UP Assembly Elections 2022: राजनीतिक दलों को अपने एजेंडे में राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी रखना चाहिए

UP Assembly Elections 2022 राजनीतिक दल इस मुद्दे को न भी उठाएं तो जनता को स्वयं इस मसले पर सवाल करना चाहिए। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि किसी अन्य देश से लगती सीमा की अपनी चुनौतियां होती हैं।

Sanjay PokhriyalPublish: Mon, 31 Jan 2022 03:05 PM (IST)Updated: Mon, 31 Jan 2022 03:07 PM (IST)
UP Assembly Elections 2022: राजनीतिक दलों को अपने एजेंडे में राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी रखना चाहिए

बद्री नारायण। उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा जैसे पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं। चुनावों में इन राज्यों की जनता के जीवन की सच्चाइयों, इनके सरोकारों का एवं राज्य के विकास के संदर्भ में किए गए कार्यों के लेखा-जोखा के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा को एक मुद्दे के रूप में उभारना हमारे जनतंत्र को एक ‘सजग एवं सतर्क जनतंत्र’ बनाने में मददगार होगा। इसी से एक सजग एवं सतर्क राष्ट्र का निर्माण संभव है। जो राज्य अन्य देशों की सीमाओं से जुड़े हैं, वहां राज्य सरकारें अपने सीमाई क्षेत्रों की प्रथम प्रहरी होती हैं। ‘सजग एवं सतर्क’ राज्य सरकारें ही राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में देश को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा पाएंगी। ऐसे सीमाई राज्यों में चुनावों के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलुओं को लेकर भी लोगों का जागरूक किया जाना चाहिए। साथ ही राजनीतिक दलों को अपने एजेंडे में राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी रखना चाहिए।

राष्ट्रीय अस्मिता का भाव तो हर नागरिक का आत्म भाव होना ही चाहिए। साथ ही जनतांत्रिक सरकारों में भी यह भाव परिलक्षित होना चाहिए। ऐसे में एक प्रश्न उठता है कि हमारे जीवन की बुनियादी जरूरतों एवं राष्ट्रीय अस्मिता के बीच क्या संबंध है? मेरे विचार में हमारी बुनियादी जरूरतों और अस्मिता भाव के बीच एक गहरा संबंध है। असल में बुनियादी जरूरतों की पूर्ति या कमी से वह परिदृश्य बनता है, जिसमें जाति, क्षेत्र या राष्ट्र से संबंधित हमारा अस्मिता भाव प्रभावित होता है। हमें यह समझना ही होगा कि चुनाव में राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा प्रभावी तरीके से उठाना राज्य एवं देश के हित में है। अभी तक के अभियानों में किसी भी राज्य में कोई दल सीमाओं की सुरक्षा को बहुत गंभीर मुद्दा मानता नहीं दिख रहा है।

वस्तुत: यदि राजनीतिक दल इस मुद्दे को न भी उठाएं, तो जनता को स्वयं इस मसले पर सवाल करना चाहिए। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि किसी अन्य देश से लगती सीमा की अपनी चुनौतियां होती हैं। यदि राज्य सरकार के स्तर पर इसकी अनदेखी कर दी जाए, तो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। उत्तर प्रदेश के कुछ इलाके नेपाल की सीमा से लगते हैं। इस सीमा से कई बार आपराधिक तत्वों को पकड़े जाने की खबरें मिलती हैं। नेपाल के साथ सीमा पर नियमों का लचीलापन कई बार यहां के अपराधियों को भागने में भी मदद करता है। ऐसे में राज्य के स्तर पर मुस्तैदी बहुत जरूरी है। यह देखना सुखद होगा यदि राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपने एजेंडे में लाएं और जनता भी इनकी गंभीरता को समङो।

[निदेशक, जीबी पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, प्रयागराज]

Edited By Sanjay Pokhriyal

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept