूम में पुलिस अधिकारी आतंकी की लोकेशन पता करने के लिए न्यूज एंकर से उसे उलझाने के लिए कहता है, मगर शो की रेटिंग के लिए चैनल हेड कहती है कि आतंकी से मना कर दो मंत्री जी माफी मांगने स्टूडियो में नहीं आएंगे। इतना ही नहीं, इस बेहद संवेदनशील और नाजुक स्थिति में चैनल हेड अपने मोबाइल फोन पर बार-बार रेटिंग देख रही है... अभी 50 हुई... अभी 70 हुई।

अब इस दृश्य पर ताली बजाए जाए या जज्बाती हुआ जाए। यह आप तय कीजिए, मगर निर्देशक राम माधवानी की धमाका ऐसे कई अविश्वसनीय दृश्यों से भरी पड़ी है, जो एक संजीदा और संवेनदशील विषय पर बनी फिल्म की धज्जियां उड़ा देते हैं।

धमाका शुक्रवार को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो चुकी है। फिल्म की रफ्तार तेज है। घटनाक्रम सांस नहीं लेने देते, मगर पटकथा के लिहाज से फिल्म शिथिल है, जिसके प्लॉट में कई सिरे ढीले छोड़ दिये गये हैं। मीडिया में रिपोर्ट्स आयी थीं कि कार्तिक आर्यन ने पैनडेमिक के बीच इस फिल्म की शूटिंग सिर्फ 10 दिनों में पूरी कर ली थी। अब 10 दिनों में इससे ज्यादा की उम्मीद और क्या की जा सकती है?

अर्जुन पाठक टीआर टीवी नाम के चैनल में एक अवॉर्ड विनिंग प्राइम टाइम एंकर था, जिसे एक गलती की वजह से टीवी से हटाकर रेडियो में शिफ्ट कर दिया जाता है। उसी गलती की वजह से पत्नी सौम्या मेहरा पाठक से उसकी शादी टूटने की कगार पर है। रेडियो शो के दौरान अर्जुन के पास एक कॉल आता है। कॉलर रघुबीर महाता खुद उससे कहता है कि उसने बांद्रा सी-लिंक पर एक बम लगा दिया है। मगर, अर्जुन इसे प्रैंक काल कहकर फोन काट देता है। तभी सी-लिंक पर धमाका होता है।

अर्जुन को उसकी बात पर यकीन करता है। रघुबीर उसे 15 मिनट बाद फोन करने के लिए कहता है। अर्जुन इस आपदा में अवसर देखता है और पुलिस को खबर देने के बजाए अपनी बॉस से एक्सक्लूसिव खबर के बदले प्राइम टाइम शो भरोसा 24x7 में वापसी के लिए सौदेबाजी करता है, क्योंकि कॉलर सिर्फ उसी से बात करना चाहता है। इसकी वजह का खुलासा फिल्म में आगे चलकर किया जाता है।

टीआरपी को जीवन का अंतिम सत्य मानने वाली चैनल हेड अंकिता अर्जुन की शर्त मान लेती है और फिर शुरू होता है एक ऐसा खेल, जिसमें ना कोई हीरो है ना कोई विलेन। रघुबीर की बातों से पता चलता है कि सी-लिंक पर कुछ साल पहले सरकारी लापरवाही के चलते एक हादसे में तीन मजदूरों की जान चली गयी थी। बिना किसी मदद के मजदूरों के परिवारों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया था। इस खबर को दबाने में मीडिया ने भी अहम भूमिका निभायी थी।

रघुबीर इस घटना के जिम्मेदार मंत्री पाटिल से स्टूडियो में आकर ऑन एयर माफी मांगने की मांग रखता है। अगर यह मांग पूरी नहीं हुई तो वो सी-लिंक पर और धमाके करेगा। रघुबीर के धमाके टीआर टीवी के न्यूज रूम तक भी पहुंच जाते हैं और एक एंकर घायल हो जाती है। वहीं, मंत्री की जगह आये उसके डिप्टी माथुर की मौत हो जाती है।

अर्जुन की पत्नी सौम्या सी-लिंक पर इस घटना की रिपोर्टिंग कर रही है। दूसरे लोगों के साथ उसकी जान भी फंसी हुई है। क्या मंत्री ऑन एयर आकर माफी मांगता है? सी-लिंक पर फंसे लोगों की जान क्या बच पाती है? क्या रघुबीर पकड़ा जाता है या मार दिया जाता है? क्या अर्जुन, सौम्या के साथ अपनी शादी बचा पाता है? टीआरपी की जीत होती है या मानवीय संवेदनाओं की? इन सारे सवालों के जवाबों के लिए आप फिल्म देखिए।

मौजूदा दौर में ब्रॉडकास्ट न्यूज मीडिया की विश्वसनीयता को लेकर अक्सर बहस छिड़ती है और मुद्दों से अधिक ड्रामा दिखाये जाने के आरोप लगते हैं, उस लिहाज से धमाका की कहानी और इसे दिखाने की मंशा की तारीफ करनी होगी, मगर जब बात आती है इस पटकथा के जरिए एक्जीक्यूशन की तो फिल्म फिसलती नजर आती है। कुछ दृश्य अधपके तो कुछ अतिरंजित लगते हैं। 

टीवी स्टूडियो में मंत्री के डिप्टी की धमाके से मौत हो जाती है, मगर इतनी बड़ी घटना के बाद कहीं कोई हलचल नजर नहीं आती। आतंकी इतना शातिर है कि एंकर और गेस्ट के ईयरपीस में बम लगा देता है। फिल्म के क्लाइमैक्स में जिस बिल्डिंग में आतंकी को पकड़ने के लिए सुरक्षा बल जाता है, वो उसे भी उड़ा देता है। पुलिस उसकी लोकेशन पता नहीं कर पाती। मगर, इतनी बड़ी साजिश को बेहद हलके में निपटा दिया जाता है। इतनी बड़ी आतंकी घटना शहर में हुई है, मगर पुलिस न्यूज रूम के अंदर चैनल हेड से बहस कर रही है कि शो में क्या दिखायें और क्या नहीं? इसके अलावा उसके पास कोई रास्ता नहीं है। 

ब्राॉडकास्ट मीडिया की कार्यशैली दिखाने में भी संजीदगी की कमी नजर आती है। जब अर्जुन पाठक पर साजिश में शामिल होने के आरोप लगते हैं तो प्रतिद्वंद्वी चैनल का एंकर अपने स्टूडियो में बैठे-बैठे अर्जुन से सवाल करता है और इधर अर्जुन अपने स्टूडियो से जवाब दे रहा होता है। यहां समझ यह नहीं आता कि टीआरपी किसकी बढ़ रही है! सिस्टम के सताये एक आम आदमी की कसमसाहट पर हम नीरज पांडेय की अ वेडनेसडे भी देख चुके हैं, मगर धमाका दर्शक को उस तरह झिंझोड़ती नहीं। यह फिल्म ब्रॉडकास्ट मीडिया में टीआरपी के लिए असली खबर से समझौता करने की चिंता को तो दिखाती है, मगर अतिरंजित दृश्य गंभीरता को कम कर देते हैं। 

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अदाकारी की बात करें तो यह सीमित कलाकारों वाली फिल्म है। अर्जुन पाठक के किरदार की सीमाओं में कार्तिक आर्यन ने अच्छा काम किया है। क्रेडिट रोल के मोंटाज में मृणाल के साथ उनकी कैमिस्ट्री वास्तविक और अच्छी लगती है। हालांकि, इसके बाद दोनों साथ नहीं आते। कॉल आने के बाद अर्जुन जिस तरह से इसे भुनाने की तैयारी करता है, वो दृश्य दिलचस्प लगते हैं और फिल्म को सधी हुई शुरुआत देते हैं।

ग्राउंड जीरो रिपोर्टिंग में यकीन करने वाली टीवी पत्रकार सौम्या के किरदार में मृणाल ठाकुर प्रभावित करती हैं। टीवी रेटिंग के लिए किसी भी हद तक जाने वाली शातिर और भावहीन चैनल हेड अंकिता मालस्कर के किरदार में अमृता सुभाष उग्रता परेशान करने वाली है और यही उनकी अदाकारी की जीत है। दृश्यों को रफ्तार देने में बैकग्राउंड म्यूजिक का अच्छा योगदान है। वैसे धमाका कोरियन फिल्म द टेरर लाइव का आधिकारिक रीमेक है।  वीकेंड में कहीं बाहर जाने का प्रोग्राम नहीं है तो धमाका एक बार देखी जा सकती है। 

कलाकार- कार्तिक आर्यन, मृणाल ठाकुर, अमृता सुभाष, विकास कुमार, विश्वजीत प्रधान आदि।

निर्देशक- राम माधवानी

निर्माता- रॉनी स्क्रूवाला, राम माधवानी।

लेखक- राम माधवानी, पुनीत शर्मा।

अवधि- 1 घंटा 44 मिनट

रेटिंग- **1/2 (ढाई स्टार)

Edited By Manoj Vashisth

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