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करनाल

करनाल लोकसभा सीट दिग्गजों की हार के लिए पहचान रखती है। यही वह सीट है जहां पर राजनीति के पीएचडी माने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल को हार का सामना करना पड़ा था। इस हार के बाद से ही उनकी राजनीति की पीएचडी खत्म हो गई थी। भाजपा की दिग्गज नेत्री सुषमा स्वराज करनाल से एक अदद जीत के लिए तरस गई थी। करनाल सीट को ब्राह्मण सीट के तौर पर पहचाना जाता है। लेकिन पिछले चुनाव में यह मिथ टूटा था और यहां से भाजपा प्रत्याशी अश्विनी कुमार चोपड़ा को जीत मिली थी। साल 2014 में मोदी लहर में करनाल से भाजपा के अश्विनी चोपड़ा ने शानदार तरीके से जीत हासिल की थी. अश्विनी कुमार ने यहां से दो बार लगातार कांग्रेस से सांसद रहे डॉ. अरविंद शर्मा को 3,60,147 वोटों से हराया था। भाजपा से अश्विनी कुमार को कुल 5,94,817 वोट मिले, जबकि अरविंद शर्मा को 2,34,670 वोट पड़े थे। करनाल सीट पर कांग्रेस का वर्चस्व रहा है। 1951 से अब तक कांग्रेस नौ बार यहां से चुनाव जीती है। तीन बार भाजपा ने जीत दर्ज की है।

करनाल लोकसभा में नौ विधानसभा सीट शामिल हैं

करनाल लोकसभा क्षेत्र में कुल 9 विधानसभा सीटें हैं। करनाल व पानीपत जिले के मतदाता करनाल लोकसभा सीट के तहत ही आते हैं। नीलोखेड़ी, इंद्री, करनाल, घरौंडा, असंध, पानीपत ग्रामीण, पानीपत सिटी, इसराना और समालखा विधानसभा इस लोकसभा में शामिल हैं। 2014 के चुनाव में यहां कुल 12,64,907 वोटर थे।

सांसद का रिपोर्ट कार्ड

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 62 साल के अश्विनी चोपड़ा ने 16वीं लोकसभा में करनाल से चुने जाने के बाद संसद में अब तक 5 मुद्दों पर चर्चा के दौरान भाग लिया है। सांसद ने कुल 332 सवाले पूछे। चोपड़ा ने करनाल संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाले करनाल व पानीपत जिले में से अपने संसदीय क्षेत्र में 517 कार्य करवाने की अनुशंसा की। इनमें से 471 कार्य मंजूर हुए। इन कार्यों में 371 कार्य पूरे हो चुके हैं। 87 पर कार्य चल रहा है। विकास कार्यों को लेकर 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की एमपी ग्रांट एडीसी कार्यालय में पहुंच चुकी है। इस राशि के अधिकांश हिस्से को विकास कार्यों पर खर्च किया जा चुका है।

इतिहास के झरोखे से

करनाल लोकसभा सीट के तहत आने वाले करनाल व पानीपत जिला देश के इतिहास में अहम स्थान रखते हैं। पानीपत की धरती पर हुए तीन युद्ध भारतीय इतिहास में अमिट हैं। मोहम्मद गौरी व पृथ्वी राज चौहान के बीच में तरावड़ी में लड़ाई हुई थी। यहां आज भी पृथ्वी राज चौहान का किला है। करनाल जिले के कई गांव कुरुक्षेत्र की 48 कोस की जमीन के दायरे में आते हैं। करनाल में कई बड़ी फैक्ट्रियां हैं, जिसमें कृषि उपकरण, राइस शैलर, वनस्पति, तेल व दवाइयां तैयार की जाती हैं। पानीपत का हैंडलूम उद्योग विश्व स्तर पर अपनी पहचान रखता है। पर्यटक के लिहाज से कर्ण लेक, कलंदर शाह, छावनी चर्च और सीता माई मंदिर खास हैं।


ये दिग्गज हारे

भजनलाल को अपने जीवन में पहली बार 1999 में हार का यहीं पर मुंह देखना पड़ा। भाजपा की सुषमा स्वराज 3 बार 1980, 1984 और 1989 में हारी। चार दफा करनाल से जीत दर्ज करने वाले पंडित चिरंजी लाल  अंतिम चुनाव यहां से 1996 में हार गए।

करनाल लोकसभा क्षेत्र के मुद्दे

1. करनाल नेवल हवाई पट्टी को घरेलू हवाई अड्डे के रूप में विकसित करना। पिछले लोकसभा चुनाव में भी यह मुद्दा उठा था। उस समय भाजपा ने वादा किया था कि करनाल में हवाई अड्डा बनाया जाएगा। लेकिन यह मुद्दा जस का तस बना हुआ है।
2. करनाल में फार्मा हब बनाना। रोजगार व करनाल के विकास की दृष्टि से सीएम मनोहर लाल ने लोगों से वादा किया था कि करनाल को फार्मा हब बनाया जाएगा। इसके लिए जमीन भी तलाश की गई, लेकिन अभी भी यह प्रोजेक्ट फाइलों ही दबा हुआ है।
3. सिक्स लेन राष्ट्रीय राजमार्ग के समानांतर एक और आठ मार्ग का हाईवे तैयार करना। यह हाईवे यमुना नदी के किनारे बनाए जाने की बात सामने आई थी लेकिन इस सरकार में इस बारे में कोई चर्चा नहीं हुई। इस बार यह मुद्दा भी जोरशोर से उठाया जाएगा।
4. टूटी सड़कें-लोकसभा चुनाव में टूटी सड़कों और स्टेट हाइवे की खस्ताहालत को मुद्दा बनाया जाएगा। खासकर करनाल शहर को कस्बों से जोड़ने वाली सड़कें खराब हैं। चुनाव में विपक्षी इसे मुद्दा बनाएंगे।

करनाल के ये बने सांसद

1952-57- वीरेंद्र कुमार सत्यवती -कांग्रेस
1957-62-सुभद्रा जोशी -कांग्रेस
1962-67- स्वामी रामेश्वरानंद -जनसंघ
1967-71- माधो राम शर्मा-कांग्रेस
1971-77- माधो राम शर्मा-कांग्रेस
1977-80- मोहिंद्र सिंह लाठर-जनता पार्टी
1977-80- भगवत दयाल शर्मा-जनता पार्टी
1980-84- पंडित चिरंजी लाल शर्मा-कांग्रेस
1984-89  पंडित चिरंजी लाल शर्मा-कांग्रेस
1989-91-पंडित चिरंजी लाल शर्मा-कांग्रेस
1991-96-पंडित चिरंजी लाल शर्मा-कांग्रेस
1996-98- आइडी स्वामी-भाजपा
1998-99- भजनलाल-कांग्रेस
1999-04- आइडी स्वामी-भाजपा
2004-2009- अरविंद कुमार शर्मा-कांग्रेस
2009-2014- अरविंद कुमार शर्मा-कांग्रेस
2014-अब तक -अश्विनी चोपड़ा-भाजपा

 

करनाल की खास बातेें

हरियाणा में स्थित करनाल एक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र है। यह हरियाणा के 10 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। यह शहर यमुना नदी के किनारे स्थित है। दंतकथा के अनुसार करनाल शहर को महाभारत के राजा कर्ण ने बसाया था। राजा कर्ण के नाम पर ही शहर का नाम करनाल पड़ा है। यहां 1952 में पहला लोकसभा चुनाव हुआ था। जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विरेंद्र कुमार सत्यवादी ने जीत हासिल की थी। घरौंड़ा, नीलोखेड़ी, असन्ध, इन्द्री और तरावड़ी इसके मुख्य दर्शनीय स्‍थल हैं। करनाल अपने अनाज, कपास और नमक के बाजार के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है। यहां पर मुख्यत: धान की खेती की जाती है। यहां के कलन्दर शाह गुम्बद, छावनी चर्च और सीता माई मन्दिर पर्यटन स्थल प्रमुख हैं। यह सभी बहुत खूबसूरत हैं और पर्यटकों को बहुत पसंद आते हैं। दिल्ली से इसकी दूरी 117 किलोमीटर है।

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  • सीटें534
  • महिला मतदाता771,000
  • पुरुष मतदाता913,321
  • कुल मतदाता1,684,321

घोषित उम्मीदवार लोकसभा 2019

लोकसभा चुनाव

    अश्विनी कुमार चोपड़ा

    विजयी सांसद – 2014
    • जन्मतिथि26 अक्टूबर 1952
    • जेंडरM
    • शिक्षाग्रेजुएट
    • संपत्ति69.86 करोड़

    पूर्व सांसद

    • संजय भाटिया

      बीजेपी2019

    • अरविंद कुमार शर्मा

      कांग्रेस2009

    • अरविंद कुमार शर्मा

      कांग्रेस2004

    • आईडी स्वामी

      बीजेपी1999

    • भजन लाल

      कांग्रेस1998

    • ईश्वर दयाल स्वामी

      बीजेपी1996

    • चिरंजी लाल शर्मा

      कांग्रेस1991

    • चिरंजीत लाल

      कांग्रेस1989

    • चिरंजी लाल

      कांग्रेस1984

    • चिरंजी लाल

      कांग्रेस1980

    • भगवत दयाल

      बीएलडी1977

    • माधो राम

      कांग्रेस1971

    • एम राम

      कांग्रेस1967

    • रामेश्‍वरानंद

      जेएसी1962

    • सुभद्रा जोशी

      कांग्रेस1952

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    किसने क्या कहा और पढ़ें

    • अरुण जेटली(भाजपा)

      प्रधानमंत्री की जाति कैसे प्रासंगिक है? उन्होंने कभी जाति की राजनीति नहीं की। उन्होंने केवल विकासात्मक राजनीति की है। वह राष्ट्रवाद से प्रेरित हैं। जो लोग जाति के नाम पर गरीबों को धोखा दे रहे हैं वे सफल नहीं होंगे। ऐसे लोग जाति की राजनीति के नाम पर केवल दौलत बटोरना चाहते हैं। बीएसपी या आरजेडी के प्रमुख परिवारों की तुलना में प्रधानमंत्री की संपत्ति 0.01 फीसद भी नहीं है।

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    • दिग्विजय सिंह(कांग्रेस)

      मैं सदैव देशहित, राष्ट्रीय एकता और अखंडता की बात करने वालों के साथ रहा हूं। मैं धार्मिक उन्माद फैलाने वालों के हमेशा खिलाफ रहा हूं। मुझे गर्व है कि मुख्यमंत्री रहते हुए मुझ में सिमी और बजरंग दल दोनों को बैन करने की सिफारिश करने का साहस था। मेरे लिए देश सर्वोपरि है, ओछी राजनीति नहीं।

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    • राहुल गांधी(कांग्रेस)

      हमारे किसान हमारी शक्ति और हमारा गौरव हैं। पिछले पांच साल में मोदी जी और भाजपा ने उन्हें बोझ की तरह समझा और व्यवहार किया। भारत का किसान अब जाग रहा है और वह न्याय चाहता है

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    • नरेंद्र मोदी(भाजपा)

      आज भारत दुनिया में तेजी से अपनी जगह बना रहा है, लेकिन कांग्रेस, डीएमके और उनके महामिलावटी दोस्त इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए वे मुझसे नाराज हैं

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    • राबड़ी देवी(राजद)

      जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर लालू जी से मिलने उनके और तेजस्वी यादव के आवास पर पांच बार आए थे। नीतीश कुमार ने वापस आने की इच्छा जताई थी और साथ ही कहा था कि तेजस्वी को वो 2020 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं और इसके लिए 2019 के लोकसभा चुनाव में लालू उन्हें पीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर दें।

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